सीबीआई ने शुरू की जांच, केस डायरी और जेल रिकॉर्ड खंगाले
Raipur : छत्तीसगढ़ में पुलिस हिरासत में युवक की मौत के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने मामले की जांच शुरू कर दी है। चार सदस्यीय टीम शुक्रवार को बिलासपुर पहुंची और सबसे पहले सिविल लाइन थाने से केस डायरी समेत मामले से जुड़े दस्तावेज जुटाए। इसके बाद टीम सेंट्रल जेल पहुंची और जेल अधीक्षक और कर्मचारियों से घटना से जुड़ी जानकारी ली।
क्या है मामला
मामला जनवरी 2024 में हुई श्रवण सूर्यवंशी की मौत से जुड़ा है। पुलिस ने 18 जनवरी 2024 को श्रवण को महुआ शराब रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक उसके पास से महुआ शराब बरामद होने के बाद आबकारी एक्ट के तहत कार्रवाई की गई और अगले दिन उसे कोर्ट में पेश कर बिलासपुर सेंट्रल जेल भेज दिया गया।मृतक के परिजनों ने पुलिस की इस कार्रवाई और उसके बाद की परिस्थितियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। परिवार का आरोप है कि श्रवण को पुलिस ने करीब 36 घंटे तक हिरासत में रखा और इस दौरान उसके साथ मारपीट की गई। परिजनों का दावा है कि पुलिस हिरासत में हुई पिटाई के बाद उसकी हालत बिगड़ गई थी। इन आरोपों की सच्चाई अब CBI जांच के जरिए सामने आने की उम्मीद है।
पुलिस कस्टडी मौत
जेल पहुंचने के कुछ समय बाद श्रवण की तबीयत खराब हो गई। 21 जनवरी को उसकी हालत बिगड़ने पर उसे पहले जेल अस्पताल में इलाज दिया गया और बाद में गंभीर स्थिति को देखते हुए सिम्स अस्पताल भेजा गया। 22 जनवरी को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। जेल प्रबंधन की ओर से बताया गया था कि श्रवण को सांस लेने में परेशानी हो रही थी और हालत गंभीर होने के कारण उसे अस्पताल ले जाया गया था।
मौत के बाद न्यायिक जांच
मौत के बाद मामले की न्यायिक जांच कराई गई। जांच में पोस्टमार्टम, एफएसएल और अन्य रिपोर्टों के आधार पर मौत की वजह सिर में लगी गंभीर चोट और उससे पैदा हुई जटिलताओं को बताया गया। इस रिपोर्ट ने मामले को और गंभीर बना दिया, क्योंकि परिवार शुरू से ही पुलिस हिरासत में मारपीट का आरोप लगा रहा था। परिवार ने पुलिसकर्मियों और जेल अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने और कार्रवाई की मांग की। साथ ही 50 लाख रुपए मुआवजे की मांग को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया। अक्टूबर 2024 में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने परिवार को एक लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया था। इसके बाद मृतक की पत्नी लहरा बाई और उनकी बेटियों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
एफआईआर पर सवाल
मामले में सबसे बड़ा सवाल FIR दर्ज करने में हुई देरी को लेकर उठा। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस बात पर नाराजगी जताई कि न्यायिक जांच में गंभीर चोट का उल्लेख होने के बावजूद लंबे समय तक FIR दर्ज नहीं की गई। कोर्ट ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में जांच को उसी पुलिस तंत्र के पास बनाए रखना उचित नहीं होगा। इसके बाद जांच CBI को सौंपने का आदेश दिया गया।
सीबीआई करेगी पड़ताल
अब CBI की टीम केस डायरी, न्यायिक जांच रिपोर्ट, पोस्टमार्टम और एफएसएल रिपोर्ट के साथ जेल से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल करेगी। जांच में यह भी देखा जाएगा कि श्रवण को हिरासत में कब लिया गया, उसके साथ क्या हुआ, उसकी चोटें कैसे आईं और पुलिस तथा जेल अधिकारियों ने घटना के बाद क्या कदम उठाए। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को मृतक के परिवार को 25 लाख रुपए का अंतरिम मुआवजा देने का भी निर्देश दिया है। अब CBI जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि युवक की मौत किन परिस्थितियों में हुई और पुलिस हिरासत में उसके साथ मारपीट के परिजनों के आरोपों में कितनी सच्चाई है।
FAQ
- श्रवण सूर्यवंशी की मौत का मामला क्या है?
श्रवण सूर्यवंशी की जनवरी 2024 में पुलिस कार्रवाई के बाद बिलासपुर सेंट्रल जेल में मौत हो गई थी। परिवार ने पुलिस हिरासत में मारपीट का आरोप लगाया था। - CBI ने इस मामले की जांच क्यों शुरू की है?
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद CBI ने जांच शुरू की है। कोर्ट ने FIR में देरी और पुलिस जांच पर सवाल उठाते हुए मामला CBI को सौंपा था। - CBI जांच में किन बातों की पड़ताल होगी?
CBI केस डायरी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, FSL रिपोर्ट, जेल रिकॉर्ड और पुलिस कार्रवाई की जांच करेगी। इसमें मौत की परिस्थितियों और आरोपों की सच्चाई पता की जाएगी।
ये खबरें भी पढ़े...
भिलाई में सीबीआई की रेड से हड़कंप, रेलवे अफसर रिश्वत लेते गिरफ्तार
पिता की छोटी दुकान से लेकर CBI तक का सफर, आईपीएस रामगोपाल गर्ग की प्रेरक कहानी
सुप्रीम कोर्ट से NALSAR छात्रों को बड़ी राहत: वकालत पंजीकरण पर लगी रोक रद्द
बिलासपुर श्मशान तंत्र-मंत्र मामला, तीन और आरोपी गिरफ्तार