स्कूल में आसाराम की किताब बांटने पर हटाए गए प्रिंसिपल, पेरेंट्स की शिकायत के बाद कार्रवाई
जांच के बाद स्कूल के प्रिंसिपल को पद से हटा दिया गया है।
मामला रघुनाथनगर स्थित स्वामी आत्मानंद स्कूल का है। यहां कक्षा 6वीं से 8वीं तक के बच्चों को ‘संस्कार सरिता’ नाम की किताब बांटी गई थी। इस किताब में आसाराम की तस्वीरें और उनके कथन होने की बात सामने आई है। आरोप है कि बच्चों से किताब पढ़कर आने को कहा गया था। इसके बाद परीक्षा लेने की बात भी कही गई थी।
मामले की जानकारी मिलने पर जिला शिक्षा अधिकारी नरेंद्र निरापुरे ने जांच के निर्देश दिए। जांच के बाद 28 अक्टूबर को प्रिंसिपल महेश प्रजापति को पद से हटा दिया गया। उन्हें संयुक्त जिला कार्यालय की शिक्षा शाखा में अटैच किया गया है।
26 अक्टूबर को स्कूल पहुंचे थे अनुयायी
जानकारी के मुताबिक, 26 अक्टूबर को आसाराम बापू के कुछ अनुयायी रघुनाथनगर स्थित स्वामी आत्मानंद स्कूल पहुंचे थे। बताया गया है कि उन्होंने प्रिंसिपल महेश प्रजापति के माध्यम से बच्चों को ‘संस्कार सरिता’ किताबें बांटीं।
ये किताबें कक्षा 6वीं से 8वीं तक के विद्यार्थियों को दी गई थीं। बच्चों से किताब पढ़कर आने के लिए कहा गया था। साथ ही, किताब पढ़ने के बाद परीक्षा लेने की बात भी कही गई थी।
बाद में जब यह जानकारी बच्चों के माता-पिता तक पहुंची, तो उन्होंने इस पर सवाल उठाए। पेरेंट्स ने स्कूल में इस तरह की किताब बांटे जाने पर आपत्ति जताई। इसके बाद उन्होंने शिक्षा विभाग से शिकायत की और मामले की जांच की मांग की।
पेरेंट्स ने किताब बांटने पर जताई आपत्ति
बच्चों के माता-पिता का कहना था कि स्कूल में पढ़ाई के नाम पर ऐसी किताबें नहीं बांटी जानी चाहिए। उन्होंने आसाराम से जुड़े गंभीर आपराधिक मामलों का हवाला देते हुए सवाल उठाए।
पेरेंट्स ने पूछा कि स्कूल में इस किताब को बांटने की जरूरत क्यों पड़ी? उन्होंने यह भी सवाल किया कि एक विवादित व्यक्ति से जुड़ी किताब बच्चों को क्यों दी गई?
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि बच्चों पर किताब पढ़ने का दबाव भी बनाया गया। उनका कहना था कि किताब पढ़ने के बाद परीक्षा लेने की बात कही गई थी। इससे बच्चों पर अनावश्यक दबाव पड़ सकता है।
माता-पिता ने शिक्षा विभाग से पूरे मामले की जांच करने की मांग की थी। साथ ही, जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने की बात भी कही थी।
DEO के निर्देश पर शुरू हुई जांच
शिकायत सामने आने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी नरेंद्र निरापुरे ने मामले की जांच के निर्देश दिए। इसके बाद वाड्रफनगर के खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) श्याम किशोर जायसवाल स्कूल पहुंचे।
जांच टीम ने स्कूल में बच्चों और उनके माता-पिता से जानकारी ली। बच्चों के बयान भी दर्ज किए गए। जांच के दौरान किताब बांटे जाने से जुड़ी जानकारी जुटाई गई।
बच्चों ने अपने बयान में बताया कि उन्हें ‘संस्कार सरिता’ किताब स्कूल के प्रिंसिपल ने बांटी थी। इसके बाद जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की।
28 अक्टूबर को प्रिंसिपल पर हुई कार्रवाई
जांच के बाद जिला शिक्षा अधिकारी नरेंद्र निरापुरे ने 28 अक्टूबर को प्रिंसिपल महेश प्रजापति को उनके पद से हटा दिया। उन्हें संयुक्त जिला कार्यालय की शिक्षा शाखा में अटैच किया गया है।
उनकी जगह लेक्चरर दुलेश्वर सिंह को स्वामी आत्मानंद स्कूल, रघुनाथनगर के प्रभारी प्राचार्य की जिम्मेदारी दी गई है।
इस कार्रवाई के बाद स्कूल में किताब बांटने का मामला चर्चा में है। शिक्षा विभाग ने शिकायत मिलने के बाद जांच कराई और फिर प्रिंसिपल को पद से हटाने का फैसला लिया।
किताब में आसाराम की तस्वीरें और कथन होने की बात
मामले में जिस किताब का नाम सामने आया है, वह ‘संस्कार सरिता’ है। जानकारी के मुताबिक, किताब में आसाराम की तस्वीरें और उनके कथन हैं।
पेरेंट्स ने इसी बात को लेकर आपत्ति जताई थी। उनका सवाल था कि बच्चों को इस तरह की किताब क्यों दी गई? उन्होंने स्कूल में किताब बांटने के उद्देश्य पर भी सवाल उठाए।
इस मामले में बच्चों के बयान जांच का अहम हिस्सा रहे। विद्यार्थियों ने बताया कि किताबें प्रिंसिपल के माध्यम से बांटी गई थीं। इसके बाद शिक्षा विभाग ने कार्रवाई की।