रायपुर में बवाल, 400 से ज्यादा D.Ed कैंडिडेट्स ने घेरा शिक्षा मंत्री का बंगला, पुलिस ने परिजनों संग घसीटकर बस में ठूंसा
यहां धरने पर बैठे प्रदर्शनकारियों को हटाने के दौरान पुलिस और अभ्यर्थियों के बीच तनाव की स्थिति बन गई।
परिवार के साथ धरने पर बैठे अभ्यर्थी, पुलिस ने हटाया
शिक्षा मंत्री के बंगले के बाहर प्रदर्शन कर रहे डीएड अभ्यर्थियों ने साफ कर दिया था कि इस बार वे केवल आश्वासन लेकर वापस नहीं लौटेंगे। उनकी मांग थी कि सरकार नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने की स्पष्ट तारीख बताए।
इसी बीच मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल पहुंचा और प्रदर्शनकारियों को हटाने की कार्रवाई शुरू हुई। अभ्यर्थियों का आरोप है कि पुलिस ने उनके साथ सख्ती बरती और महिला प्रदर्शनकारियों समेत परिजनों को जबरन बसों में बैठाया। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, सभी को रायपुर की सेंट्रल जेल ले जाया गया।
महिलाओं से दुर्व्यवहार का आरोप, पुलिस कार्रवाई पर नाराजगी
प्रदर्शन में शामिल महिला अभ्यर्थियों और उनके परिवारों ने पुलिस के व्यवहार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि शांतिपूर्ण तरीके से नियुक्ति की मांग कर रहे लोगों के साथ जबरदस्ती की गई। कुछ महिलाओं को घसीटकर बसों में बैठाने और अभद्र व्यवहार करने के आरोप भी सामने आए हैं।
अभ्यर्थियों का कहना है कि वे रोजगार और अपने भविष्य को लेकर सरकार से जवाब मांगने पहुंचे थे, लेकिन उनकी समस्याएं सुनने के बजाय पुलिस कार्रवाई की गई। इन आरोपों पर पुलिस प्रशासन का आधिकारिक पक्ष अभी उपलब्ध जानकारी में सामने नहीं आया है।
2300 पदों पर नियुक्ति की मांग, 321 दिनों से आंदोलन
डीएड अभ्यर्थियों के अनुसार, उनकी लड़ाई नई भर्ती निकालने की नहीं, बल्कि 2300 सहायक शिक्षक पदों पर लंबित नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कराने की है। उनका कहना है कि इस संबंध में न्यायालय के आदेशों के बावजूद उन्हें नियुक्ति का इंतजार करना पड़ रहा है।
पिछले 321 दिनों से लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का आरोप है कि सरकार की ओर से कई बार आश्वासन दिया गया, लेकिन नियुक्ति को लेकर अब तक कोई निश्चित समय-सीमा घोषित नहीं की गई।
लंबे आंदोलन के कारण अभ्यर्थियों के परिवार भी आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं। इसी वजह से इस बार प्रदर्शन में युवाओं के माता-पिता और अन्य परिजन भी शामिल हुए।
अगली कैबिनेट बैठक पर नजर, बड़े आंदोलन की चेतावनी
अभ्यर्थियों ने आगामी कैबिनेट बैठक से उम्मीद जताई है। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि बैठक में उनकी नियुक्ति को लेकर ठोस फैसला नहीं हुआ, तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि अगली बार प्रदेशभर से अधिक संख्या में उम्मीदवार अपने परिवारों के साथ राजधानी रायपुर पहुंचेंगे। लगातार बढ़ती निराशा के बीच कुछ प्रदर्शनकारियों ने गंभीर चिंता वाली बातें भी कही हैं, जिससे उनकी मानसिक स्थिति को लेकर चिंता बढ़ी है।
मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से हस्तक्षेप की मांग
प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव और वित्त मंत्री ओपी चौधरी से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है। उन्होंने पुलिस कार्रवाई के दौरान सेंट्रल जेल ले जाए गए
अभ्यर्थियों और परिजनों की रिहाई, महिलाओं के साथ कथित दुर्व्यवहार की निष्पक्ष जांच और नियुक्ति की समय-सीमा घोषित करने की मांग रखी है। अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुरूप नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने की बात भी दोहराई है।
अब सरकार के फैसले का इंतजार
डीएड अभ्यर्थियों के आंदोलन ने एक बार फिर छत्तीसगढ़ में लंबित शिक्षक नियुक्तियों का मुद्दा सामने ला दिया है। 321 दिनों से संघर्ष कर रहे युवाओं की नजर अब आगामी कैबिनेट बैठक पर है। देखना होगा कि सरकार नियुक्ति को लेकर कोई ठोस निर्णय लेती है या आंदोलन और तेज होता है।
यह खबर क्यों जरूरी है
छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षक के 2300 पदों की नियुक्ति का मामला सीधे हजारों युवाओं के रोजगार और उनके परिवारों से जुड़ा है। लंबे इंतजार से अभ्यर्थियों और उनके परिवारों पर आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ रहा है। साथ ही पुलिस कार्रवाई और महिलाओं के साथ व्यवहार के आरोप प्रशासन की जवाबदेही का सवाल उठाते हैं। इसलिए नियुक्ति की समय-सीमा और पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच, दोनों पर सरकार का स्पष्ट जवाब जनहित में है।
FAQs
सवाल 1: डीएड अभ्यर्थी किन पदों की नियुक्ति की मांग कर रहे हैं?
जवाब: अभ्यर्थी सहायक शिक्षक के 2300 पदों पर लंबित नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने की मांग कर रहे हैं।
सवाल 2: अभ्यर्थी कितने दिनों से आंदोलन कर रहे हैं?
जवाब: खबर के अनुसार अभ्यर्थी 321 दिनों से धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। इसकी शुरुआत की तारीख की पुष्टि आवश्यक है।
सवाल 3: शिक्षा मंत्री के बंगले पर क्या हुआ?
जवाब: अभ्यर्थी परिवार सहित धरने पर बैठे, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हटाया। अभ्यर्थियों का आरोप है कि उन्हें सेंट्रल जेल ले जाया गया। पुलिस का आधिकारिक पक्ष अभी सामने नहीं आया है।
सवाल 4: अभ्यर्थियों की मुख्य मांगें क्या हैं?
जवाब: नियुक्ति की स्पष्ट तारीख घोषित करना, गिरफ्तार अभ्यर्थियों की रिहाई, महिलाओं के साथ कथित दुर्व्यवहार की निष्पक्ष जांच और नियुक्ति की समय-सीमा तय करना।