जमीन सीमांकन के विरोध में कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, बैरिकेडिंग तोड़ी तो पुलिस ने छोड़ा वाटर कैनन
कांग्रेस ने बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला के दबाव में प्रशासनिक कार्रवाई होने का आरोप लगाया है। वहीं, भाजपा ने कांग्रेस नेता पर सरकारी जमीन पर कब्जे का आरोप लगाते हुए पलटवार किया है।
पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में टकराव
बेलतरा विधानसभा क्षेत्र में जमीन सीमांकन को लेकर चल रहे विवाद ने अब राजनीतिक रूप ले लिया है। कांग्रेस ने इस मामले में प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कलेक्ट्रेट घेराव का ऐलान किया था। प्रदर्शन से पहले कांग्रेस नेताओं ने सभा की और इसके बाद कलेक्ट्रेट की ओर कूच किया।
प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने तीन स्तर की बैरिकेडिंग की थी। हालांकि, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।
विधायक सुशांत शुक्ला पर कांग्रेस ने लगाए आरोप
बेलतरा ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष और ग्राम पंचायत सेलर के सरपंच धनंजय सिंह ठाकुर ने आरोप लगाया कि प्रशासन जमीन सीमांकन के मामले में भाजपा विधायक सुशांत शुक्ला के दबाव में कार्रवाई कर रहा है।
धनंजय सिंह ठाकुर के मुताबिक, वे पिछले तीन साल से प्रताड़ित हो रहे हैं और उनके खिलाफ तीन एफआईआर भी दर्ज हुई हैं। उन्होंने दावा किया कि उनकी जमीन पर धान की फसल खड़ी होने के बावजूद सीमांकन की कार्रवाई की गई।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ईंट भट्ठे से जुड़े मामले में तहसीलदार सीमांकन के लिए पहुंचीं और उन्हें बताया गया कि कार्रवाई विधायक के दबाव में की जा रही है। कांग्रेस ने इसी कार्रवाई को लेकर विरोध प्रदर्शन किया।
प्रमोद नायक बोले- राजनीतिक दबाव में कार्रवाई बर्दाश्त नहीं
जिला सहकारी बैंक बिलासपुर के पूर्व अध्यक्ष प्रमोद नायक ने कहा कि धनंजय सिंह ठाकुर के खेत का बारिश के दौरान सीमांकन किया गया, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस नियम-कानून के अनुसार होने वाली कार्रवाई के साथ है, लेकिन यदि प्रशासन राजनीतिक दबाव में काम करेगा, तो इसका विरोध किया जाएगा।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जमीन सीमांकन की प्रक्रिया नियमानुसार और पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए।
क्या है पूरा जमीन सीमांकन विवाद?
मामले की शुरुआत 16 सितंबर को हुई थी। ग्राम सेलर के सरपंच और बेलतरा ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष धनंजय सिंह ठाकुर ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर आरोप लगाया था कि तहसीलदार के मौखिक आदेश पर पटवारी उनकी जमीन का सीमांकन करने पहुंचे थे।
धनंजय सिंह ठाकुर का दावा था कि उस समय खेत में धान की फसल खड़ी थी। उन्होंने प्रशासनिक अमले पर विधायक के दबाव में कार्रवाई करने का आरोप लगाया था।
इसके बाद बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला की ओर से धनंजय सिंह ठाकुर को मानहानि का कानूनी नोटिस भेजा गया। इसी विवाद के विरोध में पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष विजय केशरवानी के नेतृत्व में 13 अक्टूबर को कलेक्ट्रेट घेराव का ऐलान किया गया था।
सरकारी जमीन पर कब्जे का आरोप
कांग्रेस के आरोपों पर भाजपा ने भी जवाब दिया है। भाजपा जिला ग्रामीण अध्यक्ष मोहित जायसवाल और जिला महामंत्री जनक देवांगन ने बयान जारी कर कांग्रेस नेता पर सरकारी जमीन पर कब्जा करने का आरोप लगाया।
भाजपा नेताओं का कहना है कि प्रशासन जमीन की नापजोख कर रहा है, इसलिए कांग्रेस नेता राजनीतिक आंदोलन के जरिए कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विधायक सुशांत शुक्ला का नाम लेकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है।
भाजपा ने कहा कि सरकारी जमीन पर कथित अवैध कब्जे के मामलों में नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए और किसी को संरक्षण नहीं मिलना चाहिए।
विधायक की छवि खराब करने की कोशिश का आरोप
भाजपा जिला ग्रामीण अध्यक्ष मोहित जायसवाल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता प्रशासनिक विवाद को राजनीतिक मुद्दा बनाकर विधायक की छवि धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं।
वहीं, जिला महामंत्री जनक देवांगन ने कहा कि जमीन से जुड़े किसी भी विवाद का फैसला राजनीतिक बयानबाजी के बजाय तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर होना चाहिए।
इस तरह जमीन सीमांकन को लेकर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने हैं। एक ओर कांग्रेस प्रशासन पर राजनीतिक दबाव में कार्रवाई करने का आरोप लगा रही है, तो दूसरी ओर भाजपा कांग्रेस नेता पर सरकारी जमीन पर कब्जे का आरोप लगा रही है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है।
7 दिन की ध्वजा यात्रा पर हैं बेलतरा विधायक
बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला 11 से 17 अक्टूबर तक ध्वजा यात्रा पर हैं। इस दौरान वे 48 ग्राम पंचायतों में पैदल यात्रा कर रहे हैं और रात में गांवों में रुक रहे हैं।
विधायक की गैरमौजूदगी में 13 अक्टूबर को कांग्रेस के प्रदर्शन से पहले भाजपा संगठन ने उनके समर्थन में बयान जारी किए। जमीन सीमांकन को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब प्रशासनिक कार्रवाई से आगे बढ़कर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का मुद्दा बन गया है।