भाजपा नेता की भतीजी ने फर्जी सर्टिफिकेट से हथियाई MBBS सीट

Krishna Kumar Sikander | Aug 31, 2025, 18:44 IST
BJP leader niece grabbed MBBS seat fake certificate
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एक बड़ा मेडिकल प्रवेश घोटाला सामने आया है, जिसमें तीन छात्राओं ने फर्जी इकोनॉमिकली वीकर सेक्शन (EWS) सर्टिफिकेट का इस्तेमाल करके NEET (UG) परीक्षा के जरिए मेडिकल कॉलेजों में MBBS की सीट हासिल की।

छत्तीसगढ़ केबिलासपुरजिले में एक बड़ेमेडिकलप्रवेश घोटाले ने शिक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। तीन छात्राओं द्वारा फर्जीइकोनॉमिकलीवीकरसेक्शन(EWS)सर्टिफिकेट के सहारेनीट(UG)परीक्षा में सफलता हासिल करमेडिकलकॉलेजोंमेंMBBSकी सीट हथियाने का मामला सामने आया है। इस घोटाले में एक छात्रा का संबंध भारतीय जनता पार्टी (BJP)के एक नेता से होने की बात भी उजागर हुई है, जिसने मामले को और भी चर्चा में लादियाहै।यहघोटाला तब सामने आया, जब आयुक्त चिकित्सा शिक्षा ने प्रवेश प्रक्रिया के बाद दस्तावेजों के सत्यापन के लिए तहसील कार्यालय को सूची भेजी। जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि इन छात्राओं के नाम पर तहसील में न तो कोई आवेदन दर्ज था और न ही कोईEWSसर्टिफिकेट जारी किया गया था।



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कैसे पकड़ा गया फर्जीवाड़ा?

नीट(UG)परीक्षा के आधार परमेडिकलकॉलेजोंमें दाखिले के लिएकाउंसलिंगप्रक्रिया के दौरान सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों कोEWSकोटेके तहत 10% आरक्षण का लाभमिलताहै। इसकोटेका लाभ उठाने के लिएबिलासपुरकी तीन छात्राओंश्रेयांशीगुप्ता, सुहानी सिंह औरभाव्यामिश्राने कथिततौरपरफर्जीEWSसर्टिफिकेट का इस्तेमाल किया। इन छात्राओं नेबिलासपुरतहसील से जारी होने का दावा करनेवालेफर्जी सर्टिफिकेट के आधार परकाउंसलिंगमें हिस्सा लिया और आरक्षितकोटेके तहतMBBSकी सीटें हासिल करलीं।जबआयुक्त चिकित्सा शिक्षा ने दस्तावेजों के सत्यापन के लिए तहसील कार्यालय को सूची भेजी, तो जांच में पता चला कि इन तीनों छात्राओं के नाम पर तहसीलमेंकोई आवेदन या प्रकरण दर्ज ही नहीं था।बिलासपुरतहसीलदार गरिमा सिंह ने स्पष्ट किया कि उनके कार्यालय से इन छात्राओं के नाम पर कोईEWSसर्टिफिकेट जारी नहीं किया गया। यह साफ तौर पर एक सुनियोजितफर्जीवाड़ाथा, जिसने प्रशासनिक लापरवाही औरसिस्टममें खामियों को उजागर किया।



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कौन हैं फर्जीवाड़े में शामिल छात्राएं?

जांच में सामने आए तीनों नामबिलासपुरशहर के निवासियों के हैं। इनमें शामिल हैं।



श्रेयांशीगुप्ता : पिता सुनील गुप्ता, सरकंडा,बिलासपुर।श्रेयांशीका नाम इस मामले में सबसे ज्यादा चर्चा में है, क्योंकि वह बीजेपी नेतासतीशगुप्ता की भतीजी बताई जा रही हैं। इस रिश्ते ने मामले को राजनीतिक रंग भी दे दिया है।



सुहानी सिंह : पिता सुधीर कुमार सिंह,सीपतरोड,लिंगियाडीह,बिलासपुर।



भाव्यामिश्रा: पिता सूरज कुमारमिश्रा, सरकंडा,बिलासपुर।



इन तीनों छात्राओं ने फर्जीEWSसर्टिफिकेट का इस्तेमाल कर न केवलनीटUGकाउंसलिंगमें हिस्सा लिया, बल्कि प्रतिष्ठितमेडिकलकॉलेजोंमें दाखिला भी हासिल कर लिया। इस मामले की तुलना अबपुणेकीट्रेनीIASपूजाखेड़करकेफर्जीवाड़ाकेस से की जा रही है, जिसमें फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी लाभ हासिल किए गए थे।



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प्रशासन की प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई

बिलासपुरकेएसडीएममनीष साहू ने बताया कि आयुक्त चिकित्सा शिक्षा की ओर से भेजी गई सूची के आधार पर जब दस्तावेजों की जांच की गई, तो यह स्पष्ट हुआ कि तीनों छात्राओं के नाम पर कोईEWSसर्टिफिकेट तहसील से जारी नहीं हुआ था। यह एक गंभीरफर्जीवाड़ाहै, और इसकी सभी पहलुओं से जांच की जा रही है। प्रशासन अब यह पता लगाने में जुटा है कि फर्जी सर्टिफिकेट कैसे और कहां से तैयार किए गए, और इसमें कौन-कौन शामिलथे।तहसीलदारगरिमा सिंह ने भी इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि तहसील कार्यालय में इन छात्राओं के नाम से कोईरिकॉर्डनहीं है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस घोटाले के हर पहलू की गहन जांच की जाएगी, औरदोषियोंके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।



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EWS कोटा और फर्जीवाड़े की पृष्ठभूमि

EWSकोटा सामान्य वर्ग के उन छात्रों के लिए बनाया गया है, जिनकी पारिवारिक आय और आर्थिक स्थिति कमजोर होती है। इसकोटेके तहतमेडिकलऔर अन्य उच्च शिक्षा संस्थानों में 10%सीटेंआरक्षितहोतीहैं। हालांकि, इसकोटेका दुरुपयोग रोकने के लिए दस्तावेजों का सत्यापन अनिवार्य है। इस मामले में फर्जी सर्टिफिकेट का इस्तेमाल न केवल शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाता है, बल्कि उन वास्तविकEWSउम्मीदवारों के अधिकारों का हनन भी करता है, जो इसकोटेके हकदार हैं।



राजनीतिक कनेक्शन और विवाद

श्रेयांशीगुप्ता के बीजेपी नेतासतीशगुप्ता की भतीजी होने का खुलासा होने के बाद यह मामला और भी संवेदनशील हो गया है। विपक्षी दलों औरसोशलमीडिया पर इस घोटाले को लेकर सवाल उठाए जा रहेहैंकि क्या इसफर्जीवाड़ेमें किसी तरह का राजनीतिक संरक्षण शामिल था। हालांकि, अभी तक इस बात का कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है, लेकिन जांच के दौरान इस पहलू पर भी गौर किया जा रहा है।



मेडिकल एडमिशन घोटाला | MBBS सीटें छत्तीसगढ़



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