बिलासपुर ICICI बैंक कांड ; असली सोना ले उड़ी डिप्टी मैनेजर, लॉकर में छोड़ गई पीतल के जेवर
NEWS IN SHORT
- बैंक शाखा में भारी वित्तीय हेराफेरी।
- असली जेवर बदलकर लॉकर में नकली आभूषण रखे।
- ग्राहकों की फिक्स्ड डिपॉजिट से अवैध निकासी।
- आरोपी डिप्टी मैनेजर और पति पुलिस से फरार।
- बैंकिंग सेवा के बहाने मोबाइल एप का गलत इस्तेमाल।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से बैंकिंग जगत को हिला देने वाली एक बड़ी धोखाधड़ी की खबर सामने आई है। मंगला स्थित ICICI बैंक की शाखा में करीब 1 करोड़ 38 लाख रुपए के गबन का खुलासा हुआ है। इस पूरे घोटाले की मास्टरमाइंड बैंक की डिप्टी ब्रांच मैनेजर और उसका पति बताए जा रहे हैं। जिन्होंने ग्राहकों के विश्वास और बैंक की सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लगाकर इस वारदात को अंजाम दिया।
असली सोना गायब, लॉकर में मिले नकली जेवर
इस सनसनीखेज मामले का खुलासा तब हुआ जब बैंक प्रबंधन ने आंतरिक ऑडिट के दौरान दस्तावेजों और लॉकर की बारीकी से जांच की। जांच टीम उस वक्त हैरान रह गई जब गोल्ड लोन के लिए गिरवी रखे गए पाउच खोले गए। पाउचों में असली सोने के आभूषणों की जगह नकली जेवर रखे हुए थे। आरोपियों ने न केवल सोने की हेराफेरी की, बल्कि ग्राहकों की जमा पूंजी पर भी हाथ साफ किया। जांच में पाया गया कि अगस्त 2024 से सितंबर 2025 के बीच आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से 1 करोड़ 38 लाख रुपए का गबन किया।
धोखाधड़ी के प्रमुख बिंदु
फर्जी ट्रांजेक्शन: ग्राहकों के फर्जी हस्ताक्षर के जरिए 87 लाख 95 हजार रुपए के 14 अवैध लेनदेन किए गए। FD में सेंधमारी: एक महिला ग्राहक की 30 लाख की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर उनकी अनुमति के बिना ओवरड्राफ्ट लेकर 28 लाख 29 हजार रुपए निकाल लिए गए। गायब रिकॉर्ड: बैंक रिकॉर्ड से कई ग्राहकों के निवेश वाउचर और जरूरी दस्तावेज गायब कर दिए गए ताकि सबूत मिटाए जा सकें। मोबाइल एप का एक्सेस: आरोपी महिला अधिकारी बैंकिंग सेवाओं के बहाने ग्राहकों के घर जाकर उनके मोबाइल एप का एक्सेस लेती थी और डिजिटल रूप से धोखाधड़ी को अंजाम देती थी।
पुलिसिया कार्रवाई और फरार आरोपी
बैंक के ब्रांच मैनेजर अरूप पाल की लिखित शिकायत पर सिविल लाइन पुलिस ने आरोपी डिप्टी ब्रांच मैनेजर और उसके पति के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र का मामला दर्ज कर लिया है। "आरोपी महिला और उसका पति, जो खुद भी बैंक कर्मी थे, 22 सितंबर 2025 से फरार हैं। पुलिस की विशेष टीमें गठित की गई हैं और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर उनकी तलाश जारी है। जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।"—एस.आर. साहू, थाना प्रभारी
ग्राहकों में हड़कंप
इस खबर के फैलते ही बैंक के अन्य ग्राहकों में अपनी जमा पूंजी और जेवरों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इस घोटाले में बैंक के कुछ अन्य कर्मचारी भी शामिल हैं या यह केवल इन दो मुख्य आरोपियों की सोची-समझी साजिश थी। फिलहाल, सिविल लाइन पुलिस मामले की गहन जांच में जुटी हुई है और फरार दंपत्ति की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।
निष्कर्ष
यह मामला बैंकिंग सुरक्षा और डिजिटल गोपनीयता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। जब बैंक के उच्च अधिकारी ही सेंधमारी में शामिल हों, तो ग्राहकों का भरोसा डगमगाना स्वाभाविक है। धोखाधड़ी का यह तरीका दर्शाता है कि भविष्य में बैंकों को आंतरिक ऑडिट और कर्मचारियों की गतिविधियों पर अधिक सख्त निगरानी रखने की आवश्यकता है।
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