स्व-जनगणना में फर्जीवाड़े से बचने का अलर्ट, सरकार ने जारी की चेतावनी
छत्तीसगढ़ में जनगणना की प्रक्रिया को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। स्व-जनगणना को लेकर प्रशासन ने फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी की आशंकाओं के चलते सख्त निगरानी व्यवस्था लागू की है। राज्य में 16 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक नागरिकों को स्व-जनगणना (Self-census) के माध्यम से अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज करने की सुविधा दी गई है। इस अवधि के बाद 1 मई से 30 मई तक गणनाकर्मी घर-घर जाकर परिवार, मकान और संपत्ति से जुड़ी जानकारी एकत्र करेंगे।
ऑनलाइन स्व-जनगणना की सुविधा
अधिकारियों के अनुसार, जनगणना की यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और सरल बनाने के उद्देश्य से ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से संचालित की जा रही है। नागरिक se.census.gov.in पर जाकर स्वयं अपनी जानकारी आसानी से भर सकते हैं। यह सुविधा पूरी तरह वैकल्पिक है और इसके लिए किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि इस व्यवस्था से लोगों को घर बैठे सही जानकारी दर्ज करने में सुविधा मिलेगी और डेटा संग्रह की प्रक्रिया अधिक तेज व सटीक होगी।
फर्जीवाड़े से बचाव के लिए विशेष व्यवस्था
जनगणना कार्यालय ने इस बार संभावित फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी को ध्यान में रखते हुए विशेष सुरक्षा और सतर्कता के उपाय किए हैं। सभी गणनाकर्मियों को एक अलग यूनिक पहचान आईडी प्रदान की गई है, जिसे नागरिक जानकारी देने से पहले आसानी से सत्यापित कर सकते हैं। इसके साथ ही प्रशासन ने लोगों को किसी भी अनजान या संदिग्ध QR कोड को स्कैन न करने की सख्त सलाह दी है, ताकि साइबर ठगी और गलत जानकारी के जोखिम से बचा जा सके और पूरी प्रक्रिया सुरक्षित व पारदर्शी बनी रहे।
जनगणना प्रक्रिया कैसे होगी?
1 मई से 30 मई तक गणनाकर्मी एक विशेष ऐप के माध्यम से घर-घर जाकर डेटा एकत्र करेंगे और प्रत्येक परिवार से जुड़ी जानकारी को रिकॉर्ड करेंगे। इस दौरान जिन नागरिकों ने पहले से स्व-जनगणना के तहत ऑनलाइन जानकारी दर्ज कर दी होगी, उनके विवरण का मौके पर ही सत्यापन किया जाएगा। वहीं जिन्होंने अभी तक ऑनलाइन जानकारी नहीं भरी है, उनसे सीधे घर पर जाकर आवश्यक विवरण लिया जाएगा। प्रशासन का उद्देश्य सभी आंकड़ों को सही और सटीक रूप में एकत्र कर जनगणना प्रक्रिया को पूर्ण करना है।
दस्तावेज और गोपनीयता
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जनगणना के दौरान किसी भी प्रकार के दस्तावेज प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं होती है, क्योंकि यह पूरी तरह से बयान आधारित प्रक्रिया है। इसमें नागरिकों द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर ही डेटा दर्ज किया जाता है। सभी एकत्रित आंकड़ों को जनगणना अधिनियम 1948 के तहत पूरी तरह सुरक्षित और गोपनीय रखा जाता है। यह डेटा केवल सांख्यिकीय विश्लेषण और विकास योजनाओं के निर्माण के लिए ही उपयोग किया जाता है, किसी अन्य उद्देश्य के लिए नहीं।
नागरिकों से अपील
मुख्य सचिव सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे स्व-जनगणना की सुविधा का अधिक से अधिक उपयोग करें, ताकि पूरी प्रक्रिया को अधिक सटीक, तेज और सरल बनाया जा सके। प्रशासन का कहना है कि नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से डेटा संग्रह की गुणवत्ता बेहतर होगी और किसी भी तरह की त्रुटि की संभावना कम होगी। साथ ही यह पहल राज्य में भविष्य की विकास योजनाओं को मजबूत और विश्वसनीय आधार प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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