छत्तीसगढ़ में डिजिटल क्रांति; शहरों से लेकर गांवों तक पहुंची तकनीक, एआई मिशन से बदलेगा प्रदेश का भविष्य
Raipur. छत्तीसगढ़ तेजी से डिजिटल बदलाव की ओर बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में डिजिटल इंडिया के विजन को जमीन पर उतारने की कोशिशें साफ नजर आ रही हैं। सरकार की नीतियों और तकनीकी नवाचारों के चलते मंत्रालय से लेकर ग्राम पंचायत तक कामकाज में बड़ा बदलाव आया है। अब सरकारी सेवाएं पहले से ज्यादा तेज, पारदर्शी और आसान हो गई हैं। डिजिटल तकनीक ने आम लोगों के जीवन को सरल बनाया है और प्रशासन की कार्यशैली में भी बड़ा सुधार किया है।
छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का कहना है कि यह समय आईटी और एआई का है और छत्तीसगढ़ इस दौड़ में पीछे नहीं रहेगा। इसी दिशा में सरकार ने 417 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान किया है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री एआई मिशन के लिए 100 करोड़ रुपए अलग से रखे गए हैं।
इस मिशन के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों, आईटीआई और पॉलिटेक्निक कॉलेजों में एआई डेटा लैब और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे। इस पहल से प्रदेश के युवाओं को आधुनिक तकनीक सीखने का मौका मिलेगा और वे भविष्य की नौकरियों के लिए तैयार हो सकेंगे।
गांवों तक पहुंची डिजिटल सुविधा
प्रदेश के 1460 ग्राम पंचायतों में अटल डिजिटल सेवा केंद्र खोले गए हैं। इन केंद्रों के जरिए बुजुर्ग पेंशनरों और महतारी वंदन योजना की लाभार्थी महिलाओं को गांव में ही नगद भुगतान की सुविधा मिल रही है।
पहले लोगों को बैंक तक जाने में समय और पैसा खर्च करना पड़ता था। अब यह सुविधा गांव में ही मिल रही है। डीबीटी के तहत मिलने वाली राशि का भुगतान भी यहीं से हो रहा है, जिससे ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है।
ई-ऑफिस से बढ़ी कामकाज की रफ्तार
सरकार ने मंत्रालय और संचालनालयों में ई-ऑफिस प्रणाली लागू करने के बाद अब जिलों में भी इसे लागू करना शुरू कर दिया है। इससे फाइलों का निपटारा तेजी से हो रहा है और अनावश्यक देरी खत्म हुई है। कागजी काम कम हुआ है और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी है। अब अधिकारी और कर्मचारी डिजिटल माध्यम से ही काम कर रहे हैं, जिससे निर्णय लेने में तेजी आई है।
जमीन की रजिस्ट्री भी हुई आसान
प्रदेश में 10 डिजिटल सेवाएं शुरू की गई हैं, जिनसे जमीन और मकान की रजिस्ट्री अब बेहद आसान हो गई है। आधार प्रमाणीकरण के जरिए लोग घर बैठे अपॉइंटमेंट लेकर रजिस्ट्री करवा सकते हैं। रजिस्ट्री के बाद नामांतरण की प्रक्रिया भी अपने आप पूरी हो जाती है।
इससे लोगों को दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। राजस्व प्रशासन को मजबूत करने के लिए प्रदेश के 14,490 गांवों का जियो-रिफ्रेंसिंग कार्य पूरा किया गया है। इस तकनीक से जमीन से जुड़े विवाद कम होंगे और रिकॉर्ड अधिक सटीक होंगे। ई-कोर्ट के माध्यम से राजस्व मामलों का त्वरित समाधान हो रहा है और लोगों को जल्दी न्याय मिल रहा है।
योजनाओं की निगरानी भी डिजिटल
सरकार ने अटल मॉनिटरिंग पोर्टल के जरिए योजनाओं की रीयल-टाइम निगरानी शुरू की है। इससे यह देखा जा सकता है कि कौन सी योजना कहां और किस स्थिति में चल रही है। सरकारी खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए जेम पोर्टल को अनिवार्य किया गया है। इससे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा है और जवाबदेही बढ़ी है।
पेंशनरों और कर्मचारियों को बड़ी राहत
पेंशनरों और सरकारी कर्मचारियों के लिए भी डिजिटल सुविधा बढ़ाई गई है। डिजीलॉकर के जरिए ई-पीपीओ, जीपीएफ स्टेटमेंट, पेंशन प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज ऑनलाइन उपलब्ध हैं। एम्प्लाई कॉर्नर ऐप और पोर्टल के माध्यम से कर्मचारी अपनी सेवा संबंधी जानकारी अपडेट कर सकते हैं। इससे दफ्तरों में जाने की जरूरत कम हुई है।
नवा रायपुर में बनेगा एआई डेटा सेंटर
नवा रायपुर अटल नगर में देश का पहला एआई आधारित डेटा सेंटर पार्क तैयार हो रहा है। यह प्रोजेक्ट सेक्टर-22 में 13.5 एकड़ में विकसित किया जा रहा है और अप्रैल से शुरू होने की तैयारी में है। करीब 1000 करोड़ रुपए के निवेश से बन रहा यह सेंटर प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि है। इससे छत्तीसगढ़ की डिजिटल पहचान मजबूत होगी और आईटी सेक्टर को नई दिशा मिलेगी।
युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर
एआई डेटा सेंटर के शुरू होने से प्रदेश में हजारों रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इसमें आईटी इंजीनियर, डेटा एनालिस्ट, साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट और नेटवर्क मैनेजर जैसे पद शामिल हैं। आईटीआई, इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक के छात्रों को प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे वे सीधे रोजगार से जुड़ सकेंगे। इससे युवाओं का बड़े शहरों की ओर पलायन कम होगा।
किसानों और आम लोगों को सीधा लाभ
एआई तकनीक का फायदा किसानों को भी मिलेगा। उन्हें मौसम की सटीक जानकारी, फसल प्रबंधन और स्मार्ट खेती के सुझाव मिल सकेंगे। इससे उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी। आम लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं की जानकारी अब ऑनलाइन आसानी से मिल रही है। दूरदराज के इलाकों में भी डिजिटल सेवाएं पहुंच रही हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं में भी सुधार
सीजीएमएससीएल द्वारा विकसित ऐप के जरिए दवा आपूर्ति की पूरी प्रक्रिया रीयल-टाइम में ट्रैक की जा रही है। इससे खासकर आदिवासी क्षेत्रों में समय पर दवाएं पहुंच रही हैं। खनिज विभाग ने ऑनलाइन ट्रांजिट पास की सुविधा शुरू की है, जिससे परिवहन व्यवस्था पारदर्शी बनी है। सीएमओ पोर्टल के जरिए लोग सीधे सरकार से संवाद कर सकते हैं और अपनी समस्याएं दर्ज करा सकते हैं।
डिजिटल बदलाव से बदली तस्वीर
छत्तीसगढ़ में डिजिटल तकनीक अब सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं रही। गांवों में भी इसका असर दिख रहा है। सरकारी योजनाएं अब तेजी से लागू हो रही हैं। लोगों को समय पर लाभ मिल रहा है और प्रशासन पर भरोसा बढ़ रहा है। कुल मिलाकर नवा रायपुर में बन रहा एआई डेटा सेंटर, गांवों तक पहुंचती डिजिटल सेवाएं और युवाओं के लिए नए अवसर इस बात का संकेत हैं कि छत्तीसगढ़ एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है।
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