100 किलो से ज्यादा कचरा? खुद संभालों, नहीं तो लगेगा जुर्माना
समझें क्या पूरा मामला
Raipur। छत्तीसगढ़ में कचरा प्रबंधन को लेकर नई व्यवस्था लागू हो गई है। अब रोज 100 किलो या उससे ज्यादा कचरा पैदा करने वाले संस्थानों को केंद्रीय पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना होगा। गीले कचरे का निपटान अपने परिसर में करना होगा, जबकि सूखा कचरा अधिकृत एजेंसियों को देना होगा।
कचरे पर सख्ती शुरू
छत्तीसगढ़ में अब कचरा फैलाना आसान नहीं होगा। सरकार ने बड़े कचरा उत्पादकों के लिए नई व्यवस्था लागू कर दी है। रोज 100 किलो या उससे ज्यादा कचरा निकालने वाले संस्थानों को अब नियमों का पालन करना होगा। इसके लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने सभी निकायों को जरूरी निर्देश जारी कर दिए हैं।
100 किलो से ज्यादा कचरा तो रजिस्ट्रेशन जरूरी
नए नियम के तहत रोज 100 किलो या उससे ज्यादा ठोस कचरा पैदा करने वाले सभी संस्थानों को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना होगा। यह व्यवस्था 1 जून 2026 से लागू है। नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों को ऐसे संस्थानों की पहचान कर उनका पंजीयन कराने की जिम्मेदारी दी गई है। अब पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन रखा जाएगा।
कौन आएगा इस दायरे में?
इस नियम के दायरे में गेटेड कॉलोनियां, बड़ी हाउसिंग सोसायटी, होटल, रेस्तरां, अस्पताल, स्कूल, कॉलेज, मॉल, सरकारी दफ्तर और बड़े शॉपिंग कॉम्प्लेक्स आएंगे। यानी जो भी संस्थान रोज बड़ी मात्रा में कचरा पैदा करता है, उसे इस व्यवस्था का पालन करना होगा। अब केवल कचरा उठवाना ही काफी नहीं होगा, बल्कि उसका सही प्रबंधन भी करना होगा।
गीला कचरा खुद संभालना होगा
सरकार ने साफ कर दिया है कि गीले कचरे का निपटान उसी परिसर में करना होगा, जहां वह पैदा हो रहा है। इसके लिए कम्पोस्टिंग या दूसरी स्वीकृत तकनीक अपनानी होगी। वहीं प्लास्टिक, कागज, धातु और दूसरे सूखे कचरे को अधिकृत एजेंसियों को देना होगा। इससे कचरा सीधे डंपिंग यार्ड तक नहीं पहुंचेगा और उसका बेहतर उपयोग हो सकेगा।
ऑनलाइन होगी पूरी निगरानी
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इसके लिए एक केंद्रीकृत पोर्टल तैयार किया है। इसी पोर्टल पर सभी बल्क वेस्ट जनरेटर का रजिस्ट्रेशन होगा। निकायों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने क्षेत्र के सभी पात्र संस्थानों का डेटा पोर्टल पर अपलोड करें। इससे यह पता चलता रहेगा कि कौन संस्था कितना कचरा पैदा कर रही है और उसका निपटान कैसे कर रही है।
रायपुर में पहले से सख्ती
राजधानी रायपुर में नगर निगम पहले से बल्क वेस्ट जनरेटरों की ऑनलाइन निगरानी कर रहा है। जिन संस्थानों के पास कचरा निपटान की व्यवस्था नहीं है, उनसे अतिरिक्त शुल्क भी लिया जा सकता है। नगर निगम का मकसद डंपिंग यार्ड पर बोझ कम करना और बड़े संस्थानों को उनकी जिम्मेदारी याद दिलाना है।
नियम तोड़े तो होगी कार्रवाई
सरकार का कहना है कि शहरों की सफाई केवल नगर निगम की जिम्मेदारी नहीं है। बड़े कचरा उत्पादकों को भी अपनी भूमिका निभानी होगी। इसलिए अब पंजीयन के साथ नियमों का पालन भी देखा जाएगा। जो संस्थान नियमों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर आर्थिक दंड भी लगाया जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि इस व्यवस्था से शहरों में कचरे का बोझ कम होगा और स्वच्छता व्यवस्था बेहतर बनेगी।
IMP FACTS
व्यवस्था 1 जून 2026 से लागू है।
रोज 100 किलो या ज्यादा कचरा निकालने वालों पर नियम लागू होगा।
ऐसे संस्थानों को CPCB पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना होगा।
दायरे में होटल, मॉल, अस्पताल, स्कूल, कॉलेज, सोसायटी आएंगे।
गीले कचरे का निपटान परिसर में ही करना होगा।
सूखा कचरा अधिकृत एजेंसियों को देना होगा।
निकायों को संस्थानों की पहचान कर डेटा अपलोड करना होगा।
पूरी निगरानी ऑनलाइन पोर्टल से होगी।
रायपुर नगर निगम पहले से ऑनलाइन निगरानी कर रहा है।
नियम तोड़ने पर कार्रवाई और जुर्माना लगेगा।
FAQ
- नया नियम किन पर लागू होगा?
यह नियम रोज 100 किलो या ज्यादा कचरा पैदा करने वाले संस्थानों पर लागू होगा। - रजिस्ट्रेशन कहां कराना होगा?
संस्थानों को CPCB के केंद्रीय पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना होगा। - नियम तोड़ने पर क्या होगा?
नियम नहीं मानने पर कार्रवाई और आर्थिक दंड लगाया जा सकता है।
यह खबरें भी पढ़े...
Android केस में EU कोर्ट का बड़ा फैसला, Google पर 44 हजार करोड़ का जुर्माना बरकरार
प्रसिद्ध पंडवानी गायिका पद्म विभूषण तीजन बाई का निधन, रायपुर AIIMS में ली अंतिम सांस
गैर मुस्लिम से निकाह नहीं पढ़वा सकेंगे मौलाना, मौलवियों का रजिस्ट्रेशन जरूरी
महतारी वंदन योजना : छूटी महिलाओं के लिए एक हफ्ते में खुलेगा पोर्टल