बस्तर में बहुभाषी शिक्षा मॉडल लागू, 2026-27 के लिए बनेगा नया मॉड्यूल
समझें क्या है पूरा मामला
- बस्तर जिले के प्राथमिक स्कूलों में स्थानीय बोलियों से पढ़ाई शुरू हुई है।
- क्षेत्र के 1497 प्राथमिक स्कूलों में बहुभाषी शिक्षा मॉडल लागू किया गया है।
- यह पढ़ाई हल्बी, भतरी, गोंडी और मिश्रित स्थानीय बोलियों में कराई जा रही है।
- शिक्षकों को बच्चों को बेहतर ढंग से पढ़ाने का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।
- अगले शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए अब नया मॉड्यूल तैयार किया जा रहा है।
स्थानीय भाषा से बढ़ेगी बच्चों की समझ
बस्तर के आदिवासी अंचल में बच्चों की शुरुआती पढ़ाई को सहज और प्रभावी बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। शिक्षा विभाग का मानना है कि बच्चे जिस भाषा को अपने घर-परिवार में सहजता से बोलते और समझते हैं, उसी माध्यम से पढ़ाई शुरू होने पर उनकी सीखने की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार होता है। इसी सोच के साथ जिले के लगभग 1500 प्राथमिक स्कूलों में बहुभाषी शिक्षा मॉडल को लागू किया गया है, ताकि शुरुआती कक्षाओं में बच्चों को भाषा संबंधी किसी कठिनाई का सामना न करना पड़े।
1497 प्राथमिक स्कूलों में नया मॉडल लागू
जिला शिक्षा अधिकारी बलिराम बघेल के अनुसार, बस्तर में कुल 1524 प्राथमिक शालाएं संचालित हैं। इनमें से 1497 स्कूलों में स्थानीय और मिश्रित भाषाओं के जरिए पढ़ाई कराई जा रही है। आंकड़े बताते हैं कि 653 स्कूलों में हल्बी, 308 स्कूलों में भतरी और 203 स्कूलों में गोंडी बोली को माध्यम बनाया गया है। इसके अलावा 333 स्कूलों में मिश्रित स्थानीय भाषाओं का प्रयोग हो रहा है। इस व्यवस्था से अकेले हल्बी माध्यम में 15 हजार 423 और भतरी माध्यम में 9 हजार 201 बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
शिक्षकों को दिया जा रहा विशेष प्रशिक्षण
बहुभाषी शिक्षा व्यवस्था को धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए शिक्षकों और प्रशिक्षकों की क्षमता निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। हाल ही में आयोजित तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में 5 ब्लॉक रिसोर्स ग्रुप के सदस्यों और एलएलएफ (LLF – Language and Learning Foundation) की 24 सदस्यीय टीम ने भाग लिया। इस दौरान कक्षा शिक्षण, बच्चों के सीखने की प्रक्रिया, सतत आकलन और बहुभाषी शिक्षण सामग्री के बेहतर इस्तेमाल के तरीके सिखाए गए।
सत्र 2026-27 के लिए बनेगा नया मॉड्यूल
शिक्षा विभाग अब आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए बहुभाषी शिक्षा का नया और बेहतर मॉड्यूल तैयार करने की प्रक्रिया में जुट गया है। इसका मुख्य उद्देश्य स्थानीय बोलियों और स्कूली पाठ्यक्रम के बीच मजबूत तालमेल बिठाना है। इस पहल से न केवल आदिवासी अंचल के बच्चों में स्कूल आने के प्रति झिझक खत्म होगी, बल्कि बस्तर क्षेत्र में प्राथमिक शिक्षा के समग्र स्तर और बच्चों की उपस्थिति में भी बड़ा सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।
FAQ
- बस्तर के कितने प्राथमिक स्कूलों में बहुभाषी शिक्षा लागू है?
बस्तर के 1497 प्राथमिक स्कूलों में बहुभाषी शिक्षा मॉडल लागू किया गया है। - बस्तर में किन स्थानीय बोलियों में पढ़ाई कराई जा रही है?
स्कूलों में मुख्य रूप से हल्बी, भतरी, गोंडी और मिश्रित स्थानीय बोलियों में पढ़ाई हो रही है। - बहुभाषी शिक्षा मॉडल का मुख्य उद्देश्य क्या है?
बच्चों को उनकी घर की भाषा में पढ़ाकर सीखने की क्षमता और समझ को बेहतर बनाना है।
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