पेड़ की छांव में चौपाल और भ्रष्टाचार पर प्रहार... विष्णुदेव साय का सादगी व सख्ती वाला सुशासन मॉडल
Raipur. राजनीति में कई नेता आते हैं और चले जाते हैं, लेकिन कुछ लीडर अपनी कार्यशैली से अलग पहचान बना लेते हैं। जशपुर की मिट्टी से निकलकर प्रदेश की सर्वोच्च जिम्मेदारी तक पहुंचे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने अब तक के राजनीतिक सफर में ऐसी ही पहचान बनाई है। उनकी छवि ऐसे नेता की बनकर उभरी है, जो आम लोगों के बीच सहजता से पहुंचते हैं, उनकी समस्याएं सुनते हैं और जरूरत पड़ने पर प्रशासनिक सख्ती दिखाने से भी पीछे नहीं हटते।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय केकार्यकाल में कई ऐसे अवसर आए हैं,जब लोगों ने उन्हें संवेदनशील जनप्रतिनिधि और सख्त प्रशासक दोनों रूपों में देखा है। वर्ष 2026 का सुशासन तिहार इसी का बड़ा उदाहरण है।सुशासन तिहार के दौरान मुख्यमंत्री साय ने प्रदेश के दूर-दराज गांवों तक पहुंचकर यह संदेश दिया कि सरकार केवल राजधानी या जिला मुख्यालयों तक सीमित नहीं है,गांवों और अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने के लिए प्रतिबद्ध है। दूसरी ओर उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था को भी साफ संकेत दिया कि लापरवाही,भ्रष्टाचार और जनता की समस्याओं के प्रति उदासीनता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जब मुख्यमंत्री ने छोड़ी औपचारिकता
सुशासन तिहार के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का अलग ही रूप प्रदेश ने देखा। आमतौर पर बड़े नेताओं के दौरे मंचों,सभागारों और भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच होते हैं,लेकिन साय ने इस परंपरा से अलग रास्ता चुना।वे सरगुजा,सक्ती,जांजगीर-चांपा,दंतेवाड़ा,बस्तर और अन्य दूरस्थ क्षेत्रों के गांवों में पहुंचे।
कई जगह उन्होंने पेड़ की छांव के नीचे चौपाल लगाई। ग्रामीणों के बीच चटाई और साधारण कुर्सियों पर बैठकर बातचीत की। महिलाओं,बुजुर्गों,किसानों और युवाओं से सीधे संवाद किया।स्थानीय बोली में बातचीत और आत्मीय व्यवहार ने लोगों के बीच यह भरोसा पैदा किया कि सरकार उनकी बात सुनने के लिए खुद उनके दरवाजे तक पहुंची है। ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं खुलकर रखीं और मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को मौके पर ही निर्देश दिए।
संवेदनशीलता की मिसाल बने कई मामले
सुशासन तिहार के दौरान कई ऐसे मामले सामने आए,जिन्होंने मुख्यमंत्री की संवेदनशील कार्यशैली को उजागर किया। जांजगीर-चांपा जिले के सरखों गांव में लंबे समय से समस्या के समाधान के लिए प्रयास कर रहे मोहनलाल को राहत मिली। सक्ती जिले के लहंगा गांव में राशन कार्ड के लिए परेशान ज्योति कुमारी कंवर की समस्या मुख्यमंत्री के संज्ञान में आई तो उन्होंने तत्काल अधिकारियों को बुलाकर समाधान सुनिश्चित कराया।
बालोद और मोहला-मानपुर क्षेत्र में आयोजित शिविरों के दौरान दिव्यांग महिला को आत्मनिर्भर बनाने के लिए तत्काल ई-रिक्शा उपलब्ध कराया गया। ऐसे कई मामलों में लोगों को मौके पर राहत मिलने से सरकार की संवेदनशील छवि मजबूत हुई।
आदिवासी अंचलों में दिखा अपनापन
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के दौरों की काफी चर्चा रही। अंचल में उन्होंने आदिवासी समाज की संस्कृति और परंपराओं के प्रति सम्मान व्यक्त किया। स्थानीय आस्था केंद्रों के विकास कार्यों की समीक्षा की और ग्रामीण परिवारों के साथ जमीन पर बैठकर पारंपरिक भोजन भी किया। ग्रामीणों और आदिवासियों ने इसे औपचारिक कार्यक्रम के बजाय आत्मीय मुलाकात माना। कई लोगों ने कहा कि उन्हें ऐसा लगा जैसे परिवार का कोई सदस्य उनकी समस्याएं सुनने आया हो।
अधिकारियों को दिया कड़ा संदेश
सुशासन तिहार की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह रही कि यह केवल जनसंवाद तक सीमित नहीं रहा। मुख्यमंत्री ने अभियान शुरू होने से पहले ही सभी जिलाकलेक्टर्सको स्पष्ट निर्देश दिए थे कि राजस्व और नागरिक सेवाओं से जुड़े लंबित मामलों का समयबद्ध समाधान किया जाए। नामांतरण,सीमांकन,बंटवारा,आय प्रमाण पत्र,जाति प्रमाण पत्र,निवास प्रमाण पत्र और मनरेगा भुगतान जैसे मामलों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। शिविरों में मिलने वाले नए आवेदनों के निराकरण के लिए अधिकतम 30 दिन की समय सीमा भी तय की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि किसी नागरिक को अपनी जायज मांग के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं तो संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी।
लापरवाह अधिकारियों पर की कार्रवाई
सुशासन तिहार के दौरान और उसके बाद प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। दुर्ग में जनपद पंचायत के सीईओरूपेशपांडे को प्रशासनिक लापरवाही पर निलंबित किया गया। सरगुजा जिले के सीतापुर में नायब तहसीलदार तुषार मानिक को शिकायतें सही पाए जाने पर हटाया। कोरबा में रिश्वत लेते पकड़े गए कर्मचारी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।
मुख्यमंत्री ने राजस्व विभाग को विशेष रूप से निर्देश दिए कि लोगों को भूमि संबंधी मामलों में अनावश्यक देरी का सामना न करना पड़े। सीमांकन,नामांतरण,बंटवारा और रिकॉर्ड सुधार जैसे मामलों के शीघ्र निराकरण पर जोर दिया गया। वहीं,पुलिस को महिलाओं से जुड़ी शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई,अपराध नियंत्रण और अवैध शराब व नशे के कारोबार पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
समाधान शिविरों में हजारों लोगों को मिली राहत
राज्यभर में आयोजित क्लस्टर आधारित समाधान शिविर सुशासन तिहार का प्रमुख हिस्सा रहे हैं। इन शिविरों में राशन कार्ड,आधार कार्ड,पेंशन,राजस्व प्रकरणों और अन्य नागरिक सेवाओं से जुड़े हजारों मामलों का मौके पर समाधान किया गया। लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ी। इन शिविरों की निगरानी मुख्यमंत्री सचिवालय और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा डिजिटल माध्यम से की गई। इससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने में मदद मिली।
सीएम हेल्पलाइन 1076 एक बड़ा कदम
सुशासन तिहार के समापन चरण में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सीएम हेल्पलाइन 1076 की शुरुआत की। इस व्यवस्था का उद्देश्य उन लोगों तक भी प्रशासनिक सहायता पहुंचाना है,जो किसी कारणवश शिविरों तक नहीं पहुंच सके। अब नागरिक घर बैठे अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं और उसके समाधान की जानकारी भी प्राप्त कर सकते हैं। सरकार का मानना है कि डिजिटल माध्यमों के जरिए शासन और जनता के बीच दूरी कम होगी और शिकायतों के समाधान की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।
जीरो टॉलरेंस नीति बनी सरकार की पहचान
मुख्यमंत्री साय कहते हैं कि प्रशासन में लापरवाही और भ्रष्टाचार के लिए कोई जगह नहीं है।कलेक्टर्स कॉन्फ्रेंसमें उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी थी कि खराब काम किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को सुबह 7 बजे से पहले फील्ड में पहुंचने और लोगों के बीच रहने के निर्देश भी दिए। बेमेतरा में सामूहिक विवाह कार्यक्रम के कुप्रबंधन और दुर्ग में अधिकारियों के दुर्व्यवहार जैसे मामलों में त्वरित कार्रवाई कर सरकार ने अनुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संकेत दिया।
नक्सलवाद पर सख्ती, विकास पर जोर
मुख्यमंत्री साय के कार्यकाल की एक बड़ी उपलब्धि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बदलाव को भी माना जा रहा है। सरकार ने 31 मार्च 2026 तक राज्य को नक्सल मुक्त बनाने का लक्ष्य समय से पहले हासिल कर लिया है। साथ ही बस्तर और अन्य प्रभावित क्षेत्रों में सड़क,पुल,शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार पर लगातार काम किया जा रहा है। सरेंडर करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास भी जारी हैं।
भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार कार्रवाई
साय सरकार ने भ्रष्टाचार के मामलों में भी सख्त रुख अपनाया है। शराब घोटाले से जुड़े मामले में 29 में से 22 आबकारी अधिकारियों को निलंबित किया गया है। पीएससी-2021 परीक्षा में अनियमितताओं की जांच सीबीआई को सौंपी गई है। महादेव सट्टा एप मामले में भी सीबीआई जांच कराई जा रही है। भारतमाला परियोजना से जुड़े मामलों में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) को जांच के निर्देश दिए गए हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछले दो वर्षों में एसीबी ने 200 से अधिक भ्रष्ट अधिकारियों को पकड़ा है।
सादगी और सख्ती के बीच सुशासन का मॉडल
इस तरह छत्तीसगढ़ की राजनीति में विष्णुदेव साय की कार्यशैली का सबसे अलग पहलू यही माना जा रहा है कि उन्होंने जनसंपर्क और प्रशासनिक अनुशासन को साथ लेकर चलने की कोशिश की है। एक तरफ वे गांवों में बैठकर लोगों की बातें सुनते हैं,दूसरी तरफ लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई करने से भी नहीं हिचकते। सुशासन तिहार,समाधान शिविर,सीएम हेल्पलाइन,तकनीक आधारित निगरानी और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई जैसे कदमों ने उनकी प्रशासनिक शैली को नई पहचान दी है।RO.13847/13