बस्तर में शिक्षा की वापसी: नक्सल प्रभावित चार जिलों में खुलेंगे 80 नए सरकारी स्कूल
समझें क्या है पूरा मामला
बस्तर के तीन जिलों में 20 साल पहले भारी खौफ था। नक्सलियों ने तब 123 सरकारी स्कूलों को पूरी तरह तबाह कर दिया था। अब सुरक्षा हालात बेहतर होने पर इनमें से 93 स्कूल दोबारा शुरू हो चुके हैं। प्रशासन ने अब प्रभावित इलाकों में 80 नए स्कूल खोलने की योजना बनाई है। इससे हजारों बच्चों को अपने ही गांव में पढ़ने का मौका मिलेगा।
बस्तर में शिक्षा की नई शुरुआत
बस्तर में अब बदलाव की हवा बह रही है। जिन गांवों में कभी बंदूकें गूंजती थीं, वहां अब किताबों की गूंज है। दो दशक पहले नक्सलियों ने शिक्षा व्यवस्था को निशाना बनाया था। उन्होंने स्कूलों के भवनों को बम और आग से नुकसान पहुंचाया। इस हिंसा का सबसे बुरा असर मासूम बच्चों पर पड़ा। पढ़ाई बंद होने से बच्चे शिक्षा से पूरी तरह दूर हो गए। कई बच्चों को दूर छात्रावासों में जाना पड़ा। इससे बच्चे अपने परिवार से लंबे समय तक दूर रहे।
हाल के वर्षों में सुरक्षा बलों के प्रयासों से स्थिति बदली है। शांति लौटने के बाद सरकार ने बंद पड़े स्कूलों को दोबारा खोलने का काम शुरू किया। वर्ष 2024 में 41 बंद स्कूलों को फिर से चालू किया गया। इन स्कूलों में 532 बच्चों ने तुरंत दाखिला लिया। इसके बाद वर्ष 2026 में 52 और बंद स्कूल शुरू किए गए। इन नए खुले स्कूलों में 1000 से अधिक बच्चों ने प्रवेश लिया है।
80 नए स्कूल खोलने का बड़ा प्रस्ताव
पुराने स्कूलों को चालू करने के बाद अब नेटवर्क बढ़ाने की तैयारी है। शिक्षा विभाग ने शासन को 80 नए स्कूल खोलने का प्रस्ताव भेजा है। यह नए स्कूल सबसे अधिक प्रभावित चार जिलों में खोले जाएंगे। इसमें बीजापुर में सबसे ज्यादा 35 नए स्कूल प्रस्तावित हैं। सुकमा जिले में 19 नए स्कूल खोले जाने की योजना है।
नारायणपुर जिले में 25 नए स्कूल खोलने की तैयारी है। दंतेवाड़ा जिले में भी 1 नया स्कूल खोला जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद इनका निर्माण वीवीजीरामजी योजना के तहत होगा। हाल ही में सुकमा कलेक्टर के दौरे में ग्रामीणों ने स्कूल मांगे थे। इससे साफ है कि अब ग्रामीण शिक्षा के प्रति जागरूक हो रहे हैं।
नक्सलियों ने क्यों जलाए थे स्कूल
नक्सली ग्रामीण इलाकों में स्कूलों को केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं मानते थे। वे स्कूलों को सरकार की मौजूदगी का बड़ा प्रतीक मानते थे। स्कूलों में शिक्षक पहुंचते थे। सरकारी योजनाओं की जानकारी गांव तक पहुंचती थी। प्रशासनिक गतिविधियां भी स्कूलों के जरिए ही गांव तक जाती थीं।
नक्सली ग्रामीणों को सरकारी व्यवस्था से दूर रखना चाहते थे। इसलिए उन्होंने चुन-चुनकर स्कूल भवनों को निशाना बनाया। वे ग्रामीणों पर अपना प्रभाव बनाए रखना चाहते थे। स्कूल बंद होने से सरकारी तंत्र कमजोर हुआ और नक्सली हावी रहे। लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। ग्रामीण अब विकास और शिक्षा की मांग कर रहे हैं।
FAQ
- नक्सलियों ने बस्तर में कितने स्कूलों को नुकसान पहुंचाया था?
वर्ष 2005-06 के दौरान सुकमा, बीजापुर और नारायणपुर में नक्सलियों ने 123 स्कूलों को बम या आग से तबाह कर दिया था। - बस्तर में अब तक कितने बंद स्कूल दोबारा खोले जा चुके हैं?
2024 में 41 स्कूल और 2026 में 52 स्कूल, यानी कुल 93 बंद स्कूल दोबारा चालू किए जा चुके हैं। - बस्तर में नए प्रस्तावित 80 स्कूल किस योजना के तहत बनाए जाएंगे?
शासन की मंजूरी मिलने के बाद इन सभी नए 80 स्कूलों का निर्माण वीवीजीरामजी योजना के तहत किया जाएगा।
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