पूर्व सीएम भूपेश बघेल को सुप्रीम कोर्ट से झटका, जानिए क्या है पाटन चुनाव याचिका का पूरा मामला
जिसमें चुनाव याचिका की सुनवाई के दौरान प्रारंभिक मुद्दे तय करने से इनकार किया गया था। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है।
हाईकोर्ट में 5 नवंबर को दर्ज होगा विजय बघेल का बयान
मंगलवार को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में भाजपा सांसद विजय बघेल की ओर से दायर चुनाव याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान विजय बघेल की गवाही दर्ज की जानी थी, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की ओर से उनके अधिवक्ता ने अदालत में आवेदन प्रस्तुत कर सुनवाई के लिए अगली तारीख देने की मांग की।
भूपेश बघेल के अधिवक्ता ने दलील दी कि संबंधित मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, इसलिए हाईकोर्ट की कार्यवाही फिलहाल आगे नहीं बढ़ाई जाए। इस आग्रह के बाद हाईकोर्ट ने विजय बघेल की गवाही के लिए 5 नवंबर की तारीख निर्धारित की। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट से भूपेश बघेल की एसएलपी खारिज होने की खबर सामने आई।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई में देरी पर जताई नाराजगी
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने चुनाव याचिकाओं के निपटारे में हो रही देरी पर नाराजगी जाहिर की। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने स्पष्ट किया कि चुनाव से संबंधित विवादों का निपटारा उचित समयसीमा के भीतर होना आवश्यक है।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति वी. मोहना ने भूपेश बघेल की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और विवेक तन्खा से मुकदमे की कार्यवाही आगे बढ़ने देने को कहा। पीठ ने सुनवाई में लगातार हो रही देरी को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि मामले में फैसला आने दिया जाना चाहिए।
पाटन विधानसभा चुनाव से जुड़ा है पूरा विवाद
यह कानूनी विवाद छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2023 से जुड़ा हुआ है। दुर्ग जिले की पाटन विधानसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी भूपेश बघेल के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले भाजपा नेता विजय बघेल ने उनके निर्वाचन को चुनौती देते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर की थी।
याचिका में विजय बघेल ने आरोप लगाया है कि मतदान से पहले लागू होने वाली 48 घंटे की प्रचार-निषेध अवधि के दौरान भूपेश बघेल ने विधानसभा क्षेत्र में जुलूस निकाला था।
विजय बघेल ने इसे चुनाव नियमों का उल्लंघन बताते हुए भूपेश बघेल का निर्वाचन निरस्त करने की मांग की है। हालांकि, ये आरोप अभी न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं और अदालत की ओर से चुनाव निरस्त करने का कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया गया है।
चुनाव याचिका की समयसीमा पर भूपेश बघेल ने उठाए थे सवाल
विजय बघेल की चुनाव याचिका के खिलाफ भूपेश बघेल की ओर से हाईकोर्ट में आपत्ति दर्ज कराई गई थी। उनकी ओर से तर्क दिया गया था कि चुनाव याचिका निर्धारित कानूनी समयसीमा समाप्त होने के बाद दाखिल की गई है। इसी आधार पर याचिका की सुनवाई से जुड़े प्रारंभिक मुद्दों को लेकर आवेदन प्रस्तुत किया गया था।
हाईकोर्ट से अपेक्षित राहत नहीं मिलने के बाद भूपेश बघेल ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय ने उनकी विशेष अनुमति याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
अब 5 नवंबर की सुनवाई पर टिकी निगाहें
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पाटन विधानसभा चुनाव से जुड़े इस मामले में अब अगली महत्वपूर्ण सुनवाई 5 नवंबर को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में होगी। इस दिन भाजपा सांसद विजय बघेल का बयान दर्ज किया जाना निर्धारित है।
सर्वोच्च न्यायालय के ताजा आदेश से फिलहाल भूपेश बघेल को प्रक्रियात्मक स्तर पर राहत नहीं मिली है। हालांकि, एसएलपी खारिज होने का अर्थ उनके निर्वाचन का निरस्त होना नहीं है।
चुनाव याचिका में लगाए गए आरोपों, साक्ष्यों और कानूनी दलीलों के आधार पर अंतिम निर्णय छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को करना है। ऐसे में आगामी सुनवाई को इस मामले में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
यह खबर क्यों जरूरी है
पाटन सीट से जुड़ी इस चुनाव याचिका का असर छत्तीसगढ़ की राजनीति पर पड़ सकता है। मामला पूर्व मुख्यमंत्री के निर्वाचन की वैधता से जुड़ा है, इसलिए हर सुनवाई पर नजर रहेगी। अदालत का अंतिम फैसला ही तय करेगा कि आरोप कितने सही हैं।
FAQs
सवाल 1: भूपेश बघेल के खिलाफ चुनाव याचिका किसने दायर की है?
जवाब: भाजपा सांसद विजय बघेल ने पाटन विधानसभा चुनाव 2023 के परिणाम को चुनौती देते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर की है।
सवाल 2: याचिका में क्या आरोप लगाए गए हैं?
जवाब: याचिका में आरोप है कि मतदान से पहले की 48 घंटे की प्रचार-निषेध अवधि में भूपेश बघेल ने जुलूस निकाला था। इन आरोपों पर अदालत में सुनवाई हो रही है और अंतिम फैसला नहीं आया है।
सवाल 3: सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इस मामले पर क्या असर होगा?
जवाब: सुप्रीम कोर्ट ने एसएलपी पर हस्तक्षेप से इनकार किया है, जिसका मतलब है कि मामला हाईकोर्ट में आगे बढ़ेगा। इससे भूपेश बघेल के निर्वाचन के निरस्त होने का संकेत नहीं मिलता। फैसला हाईकोर्ट के ट्रायल पर निर्भर करेगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश की तारीख प्रकाशन से पहले जांच लें।