11 फर्जी फर्मों के नाम पर 5 करोड़ का लोन घोटाला, EOW-ACB ने बैंक मैनेजर समेत दो के खिलाफ पेश किया चालान

Arun Tiwari | Oct 31, 2026, 17:30 IST
बिलासपुर में 5 करोड़ से ज्यादा का लोन घोटाला, बैंक ऑफ बड़ौदा के मैनेजर और आरोपी के खिलाफ चालान
EOW-ACB has filed a chargesheet against two accused in a ₹5.04 crore bank loan fraud case involving 11 fake firms in Bilaspur
बैंक से करोड़ों रूपए का लोन लेने के लिए अगर किसी के दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल किया जाए, तो यह गंभीर मामला बन जाता है। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में ऐसा ही एक मामला सामने आया है। यहां 11 फर्मों के नाम पर बैंक ऑफ बड़ौदा से 5 करोड़ रूपए से ज्यादा का लोन लिया गया। बाद में इस रकम की अदायगी नहीं की गई।

इस मामले में राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (EOW-ACB) ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने तत्कालीन वरिष्ठ शाखा प्रबंधक राहुल कुमार सिन्हा और विश्वजीत भौमिक के खिलाफ विशेष न्यायालय में चालान पेश किया है। जांच में बैंक को कुल 5 करोड़ 4 लाख 15 हजार रूपए का नुकसान होने की बात सामने आई है।



11 फर्मों के नाम पर लिया गया 5 करोड़ से ज्यादा का लोन

यह पूरा मामला बैंक ऑफ बड़ौदा की बिलासपुर स्थित राजकिशोर नगर शाखा से जुड़ा है। बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय से शिकायत मिलने के बाद EOW-ACB रायपुर ने जांच शुरू की थी।



जांच के बाद 28 जनवरी 2020 को मामला दर्ज किया गया। एजेंसी ने पाया कि 11 फर्मों के नाम पर अलग-अलग तरह के बैंक लोन लिए गए थे। लेकिन इन फर्मों ने लोन की रकम वापस नहीं की।



इस मामले में दो लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें विश्वजीत भौमिक निवासी विवेकानंद नगर, बिलासपुर और तत्कालीन वरिष्ठ शाखा प्रबंधक राहुल कुमार सिन्हा शामिल हैं।



राहुल कुमार सिन्हा वर्तमान में गुजरात के कच्छ जिले की गढ़सीसा शाखा में बैंक ऑफ बड़ौदा के वरिष्ठ प्रबंधक के पद पर पदस्थ हैं।




लोगों के आधार और पैन कार्ड से बनाई गईं फर्जी फर्में

EOW-ACB की जांच में दस्तावेजों के गलत इस्तेमाल की बात सामने आई है। जांच एजेंसी के मुताबिक, विश्वजीत भौमिक बिलासपुर के जरहाभाठा स्थित उड़ान माइक्रो फाइनेंस कार्यालय से लोगों को छोटे लोन दिलाने का काम करता था।



वह लोगों को बैंकों से कर्ज दिलाने में भी मदद करता था। इस दौरान वह उनसे कई जरूरी दस्तावेज लेता था।



इनमें आधार कार्ड, पैन कार्ड, KYC दस्तावेज और संपत्ति के मूल कागजात शामिल थे। इसके अलावा बैंक के फॉर्म और खाली चेक पर भी लोगों के हस्ताक्षर कराए जाते थे।



जांच में आरोप है कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल लोगों की जानकारी और सहमति के बिना फर्म बनाने में किया गया। इन फर्मों को संबंधित लोगों के नाम पर दिखाया गया।



कुछ फर्मों में भौमिक ने अपने कार्यालय में काम करने वाले कर्मचारियों को ही मालिक यानी प्रोपराइटर बता दिया था।



जांच में तीन फर्मों के दुकान एवं स्थापना पंजीयन प्रमाणपत्र भी फर्जी पाए गए। एजेंसी के अनुसार, ये प्रमाणपत्र भौमिक के निर्देश पर उसके कार्यालय में तैयार किए गए थे।




बैंक के नियमों को नजरअंदाज कर दिए गए लोन

जांच एजेंसी के मुताबिक, 20 मार्च 2018 से 3 मई 2019 के बीच 11 फर्मों को बैंक से लोन की सुविधा दी गई।



इस दौरान तत्कालीन वरिष्ठ शाखा प्रबंधक राहुल कुमार सिन्हा पर बैंक के नियमों की अनदेखी करने का आरोप है।



इन फर्मों को कई तरह के लोन दिए गए थे। इनमें कैश क्रेडिट, ओवरड्राफ्ट, बैंक गारंटी और टर्म लोन शामिल थे।



जांच में यह भी सामने आया कि लोन लेते समय कुछ ऐसे लोगों की संपत्ति बैंक में बंधक रखी गई, जिनका संबंधित फर्मों से कोई संबंध नहीं था।



इसके अलावा, लोन मंजूर करने से पहले बैंक की ओर से निरीक्षण रिपोर्ट तैयार की गई थी। इसमें फर्मों के कारोबार और पते को लेकर गलत जानकारी दर्ज होने की बात सामने आई।



एक फर्म का व्यावसायिक पता वास्तव में विश्वजीत भौमिक का उस समय का निवास स्थान था। लोन से जुड़े अप्रेजल नोट भी शाखा प्रबंधक ने तैयार किए थे।




लोन की रकम दूसरे खातों में भेजी गई

इस मामले में जांच के दौरान एक और अहम जानकारी सामने आई। बैंक से मिली लोन की रकम का इस्तेमाल फर्मों के वास्तविक कारोबार में नहीं किया गया।



इसके बजाय पैसे को अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया। बाद में इस रकम को निकाल लिया गया।



EOW-ACB के अनुसार, जांच में विश्वजीत भौमिक को इस रकम का अंतिम लाभार्थी पाया गया।



जांच एजेंसी का कहना है कि बैंक से मिली रकम राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम यानी NSIC के माध्यम से भौमिक की अपनी फर्म ए.बी. फास्टनर्स तक पहुंचाई गई।



इसके अलावा, कूटरचित बिलों के आधार पर NSIC रायपुर से भी भुगतान लेने का आरोप है।



2019 में ही खराब हो गए थे सभी 11 लोन खाते

बैंक की ओर से किए गए निरीक्षण में एक और बात सामने आई। जांच के अनुसार, मौके पर किसी भी फर्म की वास्तविक व्यावसायिक इकाई नहीं मिली।



इसके बावजूद इन फर्मों के नाम पर बैंक से लोन मंजूर किए गए थे।



लोन की रकम वापस नहीं आने के कारण सभी 11 खाते वर्ष 2019 में ही NPA यानी गैर-निष्पादित परिसंपत्ति बन गए थे।



इससे बैंक ऑफ बड़ौदा को कुल 5,04,15,000 रूपए का आर्थिक नुकसान हुआ।




किन धाराओं में पेश किया गया चालान?

EOW-ACB ने जांच पूरी करने के बाद दोनों आरोपियों के खिलाफ विशेष न्यायालय में चालान पेश किया है।



जांच एजेंसी ने भारतीय दंड संहिता की इन धाराओं के तहत कार्रवाई की है:



  • धारा 420: धोखाधड़ी से जुड़ा आरोप।
  • धारा 467: महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जालसाजी।
  • धारा 468: धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी।
  • धारा 471: जाली दस्तावेजों को असली बताकर इस्तेमाल करना।
  • धारा 120-B: आपराधिक षड्यंत्र।

इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 12 और 13(2) के तहत भी चालान पेश किया गया है।



अब आगे क्या ?

EOW-ACB ने अपनी विवेचना पूरी कर मामला न्यायालय में पेश कर दिया है। अब इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया चलेगी।



जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि दोनों आरोपियों ने मिलकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 11 फर्मों के नाम पर बैंक से लोन लिया। इससे बैंक को 5 करोड़ रूपए से ज्यादा का नुकसान हुआ।



फिलहाल मामला न्यायालय के विचाराधीन है। आगे की कार्रवाई में आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जाएगी।

Tags:
  • 5 करोड़ का लोन घोटाला
  • लोन घोटाला
  • बैंक ऑफ बड़ौदा
  • बैंक ऑफ बड़ौदा लोन घोटाला
  • बिलासपुर लोन घोटाला
  • बिलासपुर