भिलाई बना CISF के स्टील सेक्टर का राष्ट्रीय मुख्यालय, अब यहीं से होगी देशभर के इस्पात संयंत्रों की सुरक्षा की निगरानी
CISF के इस फैसले से भिलाई को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई जिम्मेदारी मिली है।
भिलाई को मिली स्टील सेक्टर की कमान
CISF ने अपनी संगठनात्मक व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। अब तक बल की कमान क्षेत्रीय व्यवस्था यानी टेरिटोरियल कमांड के आधार पर संचालित होती थी। इस व्यवस्था में एक क्षेत्रीय मुख्यालय को अलग-अलग तरह के प्रतिष्ठानों की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालनी पड़ती थी। अब इसकी जगह विशेषीकृत कार्यात्मक कमान प्रणाली लागू की गई है। इसमें प्रतिष्ठानों के भौगोलिक क्षेत्र के बजाय उनके काम और उद्योग के आधार पर अलग-अलग सेक्टर बनाए गए हैं। इसी नई व्यवस्था के तहत भिलाई को स्टील सेक्टर का मुख्यालय बनाया गया है।
दिल्ली से लेकर गुवाहाटी तक नए सेक्टर
नई व्यवस्था के तहत देश में आठ नए कार्यात्मक सेक्टर बनाए गए हैं। इनमें पावर-I का मुख्यालय नई दिल्ली और पावर-II का मुख्यालय कोलकाता में होगा। कोयला सेक्टर रांची से संचालित होगा, जबकि स्टील सेक्टर की जिम्मेदारी भिलाई को दी गई है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस सेक्टर का मुख्यालय गुवाहाटी में होगा।
इसी तरह पश्चिमी तट के बंदरगाहों की सुरक्षा मुंबई और पूर्वी तट के बंदरगाहों की सुरक्षा चेन्नई से देखी जाएगी। सरकारी भवनों, संग्रहालयों, स्मारकों और मेट्रो की सुरक्षा के लिए दिल्ली में अलग सेक्टर बनाया गया है। ये सभी सेक्टर पहले से काम कर रहे विमानन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष विभाग के सुरक्षा सेक्टरों के साथ मिलकर काम करेंगे।
एक मुख्यालय पर 50 से ज्यादा प्रतिष्ठानों का बोझ
पुरानी व्यवस्था में एक क्षेत्रीय मुख्यालय के पास 50 से ज्यादा अलग-अलग प्रकृति के प्रतिष्ठानों की निगरानी की जिम्मेदारी होती थी। इनमें कोयला खदानें, बिजली संयंत्र और बंदरगाह जैसे संस्थान भी शामिल थे। हर उद्योग की सुरक्षा जरूरत अलग होती है। ऐसे में सभी की निगरानी एक ही कमान से करना चुनौतीपूर्ण था।
नई व्यवस्था में स्टील, कोयला, बिजली और पेट्रोलियम जैसे उद्योगों के लिए अलग-अलग नेतृत्व होगा। इससे संबंधित उद्योगों की सुरक्षा जरूरतों को समझने और उनके प्रबंधन के साथ तालमेल बनाने में आसानी होगी। साथ ही फैसले लेने की प्रक्रिया भी तेज होने की उम्मीद है।
अब सिर्फ गेट की सुरक्षा नहीं, साइबर हमलों पर भी नजर
औद्योगिक प्रतिष्ठानों के सामने अब सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां भी बदल रही हैं। ड्रोन हमले, साइबर अटैक, तोड़फोड़ और औद्योगिक नियंत्रण प्रणालियों में सेंधमारी जैसी चुनौतियां सामने हैं। किसी बड़े स्टील प्लांट या बिजली संयंत्र का काम रुकने से देश की अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है।
नई व्यवस्था में खुफिया जानकारी के आधार पर सुरक्षा रणनीति बनाने पर जोर दिया जाएगा। साइबर सुरक्षा, ड्रोन रोधी तकनीक, प्रवेश नियंत्रण और क्विक रिस्पांस टीम (QRT) को मजबूत किया जाएगा। किसी हमले या सुरक्षा घटना के बाद उद्योग का काम जल्द शुरू हो सके, इसके लिए भी विशेष योजना बनाई जाएगी।
CISF मुख्यालय और उद्योगों के बीच होगा सीधा संपर्क
CISF के महानिदेशक के मुताबिक, नई कमान व्यवस्था से सुरक्षा बल और संबंधित औद्योगिक प्रबंधन के बीच समन्वय बेहतर होगा। हर सेक्टर के लिए एक समर्पित नेतृत्व होने से फैसले लेने में होने वाली देरी कम होगी। संकट के समय कार्रवाई और अलग-अलग एजेंसियों के बीच तालमेल भी बेहतर बनाया जा सकेगाभिलाई के लिए इस बदलाव का मतलब साफ है। अब यह शहर सिर्फ देश के स्टील उत्पादन के नक्शे पर ही नहीं, बल्कि स्टील उद्योगों की सुरक्षा के राष्ट्रीय नक्शे पर भी महत्वपूर्ण जगह रखेगा। देशभर के इस्पात प्रतिष्ठानों की सुरक्षा से जुड़े फैसलों और निगरानी में भिलाई की भूमिका होगी। छत्तीसगढ़ के लिए यह औद्योगिक पहचान के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था में मिली एक नई जिम्मेदारी है।