हॉस्टल वॉर्डनों की पदास्थापना प्रक्रिया से हाईकोर्ट नाराज, 4 हफ्तों में आवेदनों के निराकरण का निर्देश

Pravesh Shukla | Aug 03, 2025, 12:09 IST
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हाईकोर्ट ने कबीरधाम जिले में संचालित आदिवासी और अनुसूचित जाति छात्रावासों और आश्रमों में पिछले कई साल से पदस्थ अधीक्षकों को बड़ी राहत दी है।

बिलासपुर।हाईकोर्टनेकबीरधामजिले में संचालित आदिवासी औरअनुसूचितजातिछात्रावासोंऔर आश्रमों में पिछले कई साल से पदस्थ अधीक्षकों को बड़ी राहत दी है।



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हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी

कोर्ट ने इन अधीक्षकों केट्रांसफरऔर उनके स्थान परपदोन्नतअधीक्षकों कीपदस्थापनाकी प्रक्रिया पर असंतोष जताते हुए आयुक्त, आदिवासी विकास विभाग को निर्देश दिया है।



4 हफ्ते में आवेदनों का हो निपटारा: HC

हाईकोर्टने कहा कियाचिकाकर्ताओंकी ओर से पेश आवेदन पत्रों का निपटारा नियम के हिसाब से आदेश मिलने के चार हफ्ते के भीतर किया जाए। इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्तिरविंद्रकुमारअग्रवालकीसिंगलबेंच में हुई।



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इन्होंने दायर दी थी याचिका

कबीरधामजिले केछात्रावासोंऔर आश्रमों में वर्ष 2015 से पहले से कार्यरत अधीक्षक जिनमें अनीताधुर्वे,प्रहलादरामपात्रे, मायादर्रो, जयंतीमेरावी,भेजंतीधुर्वे, राजकुमारी बंजारे, बसंती बंजारे, चंपा देवीवारले, पूरन सिंहपोर्ते,गणपतदास बघेल, प्रकाशटेकाम,दीपकलापातरे,सुनीतासोनवानी, नर्मदामरावी, मनोज कुमारमंडावी, लखनलाल वारते, छोटा सिंहचिचामऔर नंदकुमारमरावीशामिल हैं। उन्होंनेहाईकोर्टमें याचिका दाखिल की थी।



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कार्रवाई का विरोध

यचिका में कहा गया कि यह कार्रवाई विभाग की ओर से 10 जून 2025 को जारी दिशा-निर्देशों कीकंडिका03 के विपरीत है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि जिन आश्रमों औरछात्रावासोंमें वर्ष 2015 के पहले से शिक्षक कार्यरत हैं, उन्हें रिक्त नहीं माना जाएगा और उन्हें हटाने की प्रक्रिया नहीं अपनाई जाएगी।



पांच प्वॉइंट में समझें पूरी खबर

  • हाईकोर्ट से अधीक्षकों को राहत: कबीरधाम जिले के आदिवासी व अनुसूचित जाति छात्रावासों और आश्रमों में वर्ष 2015 से पहले से पदस्थ अधीक्षकों को हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है।
  • स्थानांतरण पर आपत्ति: इन अधीक्षकों ने कोर्ट में याचिका दाखिल की थी, जिसमें कहा गया था कि उन्हें बिना कारण हटाकर हाल ही में पदोन्नत अधीक्षकों को उनकी जगह पदस्थ किया जा रहा है।
  • नियमों का उल्लंघन: याचिकाकर्ताओं ने यह भी बताया कि यह कार्रवाई विभाग के 10 जून 2025 के आदेश की कंडिका 03 के खिलाफ है, जिसमें कहा गया है कि वर्ष 2015 से पहले से कार्यरत अधीक्षकों की जगह रिक्त नहीं मानी जाएगी।
  • कोर्ट का निर्देश: हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने आदिवासी विकास विभाग के आयुक्त को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ताओं के आवेदन पत्रों का नियमानुसार निराकरण 4 सप्ताह के भीतर किया जाए।
  • न्यायमूर्ति की अध्यक्षता में सुनवाई: इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की सिंगल बेंच में हुई, जिन्होंने विभाग की कार्रवाई पर असंतोष भी जताया।

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हाईकोर्ट ने दिया निर्देश

इसके बाद भीयाचिकाकर्ताओंके आवेदन पत्रों पर कोई सुनवाई नहीं की गई।हाईकोर्टकीसिंगलबैंच ने याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए आदिम जाति एवं आदिवासी विकास विभाग को निर्देश दिया है कियाचिकाकर्ताओंके आवेदनों का 4 सप्ताह के भीतर नियमानुसार निराकरण कियाजाए।



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