बिलासपुर युवा कांग्रेस चुनाव : समीकरण बदले, दिग्गज दावेदार रेस से हुए बाहर
समझें क्या है पूरा मामला
Bilaspur। बिलासपुर में युवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष चुनाव को लेकर संगठन के अंदर गतिविधियां तेज हो गई हैं। कई युवा नेता शुरुआत में इस पद के लिए सक्रिय थे, लेकिन जैसे-जैसे नामांकन प्रक्रिया आगे बढ़ी, स्थिति बदलने लगी है। अब संगठन के भीतर अलग-अलग गुट अपने-अपने स्तर पर रणनीति बना रहे हैं।
रंजीत सिंह ने चुनाव से हटने का फैसला किया
सूत्रों के अनुसार एनएसयूआई जिलाध्यक्ष रंजीत सिंह, जो पहले जिलाध्यक्ष पद के प्रमुख दावेदारों में शामिल थे, उन्होंने अब चुनाव नहीं लड़ने का निर्णय लिया है। उनका नाम शुरुआती संभावित उम्मीदवारों में शामिल था और उन्हें एक मजबूत दावेदार माना जा रहा था। लेकिन अब उन्होंने अपनी दावेदारी से दूरी बना ली है।
देवेंद्र यादव से मुलाकात के बाद बदला राजनीतिक माहौल
जानकारी के मुताबिक भिलाई विधायक देवेंद्र यादव से हुई मुलाकात के बाद राजनीतिक समीकरणों में बदलाव देखने को मिला है। इस मुलाकात के बाद महेंद्र गंगोत्री समर्थित गुट ने भी जिलाध्यक्ष पद की दौड़ से खुद को अलग करने का फैसला लिया है। इसके बाद इस गुट की ओर से कोई नया नाम सामने नहीं आया है।
गंगोत्री गुट के अन्य दावेदार भी पीछे हटे
गंगोत्री गुट से जुड़े अन्य संभावित युवा नेताओं ने भी जिलाध्यक्ष पद की दावेदारी से दूरी बना ली है। पहले जिन नामों पर चर्चा थी, वे अब सक्रिय रूप से चुनाव में भाग लेते नहीं दिख रहे हैं। इससे इस गुट की चुनावी मौजूदगी कमजोर होती नजर आ रही है।
अब मुकाबला सीमित गुटों के बीच
गंगोत्री गुट के पीछे हटने के बाद अब मुकाबला कुछ प्रमुख गुटों तक सीमित होता दिख रहा है। इसमें शहर कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा का गुट, कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव से जुड़े समर्थक और पूर्व जिलाध्यक्ष विजय केशरवानी का प्रभाव क्षेत्र शामिल है। ये तीनों गुट अपने-अपने स्तर पर संगठन में मजबूत पकड़ बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
सिद्धांशु मिश्रा गुट की तैयारी
सिद्धांशु मिश्रा वर्तमान में शहर कांग्रेस अध्यक्ष हैं। वे अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने में जुटे हुए हैं। उनके समर्थक भी चुनाव को लेकर सक्रिय हैं और संभावित उम्मीदवारों को आगे लाने की कोशिश की जा रही है।
अटल श्रीवास्तव गुट की रणनीति
कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव के समर्थक भी युवा कांग्रेस चुनाव में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनके गुट से जुड़े नेता पहले भी संगठनात्मक चुनावों में प्रभावी रहे हैं। इस बार भी उनके समर्थक मजबूत स्थिति बनाने की कोशिश में लगे हुए हैं।
विजय केशरवानी गुट की भूमिका
पूर्व जिलाध्यक्ष विजय केशरवानी भी संगठन में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। युवा राजनीति में उनकी पकड़ मानी जाती है। उनके समर्थक भी इस चुनाव में अपनी स्थिति मजबूत करने की तैयारी कर रहे हैं।
चुनाव खर्च बना बड़ा कारण
इस बार चुनाव में आर्थिक पहलू भी चर्चा में है। पार्टी व्यवस्था के अनुसार प्रत्येक वोट पर 75 रुपए का योगदान देना होता है। अगर 5 हजार वोट पड़ते हैं तो लगभग 3.75 लाख रुपए खर्च होता है। वहीं 10 हजार वोट होने पर यह खर्च 7.50 लाख रुपए तक पहुंच सकता है। इसी कारण कई संभावित उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ने से दूरी बना ली है।
नामांकन की अंतिम तारीख बढ़ी
संगठन ने नामांकन प्रक्रिया की अंतिम तिथि बढ़ाकर 5 जुलाई कर दी है। इससे उम्मीदवारों को तैयारी के लिए अतिरिक्त समय मिल गया है। अब आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि नए उम्मीदवार सामने आते हैं या मौजूदा गुट ही मैदान में रहते हैं।
राजनीतिक समीकरण अभी भी बदल सकते हैं
जानकारों के अनुसार युवा कांग्रेस चुनाव में अंतिम समय तक समीकरण बदलने की संभावना रहती है। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही वास्तविक तस्वीर साफ होगी कि मुकाबला किन नेताओं के बीच होगा।
IMP FACTS
एनएसयूआई जिलाध्यक्ष रंजीत सिंह ने युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष पद की दावेदारी छोड़ी।
सूत्रों के अनुसार देवेंद्र यादव से मुलाकात के बाद समीकरण बदले।
महेंद्र गंगोत्री समर्थित गुट ने भी चुनाव से दूरी बना ली।
अब मुकाबला सिद्धांशु मिश्रा, अटल श्रीवास्तव और विजय केशरवानी गुटों के बीच है।
चुनाव में प्रति वोट 75 रुपए का अंशदान तय है।
5 हजार वोट पर करीब 3.75 लाख रुपए खर्च संभावित है।
10 हजार वोट पर लगभग 7.50 लाख रुपए तक खर्च बढ़ सकता है।
नामांकन की अंतिम तिथि बढ़ाकर 5 जुलाई कर दी गई है।
FAQ
- क्या रंजीत सिंह ने युवा कांग्रेस चुनाव से नाम वापस ले लिया है?
हां, सूत्रों के अनुसार रंजीत सिंह ने जिलाध्यक्ष पद की दावेदारी छोड़ दी है। - अब मुकाबला किन गुटों के बीच रह गया है?
अब मुकाबला सिद्धांशु मिश्रा, अटल श्रीवास्तव और विजय केशरवानी समर्थित गुटों के बीच है। - चुनाव में उम्मीदवारों के लिए बड़ा खर्च कितना है?
प्रति वोट 75 रुपए के हिसाब से 5 हजार वोट पर करीब 3.75 लाख रूपए खर्च आता है।
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