आत्मानंद स्कूलों में रिजल्ट बढ़ाकर दिखाने का खेल उजागर, कलेक्टर की समीक्षा में खुली पोल

VINAY VERMA | May 15, 2026, 14:18 IST
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बिलासपुर जिले के स्वामी आत्मानंद स्कूलों में बोर्ड परीक्षा परिणाम को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। कुछ स्कूलों ने 10वीं और 12वीं के वास्तविक रिजल्ट को बढ़ा-चढ़ाकर प्रशासन को भेजा। कलेक्टर ने मामले की गंभीरता जताई और 34 प्राचार्यों को नोटिस जारी किया है।

बिलासपुर जिले में स्वामी आत्मानंद स्कूलों के बोर्ड परीक्षा परिणामों को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा के रिजल्ट की समीक्षा बैठक में यह सामने आया कि कुछ स्कूलों ने वास्तविक परिणामों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया। जिले के एक सेजेस स्कूल का वास्तविक रिजल्ट जहां 54 प्रतिशत था, वहीं उसे 94 प्रतिशत बताकर प्रशासन को भेज दिया गया। कलेक्टर संजय अग्रवाल ने जब सूची की जांच की तो पूरी गड़बड़ी सामने आ गई। इसके बाद बैठक का माहौल गरमा गया और अधिकारियों को जमकर फटकार लगी।



समीक्षा बैठक में कलेक्टर ने पकड़ी गड़बड़ी:

कलेक्ट्रेट के मंथन सभाकक्ष में आयोजित बैठक में जिले के स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी और हिंदी माध्यम स्कूलों के प्राचार्य शामिल हुए थे। बैठक का उद्देश्य 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा परिणामों की समीक्षा करना था। इसी दौरान अधिकारियों ने कुछ स्कूलों के रिजल्ट की सूची प्रस्तुत की। कलेक्टर ने जब आंकड़ों का मिलान कराया तो पाया कि एक स्कूल ने वास्तविक परिणामों से अलग और बढ़े हुए आंकड़े भेजे हैं। मामले को गंभीर मानते हुए उन्होंने तत्काल नाराजगी जताई और संबंधित प्राचार्य के साथ जिला शिक्षा अधिकारी को भी जिम्मेदार ठहराया।



34 प्राचार्यों को नोटिस, जवाब तलब:

बैठक के बाद प्रशासन ने जिले के 34 स्वामी आत्मानंद स्कूलों के प्राचार्यों को नोटिस जारी कर दिया है। नोटिस में बोर्ड परीक्षा परिणाम कम रहने के कारणों की जानकारी मांगी गई है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे परीक्षा परिणाम सुधारने की ठोस कार्ययोजना प्रस्तुत करें। कलेक्टर ने यह भी कहा कि केवल कागजों में बेहतर प्रदर्शन दिखाने से शिक्षा व्यवस्था नहीं सुधरेगी। यदि भविष्य में भी गलत जानकारी दी गई तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।



सेजेस स्कूलों के प्रदर्शन पर प्रशासन सख्त:

जिले में पीएम श्री और स्वामी आत्मानंद स्कूलों को बेहतर शिक्षा मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके बावजूद कई स्कूलों के परीक्षा परिणाम उम्मीद से काफी कम रहे हैं। प्रशासन को आशंका है कि खराब प्रदर्शन छिपाने के लिए कुछ संस्थानों ने आंकड़ों में हेरफेर किया। इसी वजह से इस बार समीक्षा प्रक्रिया को बेहद गंभीरता से लिया गया। कलेक्टर ने साफ कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सबसे जरूरी है और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।



सरकारी स्कूलों की अलग से होगी समीक्षा बैठक:

जानकारी के मुताबिक अब जिले के सभी सरकारी स्कूलों के प्राचार्यों की भी अलग से बैठक बुलाई गई है। इसमें कक्षा 10वीं और 12वीं के परीक्षा परिणामों की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। जिन स्कूलों का प्रदर्शन लगातार कमजोर रहा है, वहां विशेष निगरानी रखने की तैयारी की जा रही है। शिक्षा विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि विद्यार्थियों की पढ़ाई, उपस्थिति और परीक्षा तैयारी की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए।



गलत आंकड़े देने वालों पर होगी कार्रवाई:

कलेक्टर संजय अग्रवाल ने स्पष्ट किया है कि रिजल्ट के गलत आंकड़े भेजना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में भरोसा बनाए रखने के लिए सटीक जानकारी देना जरूरी है। प्रशासन अब पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रहा है। जांच में यदि जानबूझकर गलत जानकारी देने की पुष्टि होती है तो संबंधित प्राचार्यों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।



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