APAR में देरी पर सीधे सर्विस रिकॉर्ड पर वार, GAD का संदेश, सरकारी कामकाज में ढिलाई नहीं चलेगी
सरकारी कामकाज में ढिलाई नहीं चलेगी। छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने साफ कर दिया है। विभाग ने खासतौर पर गोपनीय चरित्रावली यानी APAR को लेकर सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। साफ शब्दों में कहा गया है कि वार्षिक कार्य निष्पादन मूल्यांकन प्रतिवेदन भरने में देरी अब बर्दाश्त नहीं होगी। यानी अब जब समय मिला तब भर देंगे वाला रवैया सीधे करियर पर भारी पड़ सकता है।
ऑटो-फॉरवर्ड सिस्टम से खत्म होगा
नए पत्र के मुताबिक आकलन वर्ष 2025-26 से ऑटो-फॉरवर्ड का नियम लागू कर दिया गया है। इसका मतलब ये है कि जैसे ही निर्धारित अंतिम तिथि खत्म होगी, APAR खुद-ब-खुद अगले स्तर पर पहुंच जाएगा। अगर किसी अधिकारी या कर्मचारी ने समय पर अपनी रिपोर्ट नहीं भरी, तो सिस्टम इंतजार नहीं करेगा। यह बदलाव उन मामलों पर सीधा वार है, जहां फाइलें महीनों तक अटकी रहती थीं और जिम्मेदारी तय नहीं होती थी।
SPARROW पोर्टल से बाहर वालों के लिए भी सख्त नियम
सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि जिन कर्मचारियों की SPARROW पोर्टल पर अभी तक ऑनबोर्डिंग नहीं हुई है, वे भी नियमों से बच नहीं पाएंगे। ऐसे मामलों में APAR ऑफलाइन यानी मैनुअल तरीके से भरा जाएगा, लेकिन समयसीमा वही रहेगी। यानी डिजिटल हो या मैनुअल, देरी की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी गई है।
देरी हुई तो तय होगी जिम्मेदारी
अवर सचिव गोरे लाल भूआर्य द्वारा जारी आदेश में साफ कहा गया है कि APAR में देरी को प्रशासनिक लापरवाही माना जाएगा। अगर किसी भी स्तर पर रिपोर्ट अटकती है, तो संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी। यह नियम अखिल भारतीय सेवा (IAS, IPS) के अधिकारियों को छोड़कर राज्य के सभी कर्मचारियों और अधिकारियों पर लागू होगा। यानी अब हर स्तर पर ‘कौन जिम्मेदार’ का जवाब देना पड़ेगा।
कलेक्टर-कमिश्नर को सख्त निर्देश
GAD ने इस आदेश को हल्के में लेने की गुंजाइश ही खत्म कर दी है। राज्य के सभी विभागाध्यक्षों, कलेक्टरों और संभागायुक्तों को स्पष्ट निर्देश भेजे गए हैं कि इस व्यवस्था का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें। इसका सीधा मतलब है कि अब मॉनिटरिंग भी तेज होगी और लापरवाही पर तुरंत एक्शन दिखेगा।
काम नहीं तो प्रमोशन नहीं
सरकार के इस फैसले को प्रशासनिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। APAR ही प्रमोशन, पोस्टिंग और करियर ग्रोथ का आधार होता है। ऐसे में अब समय पर काम नहीं करने वाले अधिकारियों के लिए यह सिस्टम ‘अलार्म बेल’ बन गया है। साफ है, अब फाइलों को लटकाने वालों की नहीं, समय पर काम करने वालों की चलेगी।
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