18 अध्यक्षों को मंत्री दर्जा, तीन को कैबिनेट और 15 को राज्यमंत्री
Raipur। छत्तीसगढ़ सरकार ने निगम, मंडल और आयोगों में बैठे 18 अध्यक्षों और उपाध्यक्षों को बड़ा सरकारी दर्जा दिया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने 27 अगस्त को आदेश जारी कर तीन अध्यक्षों को कैबिनेट मंत्री और 15 अध्यक्ष-उपाध्यक्षों को राज्यमंत्री का दर्जा प्रदान किया है। हालांकि सरकार ने आदेश में साफ कर दिया है कि यह दर्जा केवल शिष्टाचार यानी Courtesy के लिए है। इससे किसी की वरिष्ठता या आधिकारिक प्रोटोकॉल की स्थिति तय नहीं होगी।
तीन को कैबिनेट मंत्री का दर्जा
कैबिनेट मंत्री का दर्जा पाने वालों में छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष रामलाल चौहान, राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रूप सिंह मण्डावी और छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू शामिल हैं। खास बात यह है कि रूप सिंह मण्डावी को पहले राज्यमंत्री का दर्जा मिला था। नए आदेश से उनका दर्जा बढ़ाकर कैबिनेट मंत्री किया गया है।
15 को राज्यमंत्री का दर्जा
राज्यमंत्री का दर्जा पाने वालों में निगम-मंडलों और विभिन्न आयोगों के अध्यक्षों के साथ तीन उपाध्यक्ष भी शामिल हैं। सरकार ने इन पदों पर बैठे नेताओं और पदाधिकारियों को शिष्टाचार के लिहाज से राज्यमंत्री के समकक्ष दर्जा दिया है। आदेश के बाद संबंधित संस्थाओं में इनके लिए सरकारी स्तर पर सुविधाओं की व्यवस्था की जाएगी।
केश शिल्पी बोर्ड से शुरुआत
छत्तीसगढ़ राज्य केश शिल्पी कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष गौरीशंकर श्रीवास को राज्यमंत्री का दर्जा मिला है। इसी तरह आनंद निषाद को राज्य मछुआ कल्याण बोर्ड और राजेश कुमार राजपूत को छत्तीसगढ़ संस्कृत विद्या मंडल का अध्यक्ष रहते हुए यह दर्जा दिया गया है।
बोर्ड और आयोगों के अध्यक्ष भी शामिल
राज्य शाकम्भरी बोर्ड के अध्यक्ष राजेन्द्र नायक, राज्य शिक्षा आयोग के अध्यक्ष सुधीर गौतम, राज्य हज कमेटी के अध्यक्ष एजाज मिर्जा बेग और राज्य हथकरघा विकास एवं विपणन संघ के अध्यक्ष भोजराज देवांगन भी राज्यमंत्री दर्जे की सूची में हैं।
राजभाषा और सिंधी अकादमी को भी प्रतिनिधित्व
राज्य राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा और राज्य सिंधी अकादमी की अध्यक्ष सुषमा जेठानी को भी राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया है। वहीं राज्य सहकारी विपणन संघ यानी मार्कफेड के अध्यक्ष शशिकांत द्विवेदी भी इस सूची में शामिल हैं।
तीन उपाध्यक्षों को भी दर्जा
सरकार ने सिर्फ अध्यक्षों तक फैसला सीमित नहीं रखा है। रायपुर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डॉ. जे.पी. शर्मा, छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल के उपाध्यक्ष किशोर महानंद, छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष आनंद कुमार तिवारी (राजीव लोचन दास महाराज) को भी राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया है।
SC-ST आयोग के उपाध्यक्ष भी सूची में
छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जाति आयोग के उपाध्यक्ष वेदराम मनहरे और राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के उपाध्यक्ष मंगल दास ठाकुर को भी राज्यमंत्री का दर्जा मिला है। इस तरह विभिन्न सामाजिक, धार्मिक, शैक्षणिक और विकास से जुड़े संस्थानों के पदाधिकारियों को सरकारी दर्जे की सूची में शामिल किया गया है।
सुविधाएं विभाग देगा, प्रोटोकॉल नहीं बदलेगा
GAD के आदेश में सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि मंत्री दर्जा सिर्फ Courtesy के उद्देश्य से दिया गया है। संबंधित प्रशासकीय विभाग या आयोग को नियमानुसार सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी होगी। लेकिन इस दर्जे के आधार पर किसी पदाधिकारी की वरिष्ठता तय नहीं होगी और न ही इससे सरकारी प्रोटोकॉल में कोई स्वत: नई स्थिति बनेगी।
दर्जा मिला, अधिकार नहीं बढ़े
सरकार के आदेश का सीधा मतलब यह है कि इन 18 पदाधिकारियों को मंत्री जैसा शिष्टाचार और नियमानुसार सुविधाएं मिल सकती हैं, लेकिन उन्हें कैबिनेट या राज्यमंत्री के संवैधानिक पद के समान अधिकार नहीं मिलेंगे। यानी रुतबा बढ़ा है, लेकिन अधिकार और वरिष्ठता की व्यवस्था जस की तस रहेगी।
FAQ
- छत्तीसगढ़ में कितने लोगों को मंत्री दर्जा दिया गया है?
छत्तीसगढ़ सरकार ने 18 अध्यक्षों और उपाध्यक्षों को मंत्री दर्जा दिया है। इनमें तीन को कैबिनेट मंत्री और 15 को राज्यमंत्री का दर्जा मिला है। - मंत्री दर्जा मिलने से क्या अधिकार बढ़ जाएंगे?
नहीं। यह दर्जा सिर्फ शिष्टाचार के लिए दिया गया है। इससे संवैधानिक अधिकार, वरिष्ठता या सरकारी प्रोटोकॉल में बदलाव नहीं होगा। - किन आयोगों के अध्यक्षों को कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिला है?
राज्य अनुसूचित जाति आयोग, अनुसूचित जनजाति आयोग और राज्य महिला आयोग के अध्यक्षों को कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया है।
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