छत्तीसगढ़ सरकार सख्त : बहुमंजिला इमारतों में लागू हुए कड़े सुरक्षा नियम

Umeshwari Baghel | Jun 22, 2026, 15:31 IST
छत्तीसगढ़ में नए सुरक्षा नियम लागू
छत्तीसगढ़ सरकार ने बहुमंजिला इमारतों और मॉल में लिफ्ट सुरक्षा के कड़े नियम लागू किए हैं। अब बिना जांच और प्रमाणपत्र लिफ्ट चालू नहीं होगी। तकनीकी मानक, नियमित निरीक्षण और सुरक्षा उपकरण अनिवार्य किए गए हैं।

समझें क्या है पूरा मामला

Raipur। छत्तीसगढ़ सरकार ने बहुमंजिला इमारतों और मॉल में लिफ्ट सुरक्षा को लेकर सख्त कदम उठाया है। हाल के दिनों में लिफ्ट फंसने और तकनीकी खराबी की घटनाओं को देखते हुए नगरीय प्रशासन विभाग और मुख्य विद्युत निरीक्षक कार्यालय ने नई विस्तृत गाइडलाइन जारी की है।



इसका असर राज्य के सभी आवासीय टावरों, व्यावसायिक भवनों और मिश्रित उपयोग वाली इमारतों पर पड़ेगा। सरकार ने साफ कर दिया है कि अब सुरक्षा मानकों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जरूरत पड़ने पर लिफ्ट को सील भी किया जाएगा।



लिफ्ट चालू करने से पहले अनिवार्य होगी सुरक्षा जांच

नई व्यवस्था के तहत अब किसी भी बहुमंजिला इमारत में लिफ्ट शुरू करने से पहले पूरी तकनीकी और प्रशासनिक मंजूरी लेना जरूरी होगा। इसमें राज्य विद्युत निरीक्षकालय में पंजीयन, अधिकृत एजेंसी से सुरक्षा प्रमाणपत्र और थर्ड पार्टी निरीक्षण शामिल होगा। बिना इन प्रक्रियाओं को पूरा किए किसी भी लिफ्ट को संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह नियम राष्ट्रीय भवन संहिता और भारतीय मानक ब्यूरो के मानकों के आधार पर लागू किया गया है।



तकनीकी मानकों को किया गया और सख्त

लिफ्ट निर्माण और संचालन के तकनीकी मानकों में भी बड़ा बदलाव किया गया है। अब हर लिफ्ट शाफ्ट में कम से कम दो घंटे की अग्निरोधक क्षमता अनिवार्य होगी। लिफ्ट पिट की गहराई 1.50 मीटर और ओवरहेड क्लियरेंस 3.50 मीटर तय किया गया है।



सुरक्षा के लिए ओवरस्पीड गवर्नर, सेफ्टी गियर, डोर इंटरलॉक, ओवरलोड प्रोटेक्शन और ऑटोमैटिक रेस्क्यू डिवाइस लगाना अनिवार्य होगा। बिजली कटने की स्थिति में कम से कम एक घंटे का बैटरी बैकअप और इमरजेंसी लाइटिंग जरूरी की गई है। साथ ही दो-तरफा संचार प्रणाली और अलार्म 24 घंटे सक्रिय रहेंगे।



साप्ताहिक और मासिक जांच अनिवार्य

नई गाइडलाइन में लिफ्ट की नियमित जांच को सबसे अहम हिस्सा बनाया गया है। हर सप्ताह ऑटोमैटिक रेस्क्यू डिवाइस का परीक्षण करना जरूरी होगा ताकि आपात स्थिति में लिफ्ट सुरक्षित रूप से नजदीकी फ्लोर पर पहुंच सके। हर महीने ब्रेक सिस्टम, वायर रोप, लुब्रिकेशन और अन्य मैकेनिकल हिस्सों की विस्तृत जांच करनी होगी। त्रैमासिक और वार्षिक स्तर पर लोड टेस्ट और ओवरस्पीड टेस्ट भी अनिवार्य किए गए हैं। इसके अलावा हर पांच साल में वायर रोप बदलना और ओवरहालिंग जरूरी होगा।



सार्वजनिक भवनों पर अतिरिक्त सख्ती

मॉल, ऑफिस कॉम्प्लेक्स और अन्य सार्वजनिक भवनों में लिफ्ट सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त नियम लागू किए गए हैं। अब ऐसे सभी भवनों में लिफ्ट संचालन से जुड़े जोखिम को कवर करने के लिए बीमा कराना अनिवार्य होगा, ताकि किसी भी हादसे की स्थिति में यात्रियों को मुआवजा मिल सके।



भवन मालिकों को साल में कम से कम दो बार मॉक ड्रिल करानी होगी ताकि लिफ्ट में फंसने जैसी स्थिति में त्वरित बचाव संभव हो सके। इसके साथ ही लिफ्ट के पास मेंटेनेंस लॉगबुक रखना और उसे नियमित रूप से अपडेट करना भी जरूरी होगा।



दिव्यांगजनों के लिए लिफ्ट को बनाया जाएगा अनुकूल

नई गाइडलाइन में दिव्यांगजनों की सुविधा का भी विशेष ध्यान रखा गया है। सभी सार्वजनिक लिफ्टों को दिव्यांग अनुकूल बनाना अनिवार्य होगा। इसके तहत केबिन का न्यूनतम आकार 1100×1400 मिमी, दरवाजे की चौड़ाई 900 मिमी और कंट्रोल बटन की ऊंचाई 900 से 1200 मिमी के बीच तय की गई है। ब्रेल लिपि संकेत और ऑडियो अनाउंसमेंट सिस्टम भी जरूरी किया गया है। आग लगने की स्थिति में लिफ्ट अपने आप ग्राउंड फ्लोर पर पहुंचकर दरवाजे खोल देगी ताकि लोग सुरक्षित बाहर निकल सकें।



दुर्घटना की स्थिति में सख्त रिपोर्टिंग नियम

यदि किसी लिफ्ट में दुर्घटना होती है तो भवन स्वामी या प्रबंधन समिति को 24 घंटे के भीतर इसकी सूचना विद्युत निरीक्षक कार्यालय और स्थानीय प्रशासन को देना अनिवार्य होगा। गंभीर मामलों में तुरंत पुलिस को जानकारी देनी होगी। जांच पूरी होने और अनुमति मिलने तक उस लिफ्ट का संचालन बंद रहेगा। नियमों की अनदेखी पर भवन मालिक और प्रबंधन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।



नियमित निरीक्षण और रिकॉर्ड रखना अनिवार्य

लिफ्ट सुरक्षा के लिए विस्तृत निरीक्षण प्रणाली लागू की गई है। हर सप्ताह, महीने, तीन महीने और सालाना आधार पर अलग-अलग जांच अनिवार्य की गई है। सभी मेंटेनेंस रिकॉर्ड को कम से कम पांच साल तक सुरक्षित रखना होगा। खराब लिफ्ट पर स्पष्ट चेतावनी बोर्ड लगाना भी जरूरी किया गया है ताकि कोई भी व्यक्ति जोखिम में न पड़े।



IMP FACTS

लिफ्ट शुरू करने से पहले सरकारी पंजीयन और सुरक्षा प्रमाणपत्र अनिवार्य है।



थर्ड पार्टी सुरक्षा जांच के बिना लिफ्ट का संचालन नहीं होगा।



ओवरलोड रोकने वाला सिस्टम और ऑटोमैटिक रेस्क्यू डिवाइस जरूरी किया गया है।



बिजली कटने पर कम से कम एक घंटे का बैटरी बैकअप अनिवार्य होगा।



हर सप्ताह और हर महीने लिफ्ट की नियमित जांच जरूरी होगी।



लापरवाही मिलने पर लिफ्ट को सील कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।



निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ सरकार की यह नई गाइडलाइन शहरी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम मानी जा रही है। सख्त तकनीकी मानक, नियमित जांच और स्पष्ट जवाबदेही तय होने से उम्मीद है कि लिफ्ट से जुड़े हादसों में कमी आएगी और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।



FAQ

  1. क्या बिना जांच के लिफ्ट चालू की जा सकेगी?
    नहीं, अब पंजीयन और सुरक्षा प्रमाणपत्र के बिना लिफ्ट संचालन पूरी तरह प्रतिबंधित है।
  2. लिफ्ट में कौन-कौन से सुरक्षा सिस्टम अनिवार्य हैं?
    ओवरलोड प्रोटेक्शन, ऑटोमैटिक रेस्क्यू डिवाइस, बैटरी बैकअप और अलार्म सिस्टम जरूरी हैं।
  3. नियम तोड़ने पर क्या कार्रवाई होगी?
    लापरवाही मिलने पर लिफ्ट को सील किया जाएगा और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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