दो करोड़ को समझाया, फिर भी 161 करोड़ लुटाए, जागरुकता अभियान के बाद भी 10 महीने में साइबर ठगों ने लगाई चपत
हालांकि, पुलिस की कार्रवाई के चलते 45 करोड़ 12 लाख रूपए होल्ड कराए गए हैं। यह रकम संबंधित बैंक खातों में रोक दी गई है, ताकि जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद पीड़ितों को वापस दिलाई जा सके।
साइबर ठगी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस अब तक 570 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें छत्तीसगढ़ के अलावा पश्चिम बंगाल, झारखंड, महाराष्ट्र और राजस्थान सहित दूसरे राज्यों के आरोपी भी शामिल हैं। इससे साफ है कि साइबर अपराध का नेटवर्क किसी एक शहर या प्रदेश तक सीमित नहीं है। ठगी के लिए अलग-अलग राज्यों में बैंक खातों, सिम कार्ड और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
पुलिस ने पूरे प्रदेश में 50 दिनों तक लगातार जागरूकता अभियान चलाया। इस अभियान के जरिए पुलिस करीब 2 करोड़ लोगों तक पहुंची। इसके बावजूद डेढ़ सौ करोड़ रूपए से अधिक की ठगी हो गई।
रायपुर सबसे आगे, दुर्ग दूसरे नंबर पर
प्रदेश में साइबर ठगी की सबसे ज्यादा शिकायतें रायपुर पुलिस कमिश्नरेट क्षेत्र से सामने आई हैं। यहां 6,165 शिकायतें दर्ज की गई हैं। दूसरे नंबर पर दुर्ग जिला है, जहां 4,044 मामले सामने आए हैं। बिलासपुर में 3,369, रायगढ़ में 1,684 और कोरबा में 1,619 शिकायतें दर्ज की गई हैं।
आंकड़े बताते हैं कि साइबर अपराध अब बड़े शहरों के साथ औद्योगिक और अन्य शहरी क्षेत्रों में भी तेजी से पैर पसार रहा है। पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती ठगी की रकम को तत्काल ट्रेस कर उसे दूसरे खातों में जाने से रोकना है। साइबर अपराधी कुछ ही मिनटों में रकम को कई बैंक खातों के जरिए इधर-उधर कर देते हैं। ऐसे में शिकायत मिलने के शुरुआती घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं।
50 दिन चला विशेष जागरूकता अभियान
साइबर ठगी रोकने के लिए पुलिस ने 15 अगस्त से 2 अक्टूबर तक 50 दिनों का विशेष जागरूकता अभियान चलाया। इस दौरान प्रदेशभर में लोगों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया। पुलिस के मुताबिक, करीब दो करोड़ लोगों तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचाया गया।
इसके बावजूद ऑनलाइन ठगी की शिकायतें सामने आती रहीं। इस दौरान रायपुर साइबर क्राइम पोर्टल पर ही 955 से अधिक शिकायतें दर्ज हुईं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जागरूकता के प्रयासों के बावजूद ठग नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं।
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 8 लाख की ठगी
साइबर ठगों ने लोगों को डराने के लिए डिजिटल अरेस्ट को नया हथियार बना लिया है। खमतराई थाना क्षेत्र के उरकुरा निवासी 64 वर्षीय किसान को ठगों ने इसी तरीके से निशाना बनाया। आरोपियों ने खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर उन्हें कारोबारी और अन्य गतिविधियों से जुड़े मामले में फंसाने का डर दिखाया।
गिरफ्तारी की धमकी देकर बुजुर्ग को लगातार 44 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट के नाम पर मानसिक दबाव में रखा गया। इस दौरान उनसे अलग-अलग समय पर करीब आठ लाख रूपए ठग लिए गए।
महिला को पांच दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा
गंज थाना क्षेत्र में रहने वाली 62 वर्षीय बुजुर्ग महिला भी ठगों के जाल में फंस गईं। आरोपियों ने उन्हें राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) का अधिकारी बताकर संपर्क किया। इसके बाद आधार कार्ड के दुरुपयोग और आपराधिक गतिविधियों में संलिप्तता का डर दिखाया।
महिला पर पांच दिनों तक डिजिटल अरेस्ट के नाम पर घर में ही रहने और किसी से संपर्क नहीं करने का दबाव बनाया गया। इस दौरान उनसे सात लाख रूपए की ठगी की गई।
सेवानिवृत्त शिक्षक से 18 लाख रूपए ऐंठे
साइबर ठगों ने बुजुर्गों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी निशाना बनाया है। कबीरधाम थाना क्षेत्र के सड़ूई निवासी एक सेवानिवृत्त शिक्षक को जालसाजों ने नए तरीके से ठगी का शिकार बनाया।
आरोपियों ने उनके आधार कार्ड का दुरुपयोग कर जम्मू-कश्मीर में बैंक खाता संचालित होने का झांसा दिया। इसके बाद खाते में मनी लॉन्ड्रिंग होने की बात कहकर उन्हें डराया गया। इस पूरी प्रक्रिया में शिक्षक से करीब 18 लाख रूपए की ठगी कर ली गई।
लालच और डर, ठगी के दो बड़े हथियार
साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक, ठग मुख्य रूप से लोगों की दो कमजोरियों का फायदा उठाते हैं। पहला, कम समय में ज्यादा मुनाफा कमाने का लालच और दूसरा, पुलिस या जांच एजेंसी की कार्रवाई का डर।
शेयर बाजार में मोटा मुनाफा दिलाने, फर्जी निवेश योजनाओं, केवाईसी अपडेट, बिजली बिल भुगतान और कूरियर के नाम पर भेजे गए लिंक के जरिए लोगों की निजी और बैंकिंग जानकारी हासिल की जाती है।
विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर कोई ऐप डाउनलोड न करें। संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें और किसी भी स्थिति में ओटीपी, बैंकिंग पासवर्ड या अन्य गोपनीय जानकारी साझा न करें। निवेश करने से पहले संबंधित संस्था का पंजीकरण जांचना भी जरूरी है।
किसी भी तरह की साइबर ठगी होने पर तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। ठगी के बाद शुरुआती समय में शिकायत करने से रकम को होल्ड कराने और वापस पाने की संभावना बढ़ जाती है।