फर्जी जाति पर नौकरी करने वालों की खैर नहीं, बिलासपुर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
NEWS IN SHORT
- फर्जी जाति प्रमाणपत्र पर HC सख्त, 4 माह में होगी कार्रवाई
- ST का हक छीनने वालों के दिन गए, हाईकोर्ट ने कसा शिकंजा
- अवमानना याचिका पर HC का बड़ा आदेश-डेडलाइन तय, कार्रवाई तय
- फर्जी सर्टिफिकेट से नौकरी करने वालों पर अब गिरेगा कानून का डंडा
- एक साल बाद भी नहीं हुई कार्रवाई, HC ने दिया अल्टीमेटम
NEWS IN DETAIL
Bilaspur, 9 जून 2026। छत्तीसगढ़ में फर्जी जाति प्रमाणपत्र के बल पर सरकारी नौकरी करने वालों के खिलाफ अब कानून का शिकंजा और कसने वाला है। बिलासपुर हाईकोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अभ्यावेदन मिलने के चार महीने के भीतर पूरे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। यह आदेश उस अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान आया जो याचिकाकर्ता जयश्री सिंह पुसाम ने उच्च स्तरीय जाति छानबीन समिति के अधिकारियों के खिलाफ दायर की थी।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल बिलासपुर हाईकोर्ट ने 17 जून 2025 को ही यह आदेश दिया था कि राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यरत कर्मचारियों के जाति प्रमाणपत्रों की जांच की जाए और जो लोग फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी कर रहे हैं उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं।
लेकिन उस आदेश में कार्रवाई के लिए कोई समयसीमा तय नहीं की गई थी। नतीजा यह हुआ कि एक साल बाद भी अधिकारियों ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
अधिकारियों पर जानबूझकर टालने का आरोप
याचिकाकर्ता जयश्री सिंह पुसाम ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर यह आरोप लगाया कि उच्च स्तरीय जाति छानबीन समिति के अधिकारियों ने कोर्ट के आदेश के बावजूद जानबूझकर कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए।
याचिका में कहा गया कि इस लापरवाही का सीधा नुकसान वास्तविक अनुसूचित जनजाति के युवाओं को हो रहा है। फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए अपात्र लोग ST आरक्षण का लाभ उठाकर सरकारी पदों पर जमे हुए हैं, जबकि असली हकदार युवा अपने अधिकार से वंचित हो रहे हैं।
कोर्ट ने माना-पहले डेडलाइन नहीं थी
सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि पिछले आदेश में कार्रवाई के लिए कोई निश्चित समयसीमा नहीं दी गई थी। कोर्ट ने इस कमी को स्वीकार करते हुए इस बार स्पष्ट डेडलाइन के साथ नया आदेश जारी किया।
कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता पहले संबंधित विभाग के अधिकारी के सामने नए सिरे से अभ्यावेदन प्रस्तुत करे। इसके बाद अभ्यावेदन मिलने की तारीख से ठीक चार महीने के भीतर अधिकारियों को जांच पूरी कर दोषी पाए गए लोगों के खिलाफ कार्रवाई करनी होगी।
ST युवाओं का हक हो रहा था प्रभावित
यह मामला केवल कागजों की जालसाजी तक सीमित नहीं है। अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित पदों पर फर्जी प्रमाणपत्र धारक वर्षों से बैठे हैं। ये वे पद हैं जो संविधान ने आदिवासी समाज के उत्थान के लिए निर्धारित किए हैं।
लेकिन फर्जीवाड़े ने इस व्यवस्था को खोखला कर दिया है। वास्तविक ST वर्ग के पढ़े-लिखे युवा बार-बार मेहनत करते हैं, लेकिन उनकी सीटें पहले से ही हड़पी जा चुकी होती हैं।
IMP FACTS
पहला आदेश -17 जून 2025 को दिया गया था
याचिकाकर्ता -जयश्री सिंह पुसाम
आरोप-जाति छानबीन समिति ने जानबूझकर ठोस कदम नहीं उठाए
पुराने आदेश में कोई डेडलाइन नहीं थी
नई समयसीमा -अभ्यावेदन से 4 महीने के भीतर
अपात्र लोग ST आरक्षित पदों पर बने हुए हैं
वास्तविक ST युवा अधिकार से वंचित हो रहे हैं
कार्रवाई न होने पर अवमानना की कार्यवाही होगी
अब क्या होगा आगे?
याचिकाकर्ता को अब संबंधित विभाग के अधिकारी के सामने नया अभ्यावेदन देना होगा। उसके बाद चार महीने की उल्टी गिनती शुरू हो जाएगी।
यदि इस बार भी अधिकारियों ने टालमटोल की या कार्रवाई नहीं की तो उनके खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्यवाही का सीधा रास्ता खुला रहेगा। हाईकोर्ट का यह आदेश उन तमाम लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो फर्जी जाति प्रमाणपत्र के सहारे सरकारी नौकरी में बैठे हैं।
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