न भवन, न छात्र: बलरामपुर का अनोखा स्कूल, फिर भी दो शिक्षकों की पोस्टिंग
समझें क्या है पूरा मामला
- बरदबंधा का सरकारी स्कूल बना बिना बच्चों वाली पाठशाला
- न भवन बचा न छात्र आए, फिर भी दो शिक्षक तैनात
- 11 लाख मंजूर हुए, चार साल बाद भी स्कूल अधूरा
- किचन शेड से शुरू हुई पढ़ाई, अब स्कूल पूरी तरह खाली
- व्यवस्था की लापरवाही से गांव के बच्चे दूसरे स्कूलों में पहुंचे
बलरामपुर जिले के बरदबंधा गांव में सरकारी प्राथमिक स्कूल बिना भवन और बिना छात्रों के चल रहा है। स्कूल में दो शिक्षक पदस्थ हैं, लेकिन इस सत्र में एक भी बच्चे का दाखिला नहीं हुआ है।
जर्जर भवन टूटने के बाद नहीं बन पाया नया स्कूल
बलरामपुर विकासखंड के बरदबंधा गांव में सरकारी प्राथमिक शाला की स्थिति काफी खराब है। कुछ साल पहले स्कूल का पुराना भवन जर्जर हो गया था। सुरक्षा को देखते हुए उसे तोड़ दिया गया।
इसके बाद नए भवन के लिए साल 2022 में करीब 11 लाख रुपए स्वीकृत हुए थे। निर्माण सामग्री भी गांव तक पहुंची थी। इसके बाद भी स्कूल भवन का काम शुरू नहीं हो पाया।
ग्रामीणों के मुताबिक भवन निर्माण के लिए कई बार अधिकारियों को जानकारी दी गई। इसके बावजूद अब तक स्कूल की नई बिल्डिंग तैयार नहीं हो सकी।
किचन शेड में लगती थी बच्चों की क्लास
स्कूल भवन नहीं होने के कारण बच्चों की पढ़ाई मिड-डे मील वाले किचन शेड में कराई जा रही थी। छोटे से कमरे में खाना बनाने के साथ बच्चों की कक्षाएं भी लगती थीं।
पिछले सत्र में यहां सिर्फ तीन बच्चे पढ़ रहे थे। इनमें पहली कक्षा के दो और दूसरी कक्षा का एक छात्र शामिल था।
स्कूल की खराब व्यवस्था देखकर तीनों बच्चों के अभिभावकों ने इस सत्र में उनका दाखिला दूसरे स्कूलों में करा दिया। इसके बाद अगस्त तक शिक्षक नए बच्चों के प्रवेश का इंतजार करते रहे, लेकिन कोई भी बच्चा स्कूल नहीं पहुंचा।
कागजों में चल रहा स्कूल, जमीन पर सन्नाटा
बरदबंधा प्राथमिक शाला में वर्तमान में दो शिक्षकों की पदस्थापना है। इनमें एक प्रधान पाठक और एक शिक्षक शामिल हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि एक शिक्षक लंबे समय से स्कूल नहीं आ रहे हैं। इस मामले में विकासखंड शिक्षा अधिकारी संजू कनौजिया ने बताया कि संबंधित शिक्षक गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं।
उन्होंने बताया कि स्कूल भवन की मंजूरी मिलने के बाद भी निर्माण पूरा नहीं हो पाया। अब प्रधान पाठक को दूसरे स्कूल में अटैच करने की प्रक्रिया की जा रही है।
बच्चों के दूसरे गांव जाने से बढ़ी परेशानी
ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय पर स्कूल भवन बन जाता तो गांव के बच्चों को दूसरे स्थानों पर नहीं जाना पड़ता। स्कूल में सुविधाओं की कमी के कारण अभिभावकों ने अपने बच्चों का नाम कटवा लिया। इससे गांव का सरकारी स्कूल पूरी तरह खाली हो गया।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि स्वीकृत भवन राशि और निर्माण में हुई देरी की जांच कराई जाए। साथ ही जल्द से जल्द स्कूल भवन बनाकर पढ़ाई शुरू कराई जाए।
शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
बरदबंधा का यह स्कूल सरकारी योजनाओं और जमीनी व्यवस्था के बीच अंतर दिखाता है। एक तरफ स्कूल में शिक्षक मौजूद हैं, दूसरी तरफ पढ़ने वाले बच्चे नहीं हैं। भवन की कमी और प्रशासनिक लापरवाही के कारण एक पूरा स्कूल खाली पड़ा है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कब तक कार्रवाई करता है।
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