छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला; DNA रिपोर्ट में नहीं मिले सबूत, फिर भी उम्रकैद; कोर्ट बोला पीड़िता का बयान ही काफी
NEWS IN SHORT
- सात साल की बच्ची से दुष्कर्म आरोपी को मिली आजीवन कारावास की सजा
- कोर्ट ने पीड़िता की गवाही को माना बड़ा सबुत, मेडिकल रिपोर्ट को नहीं दी प्राथमिकता
- बेमेतरा में हुई दुष्कर्म की घटना, आरोपी की अपील खारिज कर सजा बरकरार रखा
- हाईकोर्ट ने आरोपियों की दलीलें खारिज की, प्रत्यक्ष गवाही को प्राथमिकता दी गई है
- महिलाओं के खिलाफ अपराधों में संवेदनशील दृष्टिकोण की आवश्यकता, कोर्ट की अहम टिप्पणी
NEWS IN DETAIL
Bilaspur। बिलासपुर में जस्टिस रमेश सिन्हा और रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सात साल की बच्ची से दुष्कर्म के मामले में अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने आरोपी की अपील को खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा।
पीड़िता की गवाही
(Chhattisgarh High Court )कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर पीड़िता की गवाही स्पष्ट, सुसंगत और भरोसेमंद हो, तो उसी आधार पर दोषसिद्धि की जा सकती है, भले ही मेडिकल या वैज्ञानिक साक्ष्य आरोपी के पक्ष में क्यों न हों।
क्या था मामला?
यह पूरा मामला बेमेतरा जिले के एक गांव का है। (Bilaspur High Court)घटना वाले दिन बच्ची के माता-पिता काम पर बाहर गए हुए थे और वह अपने बड़े पिता के पास रुकी थी।
जब बच्ची काफी देर तक घर नहीं लौटी, तो उसकी बहन उसे ढूंढते हुए पड़ोसी के घर पहुंची और वहां से उसे वापस लाई।
घर आने के बाद बच्ची ने बताया कि पड़ोसी ने उसके साथ दुष्कर्म किया है। 17 मई 2022 को इस मामले का खुलासा हुआ और पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
जांच और ट्रायल कोर्ट का निर्णय
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धारा 376 और POCSO Act के तहत मामला दर्ज किया। हालांकि, मेडिकल परीक्षण और डीएनए रिपोर्ट में स्पष्ट सबूत नहीं मिले, लेकिन ट्रायल कोर्ट ने पीड़िता
और अन्य गवाहों के बयान को विश्वसनीय मानते हुए आरोपी को दोषी ठहराया और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
आरोपी की अपील और कोर्ट का जवाब
आरोपी ने हाईकोर्ट में अपील की और खुद को निर्दोष बताया। उसने कहा कि वह गूंगा-बहरा और अशिक्षित है, और इसलिए कानूनी प्रक्रिया को समझ नहीं पाया। इसके अलावा, उसने यह भी दावा किया कि गवाहों के बयानों में विरोधाभास हैं।
हाईकोर्ट ने सभी दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि वैज्ञानिक रिपोर्ट केवल एक राय होती है और मजबूत प्रत्यक्ष गवाही को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
समाज के लिए कोर्ट की टिप्पणी
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी टिप्पणी की कि समाज में महिलाओं के खिलाफ अपराध लगातार बढ़ रहे हैं और ऐसे मामलों में संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।
अंतिम फैसला
कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराया और आरोपी की अपील खारिज कर दी, सजा को बरकरार रखा।
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