बीजेपी की बैठक में फूटा सांसदों का गुस्सा, स्मृति इरानी के सामने मंत्रियों के खिलाफ खोला मोर्चा
स्मृति ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को बैठक में शामिल किया। साथ में उपमुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा भी थे।
समझें क्या है पूरा मामला
- सांसदों ने मंत्रियों पर सिफारिशें नहीं सुनने का आरोप लगाया।
- एक सांसद ने कहा कि अफसर सिर्फ पैसे कमाने में जुटे हैं।
- स्मृति इरानी ने मुख्यमंत्री और दोनों उपमुख्यमंत्री को बैठक में शामिल किया।
- उन्होंने मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड लेकर एक-एक से जवाब मांगा।
- प्रभारी जिलों के दौरे और 2028 की चिंता भी बैठक में उठी।
सांसदों की शिकायत में क्या है?
सांसदों ने कहा कि कोई भी काम उनके कहने पर नहीं होता। उनके मुताबिक कार्यकर्ता कहते हैं कि आप सिर्फ पत्र लिख दीजिए। कार्यकर्ता कहते हैं कि काम तो हम करवा लेंगे। जो काम उनके कहने पर नहीं होता, वह दूसरे रास्ते से हो जाता है।
एक सांसद ने अफसरों पर भी सवाल उठाया। उनका दावा था कि अफसर सिर्फ पैसे कमाने में जुटे हैं। स्मृति ने एक वरिष्ठ सांसद से पूछा कि आखिर ऐसा कैसे हो रहा है। जवाब मिला कि प्रदेश में ब्यूरोक्रेसी (नौकरशाही) हावी हो गई है। जहां भी ऐसा होगा, वहां ऐसी ही स्थिति होगी।
सांसद बोले, प्रदेश अध्यक्ष तक की नहीं सुनते
सांसदों ने यही शिकायतें मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्रियों के सामने दोहराईं। एक सांसद ने कहा कि केंद्रीय राज्य मंत्री की भी नहीं सुनी जाती। प्रदेश अध्यक्ष का भी यही हाल है।
सोचिए एक बार। जब सांसदों की यह हालत है, तो आम कार्यकर्ता किससे उम्मीद करे? अब बारी मंत्रियों के रिपोर्ट कार्ड की थी।
स्मृति सभी मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड लेकर बैठक में पहुंची थीं। उन्होंने कामकाज और शिकायतों के आधार पर एक-एक मंत्री से जवाब मांगा। सबसे ज्यादा शिकायतें मंत्री दयालदास बघेल को लेकर सामने आईं।
विभाग में आपकी मौजूदगी दिखनी चाहिए
'आप हैं या नहीं, यह विभाग में पता तो चलना चाहिए।' - स्मृति इरानी, प्रदेश प्रभारी
यह बात उन्होंने दयालदास बघेल से कही। टंकराम वर्मा और श्याम बिहारी जायसवाल को भी कामकाज सुधारने की हिदायत मिली। शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव से फर्जी ट्रांसफर (तबादला) के मामलों पर सवाल हुआ। पूछा गया कि विभाग में ऐसे मामले कैसे सामने आ रहे हैं? उन्हें तत्काल रोकने को कहा गया। अन्य मंत्रियों को बजट समय पर खर्च करने के निर्देश मिले।
प्रभारी जिलों में दौरे पर सख्ती
प्रभारी जिलों में मंत्रियों के दौरे नहीं करने का मुद्दा भी उठा। स्मृति रिपोर्ट लेकर आई थीं कि कौन-सा मंत्री कितनी बार अपने जिले में गया। स्मृति के मुताबिक जो मंत्री नियमित दौरा नहीं करते, उनसे प्रभार वापस लिया जाए। उनका कहना था कि प्रभारी मंत्री प्रभारी जिले में समन्वयक की भूमिका निभाता है। यानी सरकार और संगठन के बीच तालमेल बैठाना उसका काम है।
कार्यकर्ताओं की सुनें, फिर करें बैठकें
इसलिए उन्होंने नियमित दौरे को जरूरी बताया। मंत्री पहले कार्यकर्ताओं की समस्याएं सुनें, इसके बाद प्रशासनिक बैठकें करें। दीपावली जैसे त्योहारों पर प्रभारी जिलों में कार्यकर्ताओं के साथ मिलन कार्यक्रम भी रखें।
स्मृति ने सत्ता और संगठन के तालमेल पर चेतावनी दी। यही स्थिति रही तो 2028 विधानसभा चुनाव में मुश्किल हो सकती है।
रातोंरात जारी हुआ ट्रांसफर ऑर्डर
रविवार की पूर्व सांसद-विधायक बैठक में भी मंत्रियों की कई शिकायतें थीं। पूर्व सांसद गोविंद मिरी ने आरोप लगाया। वे ढाई साल से बेटी के ट्रांसफर के लिए भटक रहे थे। शाम को स्मृति मुख्यमंत्री निवास पहुंचीं तो यह बात साय को बताई।
साय ने रातोंरात उस मामले की फाइल मंगवाई। इसके बाद ट्रांसफर ऑर्डर जारी कर दिया गया। सोमवार को कार्यालय में आदेश की प्रति प्रदेश प्रभारी को भी सौंपी गई। स्मृति इरानी ने संगठन महामंत्री को आदेश पूर्व सांसद तक पहुंचाने को कहा।
छत्तीसगढ़ बीजेपी की बैठक (BJP meeting) में सत्ता और संगठन का तालमेल अहम मुद्दा रहा। मंत्रियों का पक्ष इस खबर में शामिल नहीं है।
- स्मृति इरानी की बैठक का मुख्य उद्देश्य क्या था?
स्मृति इरानी की बैठक का मुख्य उद्देश्य मंत्रियों के रिपोर्ट कार्ड की समीक्षा करना और सांसदों की शिकायतों को सुनना था। - सांसदों ने मंत्रियों के खिलाफ क्या शिकायत की?
सांसदों ने कहा कि मंत्री उनकी सिफारिशें नहीं सुनते। उनके मुताबिक उनके कहने पर कोई काम नहीं होता। यह बात प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी, मुख्यमंत्री और दोनों उपमुख्यमंत्री के सामने रखी गई। - बैठक में मंत्रियों को क्या निर्देश दिए गए?
स्मृति इरानी ने मंत्रियों को नियमित दौरे करने, कार्यकर्ताओं की समस्याएं सुनने और बजट समय पर खर्च करने के निर्देश दिए।