वैश्विक संकट के बीच किसानों को मिली राहत, सीएम साय की पहल से छत्तीसगढ़ में डीएपी का पर्याप्त स्टॉक

The Sootr | Jul 28, 2026, 09:00 IST
Impact Feature
वैश्विक संकट के बावजूद सीएम विष्णुदेव साय की पहल से छत्तीसगढ़ में डीएपी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। खरीफ 2026 में किसानों को खाद, बीज और ऋण आसानी से मिल रहा है।

Raipur. खरीफ सीजन में बारिश के साथ ही बोवनी का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में खाद की उपलब्धता किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण जरूरत होती है। देश और दुनिया में उर्वरकों की आपूर्ति को लेकर चुनौतियां बनी हुई हैं, इसके बावजूद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों के लिए डीएपी की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की है।



सरकार की प्राथमिकता रही है कि प्रदेश के किसी भी किसान को खाद के लिए परेशानी का सामना न करना पड़े। इसी दिशा में कृषि विभाग लगातार डीएपी की उपलब्धता, भंडारण और वितरण व्यवस्था की निगरानी कर रहा है। इसके परिणामस्वरूप खरीफ 2026 में किसानों को समय पर डीएपी उपलब्ध हो रहा है और खेती-किसानी की तैयारियां सुचारु रूप से आगे बढ़ रही हैं।



कृषि विभाग के अनुसार खरीफ सीजन 2026 के लिए प्रदेश में डीएपी का लक्ष्य 3 लाख मीट्रिक टन रखा गया है। 21 जुलाई 2026 की स्थिति में छत्तीसगढ़ में 1 लाख 84 हजार 413 मीट्रिक टन डीएपी का भंडारण किया जा चुका है। इसमें से किसानों को 1 लाख 26 हजार 360 मीट्रिक टन डीएपी का वितरण भी किया जा चुका है। वितरण के बाद भी समितियों और गोदामों में 58 हजार मीट्रिक टन से अधिक डीएपी उपलब्ध है।



पिछले वर्ष खरीफ 2025 की इसी अवधि में प्रदेश में 37 हजार 535 मीट्रिक टन डीएपी शेष था। इस बार उपलब्धता की स्थिति बेहतर है, जिससे किसानों को समय पर खाद मिलने में मदद मिल रही है।



अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बीच बनाई मजबूत व्यवस्था

डीएपी और एनपीके जैसे उर्वरकों की उपलब्धता पर वैश्विक बाजार की परिस्थितियों का असर पड़ता है। देश में डीएपी का लगभग 70 से 80 प्रतिशत और एनपीके का 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आयात किया जाता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपूर्ति प्रभावित होने के बावजूद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पहले से तैयारी की थी।



कृषि विभाग द्वारा लगातार उपलब्धता की समीक्षा की जा रही है और सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों तक खाद पहुंचाई जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि खेती के महत्वपूर्ण समय में किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।



डीएपी के साथ संतुलित उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा

कृषि वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार किसानों को डीएपी के साथ एनपीके और अन्य संतुलित उर्वरकों के उपयोग के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य फसलों को सभी जरूरी पोषक तत्व उपलब्ध कराना और डीएपी पर अत्यधिक निर्भरता कम करना है। कृषि विभाग का कहना है कि संतुलित उर्वरकों के उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है और फसल उत्पादन में भी लाभ मिलता है।



किसानों ने बताई सुविधा की कहानी

सरगुजा जिले के ग्राम बाकीपुर के प्रगतिशील किसान रवींद्र प्रताप सिंह ने बताया कि खरीफ सीजन की तैयारी के दौरान उन्हें समिति से डीएपी और यूरिया आसानी से उपलब्ध हो गया। उन्होंने कहा कि खाद वितरण व्यवस्था में सुधार से अब किसानों को पहले जैसी परेशानी नहीं हो रही है।



रवींद्र प्रताप सिंह करीब 40 से 50 एकड़ कृषि भूमि में धान, दलहन और तिलहन की खेती करते हैं। उनका कहना है कि समय पर गुणवत्तायुक्त उर्वरक मिलने से बुवाई और फसल प्रबंधन के काम बेहतर तरीके से हो पा रहे हैं।



तेजी से आगे बढ़ रही खरीफ की बोवनी

प्रदेश में मानसून की शुरुआत के साथ खेती-किसानी का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। 22 जुलाई की स्थिति में राज्य में 33.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोवनी पूरी हो चुकी है, जो निर्धारित लक्ष्य का 69 प्रतिशत है। इस खरीफ सीजन में 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोवनी का लक्ष्य रखा गया है।



अब तक प्रदेश के किसानों को 9.22 लाख मीट्रिक टन खाद और 4.12 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज का वितरण किया जा चुका है। धान, मक्का, कोदो-कुटकी, अरहर, मूंग, मूंगफली और रामतिल जैसी फसलों की बोवनी तेजी से चल रही है।



किसानों को मिल रहा बीज और कृषि ऋण का सहारा

खरीफ 2026 के लिए बीज निगम ने 4.95 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरण का लक्ष्य रखा है। इसके मुकाबले 4.70 लाख क्विंटल बीज का भंडारण किया गया है और अब तक 4.12 लाख क्विंटल बीज किसानों को वितरित किया जा चुका है।



इसी तरह प्रदेश में इस खरीफ सीजन के लिए 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक वितरण का लक्ष्य रखा गया है। इसके विरुद्ध 14.57 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का भंडारण किया गया है और अब तक 9.22 लाख मीट्रिक टन उर्वरक किसानों तक पहुंच चुका है।



खेती के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से अल्पकालीन कृषि ऋण भी दिया जा रहा है। 21 जुलाई 2026 तक किसानों को 6633.71 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया जा चुका है। इस वर्ष कुल 8800 करोड़ रुपये ऋण वितरण का लक्ष्य रखा गया है।



मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार का प्रयास है कि किसानों को खेती के हर चरण में जरूरी सहयोग मिले। खाद, बीज, ऋण और तकनीकी मार्गदर्शन की बेहतर व्यवस्था से छत्तीसगढ़ की कृषि व्यवस्था को मजबूत आधार मिल रहा है।


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