छत्तीसगढ़ के स्कूलों में अक्टूबर से बदलेगा पढ़ाई का तरीका, कठिन विषयों की होंगी लाइव ऑनलाइन क्लास
खासकर उन स्कूलों के बच्चों को इसका फायदा मिलेगा, जहां इन विषयों के शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे स्कूलों में स्मार्ट बोर्ड, दीक्षा पोर्टल और दूसरे डिजिटल माध्यमों से पढ़ाई कराई जाएगी।
दिसंबर तक पूरा करना होगा सिलेबस
शिक्षा विभाग ने स्कूलों को दिसंबर तक पूरा सिलेबस खत्म करने का लक्ष्य दिया है। अब शैक्षणिक सत्र में करीब 49 पढ़ाई के दिन ही बचे हैं। ऐसे में स्कूलों में पढ़ाई पर खास ध्यान देने को कहा गया है।
बच्चों को बाजार में मिलने वाली गाइड से पढ़ाने के बजाय पाठ्यपुस्तक के आधार पर पढ़ाई कराने पर जोर दिया गया है। गाइड से पढ़ाने की शिकायत मिलने पर संबंधित शिक्षक पर कार्रवाई भी हो सकती है।
5वीं से 8वीं तक बच्चों की नींव होगी मजबूत
कक्षा 5वीं से 8वीं तक के बच्चों की बुनियादी पढ़ाई मजबूत करने पर भी फोकस किया जा रहा है। बच्चों को हिंदी और अंग्रेजी बेहतर तरीके से पढ़ने में सक्षम बनाने के साथ 20 से 25 तक के पहाड़े याद कराने का लक्ष्य रखा गया है।
दिसंबर तक इन लक्ष्यों को हासिल करने वाले बेहतर प्रदर्शन करने वाले स्कूलों और शिक्षकों को सम्मानित करने की भी योजना है।
शनिवार को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी
हर शनिवार होने वाले बैगलेस डे में अब बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी कराई जाएगी। कक्षा 5वीं और 8वीं के विद्यार्थियों को साइंस ओलंपियाड, NMMS, श्रेष्ठ, नवोदय और प्रयास जैसी परीक्षाओं के लिए तैयारी कराई जाएगी।
मिड-डे मील में भी बदलेगी व्यवस्था
स्कूलों में मिलने वाले मिड-डे मील को लेकर भी साफ निर्देश दिए गए हैं। सेंट्रल किचन वाले स्कूलों को छोड़कर बाकी जगह खाना स्कूल परिसर में ही तैयार किया जाएगा। रसोई की नियमित सफाई और पोताई कराने पर भी ध्यान दिया जाएगा।
खाने में एक्सपायरी डेट वाले मसालों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। बच्चों को भोजन देने से पहले पहले रसोइया और फिर शिक्षक को खाना चखना होगा।
वहीं, स्वामी आत्मानंद स्कूलों में बच्चों को घर से टिफिन लाने के बजाय स्कूल में तैयार भोजन करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
बैगलेस डे में अब प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी
हर शनिवार होने वाले बैगलेस डे का इस्तेमाल भी अब एक नए तरीके से किया जाएगा। इस दिन बच्चों को सिर्फ सामान्य गतिविधियां कराने के बजाय उन्हें आगे की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार किया जाएगा।
कक्षा 5वीं और 8वीं के विद्यार्थियों को साइंस ओलंपियाड, NMMS, श्रेष्ठ, नवोदय और प्रयास जैसी परीक्षाओं के लिए विशेष तैयारी कराई जाएगी।
इससे सरकारी स्कूलों के बच्चों को कम उम्र से ही प्रतियोगी परीक्षाओं के पैटर्न और तैयारी के तरीके को समझने का मौका मिलेगा।
मिड-डे मील को लेकर भी सख्ती
स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले मध्याह्न भोजन यानी मिड-डे मील को लेकर भी व्यवस्था पर ध्यान दिया गया है। सेंट्रल किचन वाले स्कूलों को छोड़कर बाकी स्कूलों में भोजन स्कूल परिसर में ही तैयार किया जाएगा।
रसोईघर की नियमित सफाई और पोताई कराने के निर्देश हैं। इसके अलावा एक्सपायरी डेट वाले मसालों या खाद्य सामग्री के इस्तेमाल पर रोक रहेगी।
बच्चों को खाना परोसने से पहले रसोइया और उसके बाद शिक्षक को भोजन चखना होगा। इससे खाने की गुणवत्ता और सुरक्षा पर नजर रखी जा सकेगी।
स्वामी आत्मानंद स्कूलों में टिफिन की जगह स्कूल का भोजन
स्वामी आत्मानंद स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को भी स्कूल में तैयार होने वाला भोजन खाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। यहां बच्चों को घर से टिफिन लाने के बजाय स्कूल में मिलने वाले भोजन का इस्तेमाल करने के लिए कहा जाएगा।