छत्तीसगढ़ भाजपा में पीढ़ी परिवर्तन ; 23 विधायक बाहर , चुनावी चेहरों का बढ़ा कद
NEWS IN SHORT
- पहली बार 23 निर्वाचित विधायकों को प्रदेश कार्यसमिति से रखा बाहर।
- स्थापित परंपरा खत्म, केवल 14 मंत्री और 17 विधायक शामिल।
- कोर कमेटी से रमन सिंह और बृजमोहन जैसे दिग्गज विदा।
- ओपी चौधरी और विजय शर्मा जैसे नए चेहरों को कमान।
- नेताओं की वीआईपी संस्कृति और गुटबाजी पर पार्टी में अंतर्कलह।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ भाजपा के भीतर चल रही संगठनात्मक सर्जरी ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। हाल ही में घोषित प्रदेश कार्यसमिति और कोर कमेटी की नई सूची के बाद पार्टी के भीतर गुटबाजी और पक्षपात के आरोप मुखर होने लगे हैं। भाजपा के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब निर्वाचित जनप्रतिनिधियों (विधायकों) को प्रदेश कार्यसमिति में अपेक्षित स्थान नहीं मिला है।
विधायकों की अनदेखी और विशेष आमंत्रण की परंपरा का अंत
भाजपा की स्थापित परिपाटी रही है कि सभी निर्वाचित विधायकों को प्रदेश कार्यसमिति में विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किया जाता है। हालांकि, प्रदेश अध्यक्ष किरण देव की नई टीम में इस परंपरा को दरकिनार कर दिया गया।
- भाजपा के कुल 54 विधायकों में से केवल 14 मंत्रियों और 17 विधायकों को ही जगह दी गई।
- 23 विधायक, जिनमें सुशांत शुक्ला, भैयालाल राजवाड़े, अनुज शर्मा और धर्मजीत सिंह जैसे नाम शामिल हैं, कार्यसमिति से बाहर रखे गए हैं।
- हैरानी की बात यह रही कि जहां महापौर और जिला प्रभारियों को बैठक में बुलाया गया, वहीं इन 23 विधायकों की अनुपस्थिति चर्चा का केंद्र बनी रही।
कोर कमेटी से दिग्गजों की विदाई
संगठन में बदलाव की गाज केवल कार्यसमिति पर ही नहीं, बल्कि सबसे ताकतवर 'कोर कमेटी' पर भी गिरी है। पार्टी ने अनुभवी दिग्गजों को बाहर कर नए चेहरों पर दांव लगाया है।
बाहर हुए दिग्गज : बृजमोहन अग्रवाल, डॉ. रमन सिंह, पुन्नूलाल मोहले, रामविचार नेताम, रेणुका सिंह और गौरीशंकर अग्रवाल।
नए सदस्य: ओपी चौधरी, विजय शर्मा, अमर अग्रवाल, लता उसेंडी और शिवरतन शर्मा।
गुटबाजी के आरोप और अंतर्कलह
इस फेरबदल ने पार्टी के भीतर असंतोष को हवा दे दी है। बाहर किए गए विधायकों ने दबी जुबान में गुटबाजी और पक्षपात का आरोप लगाया है। विधायकों का कहना है कि वे राष्ट्रीय परिषद के सदस्य होने के बावजूद अपने ही राज्य की बैठक से बाहर हैं। कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा आम है कि जो विधायक कुछ खास नेताओं के करीबी थे, उन्हें तो जगह मिल गई, लेकिन जमीन पर मेहनत करने वाले कई चेहरों को नजरअंदाज किया गया।
जून तक मिल सकता है नया प्रदेश प्रभारी
वर्तमान में छत्तीसगढ़ भाजपा के प्रभारी नितिन नबीन हैं, जो अब राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। माना जा रहा है कि जून तक छत्तीसगढ़ को नया पूर्णकालिक प्रभारी मिल जाएगा, जिससे संगठन की गतिविधियों में और स्पष्टता आएगी।
सादगी बनाम वीआईपी संस्कृति
एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंत्रियों से डीजल-पेट्रोल संकट के मद्देनजर गाड़ियों का काफिला कम करने का आह्वान किया है, वहीं कार्यसमिति की बैठक में इसके उलट नजारा दिखा। पदाधिकारी दर्जनों गाड़ियों के काफिले के साथ पहुंचे, जिसे लेकर पार्टी के अंदर ही सवाल उठे कि क्या इस बैठक को वर्चुअल नहीं किया जा सकता था?
निष्कर्ष
भाजपा का यह 'कायाकल्प' आगामी चुनौतियों के लिए संगठन को कसने की कोशिश है या गुटबाजी का परिणाम, यह आने वाला वक्त बताएगा। लेकिन फिलहाल, अपनों को ही किनारे करने की इस रणनीति ने पार्टी के भीतर एक नई दरार पैदा कर दी है।
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