झारखंड-छत्तीसगढ़ बॉर्डर बना वन्यजीव तस्करी का सेफ कॉरिडोर, तीन गिरफ्तार
समझें क्या है पूरा मामला
बलरामपुर जिले के रामानुजगंज में वन्यजीव अंगों की अवैध तस्करी का खुलासा हुआ है। वन विभाग की टीम ने कनहर नदी के पास एक लॉज में छापेमारी की। मौके से एक बैग में रखे हाथी के जबड़े के तीन दांत जब्त हुए। पुलिस और वन विभाग ने मिलकर तीन आरोपियों को रंगे हाथ पकड़ा। झारखंड से आए आरोपी के साथ स्थानीय मददगारों को भी गिरफ्तार किया गया है.
लॉज में हुई छापेमारी
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से बड़ी खबर सामने आई है. रामानुजगंज इलाके में वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। यहाँ वन्यजीव अंगों की तस्करी करने वाला एक गिरोह पकड़ा गया है।
टीम को लॉज में तस्करों के ठहरने की गुप्त सूचना मिली थी. सूचना मिलते ही अधिकारियों ने तुरंत एक विशेष टीम का गठन किया। इस टीम ने कनहर नदी के पास स्थित लॉज पर अचानक छापा मारा।
लॉज के एक कमरे की बारीकी से तलाशी ली गई. कमरे में रखे एक बैग से हाथी के तीन दांत बरामद हुए। ये दांत हाथी के जबड़े का हिस्सा बताए जा रहे हैं। टीम ने मौके से ही सभी दांत जब्त कर लिए।
तीन आरोपी हुए गिरफ्तार
इस संयुक्त कार्रवाई में तीन तस्करों को दबोच लिया गया है. पकड़ा गया मुख्य आरोपी संतोष कुमार विश्वकर्मा है। उसकी उम्र 42 साल है और वह झारखंड का निवासी है. वह पलामू जिले का रहने वाला बताया जा रहा है।
मुख्य आरोपी के साथ दो स्थानीय मददगार भी पकड़े गए हैं। इनमें 49 वर्षीय अजय कुमार गुप्ता शामिल है। वहीं तीसरा आरोपी 50 वर्षीय सतेंद्र कुमार रजक है। ये दोनों आरोपी बलरामपुर जिले के ही रहने वाले हैं।
संयुक्त टीम को मिली सफलता
इस कार्रवाई को कई एजेंसियों ने मिलकर अंजाम दिया है। इसमें वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (Wildlife Crime Control Bureau – WCCB) भोपाल की टीम शामिल थी। छत्तीसगढ़ राज्य फ्लाइंग स्क्वॉड ने भी इसमें पूरा सहयोग दिया।
इसके साथ ही बलरामपुर वन मंडल की टीम ने मुख्य भूमिका निभाई. सभी एजेंसियों ने मिलकर इस बड़े अभियान को सफल बनाया। शुरुआती पूछताछ में कई अहम खुलासे सामने आए हैं। पलामू का रहने वाला संतोष ही इन दांतों को लेकर आया था। वह इन्हें ऊंचे दामों में बेचने की फिराक में था। स्थानीय आरोपी ग्राहक तलाशने में उसकी मदद कर रहे थे।
शिकार की जांच जारी
वन विभाग की टीम मामले की गहन जांच में जुटी है। यह पता लगाया जा रहा है कि यह दांत किस हाथी के हैं। हाथी का शिकार किस जंगल में किया गया था, इसकी पड़ताल जारी है। इसके लिए आसपास के जंगलों के आंकड़े खंगाले जा रहे हैं।
तीनों आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। यह कार्रवाई वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत की गई है। अधिकारी अब गिरोह के बाकी सदस्यों का सुराग जुटा रहे हैं। इस अंतरराज्यीय नेटवर्क के तारों को आपस में जोड़ा जा रहा है।
तस्करी के अन्य मामले
छत्तीसगढ़ में पहले भी ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं:
- सूरजपुर जिले में बाघ की खाल बरामद की जा चुकी है। वहां से पेंगोलिन के शल्क भी जब्त किए गए थे।
- रायपुर में 50 करोड़ की डील से पहले तस्कर पकड़े गए थे। वहां जिंदा पेंगोलिन के साथ तस्करों को दबोचा गया था।
- इसके अलावा जगदलपुर में भी बड़ी कार्रवाई हुई थी। चित्रकोट रेंज में 43 किलो पेंगोलिन शल्क बरामद हुए थे। वन विभाग लगातार ऐसे तस्करों पर कड़ी नजर रख रहा है।
FAQ
- रामानुजगंज में क्या बरामद हुआ है?
उत्तर: रामानुजगंज के एक लॉज से हाथी के जबड़े के तीन दांत बरामद हुए हैं. ये दांत एक बैग में छिपाकर रखे गए थे. - वन्यजीव तस्करी मामले में कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया है?
उत्तर: मामले में कुल तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. इनमें एक आरोपी झारखंड के पलामू का और दो स्थानीय निवासी हैं. - तस्करों के खिलाफ किस कानून के तहत कार्रवाई की गई है?
उत्तर: आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है. वन विभाग आगे की जांच कर रहा है.
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