छत्तीसगढ़ परीक्षा घोटाला : कागजों पर आए 28 रहस्यमयी छात्र
NEWS IN SHORT
- बिलासपुर स्कूल में 28 छात्र रहस्यमयी रूप से अनुपस्थित
- डबल रोल नंबर विवाद से परीक्षा प्रणाली में संकट
- बिना परीक्षा अंक दर्ज करने पर विश्वसनीयता पर सवाल
- जांच समिति ने दी क्लीन चिट, विभाग की पारदर्शिता संदेहास्पद
- भविष्य में कड़े नियम और निगरानी की आवश्यकता
NEWS IN DETAIL
Bilaspur। छत्तीसगढ़ परीक्षा घोटाला : छत्तीसगढ़ की स्कूली शिक्षा व्यवस्था एक गंभीर विवाद में फंस गई है, जिसने परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बिलासपुर के नारायण टेक्नोक्रेट्स स्कूल में कक्षा 5वीं और 8वीं की मुख्य परीक्षा में 28 छात्र पूरी तरह गायब रहे। न तो उन्होंने परीक्षा में भाग लिया और न ही पूरक (सप्लीमेंट्री) परीक्षा के पहले दिन परीक्षा केंद्र में उपस्थित हुए।
डबल रोल नंबर का खेल
विवाद तब शुरू हुआ जब रायपुर के एक स्कूल के मान्यता रहित होने के कारण फरवरी-मार्च 2026 में वहां के 28 विद्यार्थियों को बिलासपुर के यू-डाइस स्कूल से जोड़ा गया। इसके चलते बिलासपुर परीक्षा केंद्र से कुल 57 रोल नंबर जारी कर दिए गए।
इस प्रक्रिया के तहत, पहले नारायण टेक्नोक्रेट्स स्कूल ने अपने स्तर पर सीबीएसई पैटर्न की परीक्षा आयोजित कर परिणाम घोषित किए। लेकिन जब कानूनी शिकंजा कसने लगा, तो इन छात्रों को छत्तीसगढ़ बोर्ड की परीक्षा में शामिल कराने के लिए अचानक रोल नंबर जारी करवा दिए गए।
जांच समिति की रिपोर्ट और सवाल
जिला स्तरीय जांच समिति ने नारायण टेक्नोक्रेट्स को नियमों के पालन का हवाला देते हुए क्लीन चिट दे दी। रिपोर्ट के अनुसार, पांचवीं बोर्ड की परीक्षा में कुल 29 विद्यार्थियों ने भाग लिया, जबकि 57 रोल नंबर जारी किए गए। इन 28 रहस्यमयी छात्रों का मुख्य परीक्षा में कोई अस्तित्व नहीं था।
यहां उठता है बड़ा सवाल -जिन छात्रों ने मुख्य परीक्षा में भाग ही नहीं लिया, उन्हें पूरक परीक्षा में कैसे पात्र माना गया? कक्षा 5वीं के नियमों के अनुसार अनुपस्थित रहने पर पूरक परीक्षा का अवसर मिलता है। लेकिन अगर छात्र वास्तविक रूप से उपस्थित नहीं हुए, तो सरकारी रिकॉर्ड में उनके नाम से रोल नंबर क्यों जारी किए गए?
प्रश्नपत्र और परीक्षा की वास्तविकता
पूरक परीक्षा के आयोजन में विभाग द्वारा प्रश्नपत्र उपलब्ध नहीं कराए गए थे। संबंधित स्कूलों को स्वयं प्रश्नपत्र तैयार करने और अंक दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे। नारायण टेक्नोक्रेट्स स्कूल में इन 28 छात्रों के लिए न तो प्रश्नपत्र तैयार किया गया और न परीक्षा आयोजित की गई। यह सीधे तौर पर परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
पूरक परीक्षा में अनुपस्थित 28 छात्रों की रोल नंबर सूची
162137 – Anvi Sharma
162138 – Aarav Nigam
162139 – Aaryahi Agrahari
162140 – Aashvi Bahoriya
162141 – Anandjot Singh
162142 – Anishika Jaiswal
162143 – Arjchita Jain
162144 – Bhavesh Pahuja
162145 – Bhoomika Dhruv
162146 – Charvi Sahu
162147 – Daksh Pathak
162148 – Dheer Chhabria
162149 – Divyansh Malhotra
162150 – Diya Khandelwal
162151 – Kanishka Singh Birh
162152 – Lav Chandra
162153 – Mahi Nishad
162154 – Mohammad Ahil
162155 – Md Ali Ashar
162156 – Prakashika Tiwari
162157 – Pranoya Pradhan
162158 – Rupam Chatterjee
162159 – Saanidhya Sharma
162160 – Singavarapu Purva
162161 – Tejas Bahu
162162 – Parth Chaturvedi
162163 – Priyanshu Ajaole
162164 – Vibhancha Devi
निष्कर्ष
यह मामला छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था में गंभीर अनियमितताओं को उजागर करता है। डबल रोल नंबर, बिना परीक्षा के अंक दर्ज करना और अनुपस्थित छात्रों को पूरक परीक्षा में पात्र मानना सीधे तौर पर परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाता है। शिक्षा विभाग की रहस्यमयी चुप्पी और जांच समिति की रिपोर्ट पर संदेह इस बात को दर्शाता है कि भविष्य में ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए कड़े नियम और निगरानी आवश्यक हैं।
FAQ
- ये डबल रोल नंबर क्या है?
यह व्यवस्था है जिसमें छात्रों को दो बार रोल नंबर जारी कर परीक्षा में शामिल कराने का प्रयास किया जाता है, जो इस मामले में नियमों का उल्लंघन है। - पूवरक परीक्षा में अनुपस्थित छात्रों को कैसे पात्र माना गया?
नियम के अनुसार अनुपस्थित छात्रों को पूरक परीक्षा का अवसर मिलता है, लेकिन वास्तविक अनुपस्थिति में यह प्रश्न उठता है कि अंक किस आधार पर दिए जाएंगे। - शिक्षा विभाग की भूमिका क्या रही?
विभाग ने जांच समिति के बाद भी नारायण टेक्नोक्रेट्स को क्लीन चिट दी और प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने में असफल रहा।
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