बस्तर के 497 गांवों में पहली बार होगा राजस्व सर्वे, IIT रुड़की को मिली जिम्मेदारी

Aishwarya Dwivedi | Apr 22, 2026, 15:41 IST
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बस्तर के 497 गांवों में पहली बार राजस्व सर्वे शुरू होगा। IIT रुड़की तकनीकी मदद से अबूझमाड़ सहित दूरदराज क्षेत्रों का वैज्ञानिक सर्वे होगा, ग्रामीणों को मिलेगा भू-स्वामी अधिकार।

छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग से एक ऐसी खबर सामने आई है जो आने वाले दशकों में इस क्षेत्र की तस्वीर बदल देगी। राज्य सरकार आगामी मई माह से बस्तर संभाग के 497 गांवों में आधिकारिक राजस्व सर्वे शुरू करने जा रही है। इस अभियान की सबसे खास बात यह है कि इसमें नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ के वे इलाके भी शामिल हैं, जहाँ आजादी के बाद से आज तक प्रशासन के कदम नहीं पड़े थे।



दशकों का अबूझ अंधेरा होगा खत्म

अबूझमाड़ का अर्थ ही 'अनसुलझा' होता है। लगभग 5,000 वर्ग किलोमीटर में फैला यह दुर्गम इलाका माओवादी डर और भौगोलिक चुनौतियों के कारण दशकों से सरकारी रिकॉर्ड से बाहर था। रिपोर्ट के अनुसार, अकेले अबूझमाड़ के 240 गांव ऐसे हैं जहाँ आज तक न तो कोई पटवारी पहुंचा और न ही कोई सरकारी सर्वेक्षक। सरकारी रिकॉर्ड में इन गांवों की अनुपस्थिति का मतलब था कि यहाँ के निवासियों के पास न तो अपनी जमीन के हक के दस्तावेज थे और न ही वे सरकारी योजनाओं का प्रत्यक्ष लाभ उठा पा रहे थे।



IIT रुड़की करेगा वैज्ञानिक मैपिंग

इस वृहद परियोजना को तकनीकी रूप से सटीक बनाने के लिए सरकार ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT-रुड़की) के साथ हाथ मिलाया है। इसी साल जनवरी में हुए एक समझौते (MoU) के तहत IIT रुड़की के विशेषज्ञ वैज्ञानिक पद्धति से इन इलाकों का नक्शा तैयार करेंगे। सर्वे में केवल जमीन की पैमाइश ही नहीं होगी, बल्कि आधुनिक तकनीक का उपयोग कर निम्नलिखित संसाधनों का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा:



  • जल स्रोत एवं नदियाँ: क्षेत्र के जल स्तर और प्रवाह का मानचित्रण।
  • वन संपदा: जंगलों के घनत्व और प्रकार की पहचान।
  • कृषि भूमि: ग्रामीणों के खेतों का सीमांकन।
  • सार्वजनिक स्थल: तालाबों और साझा जमीनों का विवरण।

विकास की मुख्यधारा से जुड़ेंगे ग्रामीण

यह सर्वे केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि बस्तर के सुदूर जिलों—बीजापुर, सुकमा, कोंडागांव, बस्तर, कांकेर और दंतेवाड़ा—के सैकड़ों गांवों के लिए विकास का प्रवेश द्वार है। राजस्व रिकॉर्ड दर्ज होने के बाद:



  • ग्रामीणों को भू-स्वामी अधिकार मिलेंगे।
  • किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) और कृषि अनुदान जैसी सुविधाएं मिल सकेंगी।
  • स्कूल, अस्पताल और सड़कों के निर्माण के लिए भूमि आवंटन आसान होगा।
  • क्षेत्र में माओवाद के प्रभाव को कम कर शासन की पकड़ मजबूत होगी।

निष्कर्ष

बस्तर के ये 'गुमनाम' गांव अब आधिकारिक रूप से छत्तीसगढ़ के मानचित्र पर अपनी जगह बनाएंगे। मई से शुरू होने वाला यह राजस्व सर्वे बस्तर में शांति और समृद्धि की एक नई इबारत लिखने की दिशा में सरकार का अब तक का सबसे बड़ा साहसिक कदम माना जा रहा है।



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