गैंगस्टर शब्बीर आलम को 13 साल छुपाने वाले बस ऑपरेटर पर मुकदमा
समझें क्या है पूरा मामला
गैंगस्टर शब्बीर आलम को अंबिकापुर में 13 साल तक छिपाने का आरोप बस संचालक बैदुल खान पर लगा है। पुलिस जांच में यह बात सामने आई है। इस आधार पर अंबिकापुर थाना पुलिस ने बैदुल खान और अन्य अज्ञात सहयोगियों के खिलाफ बीएनएस (BNS - Bharatiya Nyaya Sanhita) की धारा 249 के तहत केस दर्ज किया है। मामले की विवेचना अब शुरू हो चुकी है। इसी दौरान झारखंड पुलिस की एक बड़ी लापरवाही भी उजागर हुई है।
कैसे हुआ खुलासा
पुलिस की एफआईआर से यह साफ हुआ कि गैंगस्टर शब्बीर आलम बस कंपनी और सिलाई दुकान की आड़ में अंबिकापुर में छिपा हुआ था। लंबे समय तक उसकी असली पहचान किसी को पता नहीं चली। जांच शुरू होने के बाद बैदुल खान की भूमिका सामने आई। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस दौरान और कौन-कौन लोग शामिल रहे।
झारखंड पुलिस की बड़ी चूक
इस पूरे मामले में झारखंड पुलिस की गंभीर लापरवाही सामने आई है। धनबाद जिले की पुलिस टीम 29 जून की शाम करीब 5.40 बजे आरोपी को पकड़ने अंबिकापुर पहुंची थी। लेकिन टीम ने स्थानीय सरगुजा पुलिस को इसकी कोई सूचना नहीं दी।
सादे कपड़ों में पहुंची टीम ने आरोपी के ठिकाने पर छापा मारा और उसे हिरासत में ले लिया। जैसे ही टीम आरोपी को गाड़ी में बैठाकर ले जाने लगी, स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। भीड़ ने पुलिस टीम को घेर लिया और झूमाझटकी करते हुए आरोपी शब्बीर आलम को छुड़ा लिया।
इस दौरान एक अन्य सहयोगी जावेद पहले ही मौके से फरार हो चुका था। आरोपी के भागने के बाद भी झारखंड पुलिस ने स्थानीय थाने में कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई। टीम बिना रिपोर्ट लिखाए वापस लौट गई, जिससे पूरा घटनाक्रम संदेह के घेरे में आ गया।
एसएसपी ने क्या कहा
धनबाद के एसएसपी (SSP - Senior Superintendent of Police) प्रभात कुमार ने इस मामले पर सफाई दी है। उनका कहना है कि टीम ने जैसे ही शब्बीर को पकड़ा, स्थानीय लोगों ने टीम को घेर लिया। इसी बीच अपराधी भाग निकला।
आगे की जांच
अब सवाल यह उठ रहा है कि झारखंड पुलिस ने स्थानीय पुलिस को सूचना क्यों नहीं दी। इस पूरे मामले की जांच की जा रही है। स्थानीय पुलिस भी अपने स्तर पर बैदुल खान और उसके सहयोगियों की भूमिका खंगाल रही है। आने वाले दिनों में इस केस से जुड़े और भी तथ्य सामने आ सकते हैं।
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