चंद्राकर परिवार की नगरपालिका अध्यक्ष ने कमाए 27 लाख, पंप मैनेजर भी नहीं रहा पीछे

Arun Tiwari | Jul 10, 2026, 15:54 IST
भारतमाला में भ्रष्टाचार 2026
छत्तीसगढ़ के भारतमाला प्रोजेक्ट में मुआवजा घोटाले की जांच में नए खुलासे हुए हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार धमतरी के कुरुद नगर पालिका अध्यक्ष ज्योति चंद्राकर, उनके पति और मां के नाम पर एक ही जमीन का विभाजन कर 27 लाख का मुआवजा लिया गया।

समझें क्या है पूरा मामला

  • भारतमाला प्रोजेक्ट का एक और फर्जीवाड़ा
  • नगर पालिका अध्यक्ष ने की कमाई
  • जमीन के टुकड़े पर ले लिए 27 लाख
  • परिवार के नाम पर अवैध कमाई
  • कुरुद की नगर पालिका अध्यक्ष

भारतमाला प्रोजेक्ट में मुआवजे के नाम पर भ्रष्टाचार करने वालों में नए-नए नाम सामने आ रहे हैं। मुआवजे के नाम पर अवैध कमाई करने वाले कुछ और रसूखदारों के नाम उजागर हुए हैं। चंद्राकर परिवार की नगर पालिका अध्यक्ष ने भी यह कमाई की है।



उन्होंने अपने नाम के साथ ही पति और मां के नाम पर भी मुआवजा हासिल किया है। इतना ही नहीं कुछ रसूखदारों ने तो अपने पेट्रोल पंप के मैनेजर को भी भ्रष्टचार की नदी में हाथ धुलवा दिए। यह सब फर्जीवाड़ा सरकार की जांच में आया है। यह वही रिपोर्ट है जो जांच एजेंसियों के पास है।



चंद्राकर परिवार की नगर पालिका अध्यक्ष :

छत्तीसगढ़ में भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत बन रहे रायपुर से विशाखापट्टनम कॉरिडोर में हुए भ्रष्टाचार का एक और पन्ना सामने आया है। छत्तीसगढ़ में भारतमाला परियोजना के तहत बन रहे रायपुर-विशाखापट्टनम कॉरिडोर में मुआवजा घोटाले की जांच लगातार नए खुलासे कर रही है।



अब जांच एजेंसियों की पड़ताल में सामने आया है कि धमतरी जिले के कुरुद की नगर पालिका अध्यक्ष ज्योति चंद्राकर ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए एक जमीन के तीन टुकड़े किए।



एक अपने नाम पर, दूसरा अपने पति के नाम पर और तीसरा अपनी मां के नाम पर कर दिया। एक जमीन के इन तीन छोटे-छोटे टुकड़ों से 27 लाख रुपए मुआवजे के रूप में कमा लिए। यानी इस भ्रष्टाचार में चंद्राकर परिवार का एक और सदस्य शामिल हो गया।



इस तरह की कमाई :

सरिता चंद्राकर - नगर पालिका अध्यक्ष की मां - रकबा 1607/17 - 923893 रुपए


ज्योति चंद्राकर - नगर पालिका अध्यक्ष - रकबा 1607/18 - 923893 रुपए


भानु चंद्राकर - नगर पालिका अध्यक्ष का पति - रकबा 1607/19 - 923893 रुपए



चंद्राकर परिवार का पेट्रोल पंप मैनेजर :

रसूखदार तो दूर उनके पेट्रोल पंप के मैनेजर ने भी अवैध मुआवजा लिया। भूपेंद्र चंद्राकर के पेट्रोल पंप मैनेजर धनेश्वर निर्मलकर और पत्नी विद्या के नाम पर मुआवजा लिया।



धनेश्वर निर्मलकर - रकबा 13/4 - 512566 रुपए


विद्या निर्मलकर - रकबा 13/4 - 538195 रुपए



भारतमाला परियोजना क्या है :

भारतमाला परियोजना केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है। जिसकी शुरुआत 2017 में हुई। इसका उद्देश्य देशभर में आर्थिक कॉरिडोर, सीमावर्ती सड़कों, तटीय क्षेत्रों और बंदरगाहों को उच्च गुणवत्ता वाले राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क से जोड़ना है। ताकि माल और यात्रियों का आवागमन तेज और सुगम हो सके।



परियोजना के प्रमुख उद्देश्य :

  • देशभर में आर्थिक गलियारों का विकास।
  • प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों, बंदरगाहों और लॉजिस्टिक हब को बेहतर सड़क संपर्क देना।
  • सीमावर्ती और रणनीतिक क्षेत्रों में सड़क नेटवर्क मजबूत करना।
  • यात्रा का समय और परिवहन लागत कम करना।
  • व्यापार, निवेश और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देना।

भारतमाला परियोजना का पहला चरण :

पहले चरण में देशभर में लगभग 34800 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग विकसित करने का लक्ष्य रखा गया था। इस पर करीब 5.35 लाख करोड़ रुपये खर्च का अनुमान लगाया गया था।



छत्तीसगढ़ में भारतमाला परियोजना :

छत्तीसगढ़ में भारतमाला परियोजना के तहत रायपुर–विशाखापट्टनम आर्थिक कॉरिडोर का निर्माण किया जा रहा है। यह कॉरिडोर छत्तीसगढ़, ओडिशा और आंध्र प्रदेश को जोड़ता है।



परियोजना का उद्देश्य रायपुर से विशाखापट्टनम बंदरगाह तक तेज और बेहतर सड़क संपर्क उपलब्ध कराना है, जिससे उद्योगों, खनिज परिवहन और व्यापार को गति मिले।



विवाद क्यों हुआ :

छत्तीसगढ़ में इसी परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण के दौरान कई जगह मुआवजा वितरण में अनियमितताओं के आरोप सामने आए।



जांच में आरोप है कि कुछ मामलों में जमीन का कृत्रिम बंटवारा कर अधिक मुआवजा लिया गया, फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ और राजस्व अधिकारियों तथा अन्य लोगों की कथित मिलीभगत से सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया।



इन्हीं मामलों की विभिन्न जांच एजेंसियां जांच कर रही हैं। भारतमाला परियोजना का उद्देश्य देश में आधुनिक सड़क नेटवर्क बनाना है, लेकिन छत्तीसगढ़ में इसके लिए हुए भूमि अधिग्रहण और मुआवजा वितरण में भ्रष्टाचार के कारण यह परियोजना विवादों में आ गई है।



अब आगे क्या :

जांच एजेंसियां अब इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि मुआवजा स्वीकृत करने की प्रक्रिया में किन-किन अधिकारियों की भूमिका रही और क्या यह मामला केवल कुछ लोगों तक ही सीमित है या इसके पीछे मिलीभगत का नेटवर्क काम कर रहा था।



भारतमाला परियोजना से जुड़े इस घोटाले में लगातार सामने आ रहे खुलासों ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली और भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।



निष्कर्ष :

भारतमाला परियोजना में भूमि अधिग्रहण और मुआवजा वितरण को लेकर पहले भी कई अनियमितताएं सामने आ चुकी हैं।



अब इस नए खुलासे ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि यदि इस तरह की भारी गड़बड़िया हो रही हैं तो पूरी व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा हो जाता है।



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