नहीं सूखता इस 'पदचिन्ह कुंड' का पानी; जानिए हनुमानगढ़ी के 'मन्नत वाले नारियल' का रहस्य

Aishwarya Dwivedi | Apr 01, 2026, 16:51 IST
CG Hanumangarhi Discover Secret Behind the Wish Granting Coconuts
कोरबा जिले के कटघोरा में स्थित हनुमानगढ़ी स्थल, धार्मिक आस्था और पर्यटन का प्रमुख केंद्र बन चुका है। हर वर्ष हनुमान जयंती पर यहां आयोजित मेला श्रद्धालुओं के बीच सामाजिक महत्ता को और बढ़ाता है।

छत्तीसगढ़ कोरबा जिले के कटघोरा तालुका में स्थित चकचकवा पहाड़, धार्मिक और पर्यटन दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल बन चुका है। यहां स्थित हनुमानगढ़ी, न केवल अपनी हरी-भरी वादियों और विहंगम दृश्यों से पर्यटकों को आकर्षित करता है, बल्कि इस स्थान की धार्मिक महत्ता भी बहुत अधिक है। इस स्थल के बारे में स्थानीय लोक‑विश्वास है कि जब भगवान राम माता सीता की खोज में पथिक दल के साथ निकले, तो वानरराज हनुमान जी इस पहाड़ी पर विश्राम करने के लिए रुके थे। उनके पैर के निशान इस चट्टान पर आज भी अंकित हैं, जो श्रद्धालुओं के लिए आस्था का बड़ा कारण बने हुए हैं।



हनुमान जी के पदचिन्ह

हनुमानगढ़ी मंदिर को लेकर विश्वास है कि यह स्थल एक पवित्र स्थान है, क्योंकि यहां एक गड्ढा‑नुमा पदचिन्ह है, जिसमें सालभर पानी रहता है। श्रद्धालु इसे पवित्र मानते हुए यहां दर्शन करने आते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना करते हैं। इस स्थल पर एक पौराणिक वृक्ष भी स्थित है, जिसके तने में बांधने गए नारियल को श्रद्धालु अपनी इच्छाओं की पूर्ति के प्रतीक के रूप में मानते हैं। स्थानीय परंपरा के अनुसार, एक साल के भीतर उन नारियल में बांधी गई इच्छाएं पूरी हो जाती हैं।



हनुमान जी के पदचिन्ह


पर्यटन स्थल के रूप में विकसित

यह स्थल 1970 के दशक में एक छोटे से मंदिर के रूप में विकसित हुआ था। स्थानीय कलेक्टर अशोक अग्रवाल के नेतृत्व में इस स्थान को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया था। उनके प्रयासों से पहाड़ी को सुसज्जित किया गया, सड़कें बनाई गईं और सुविधाओं का विकास हुआ। इसके बाद से ही यह स्थल पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन गया है और हर साल हनुमान जयंती के अवसर पर यहां एक बड़ा मेला आयोजित किया जाता है।



Lord Hanuman Footprints


हनुमान जयंती पर विशेष आयोजन

हनुमान जयंती के दिन यहां आने वाले श्रद्धालु, हनुमान जी और भगवान राम के दर्शन करने के बाद अपने‑आप को भाग्यशाली मानते हैं। मेला में धार्मिक अनुष्ठान, भजन‑कीर्तन और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जिससे इस पवित्र स्थल की सामाजिक महत्ता और बढ़ जाती है। हनुमानगढ़ी अब कोरबा के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक बन चुका है, जो न केवल श्रद्धालुओं के लिए एक आस्था का केंद्र है, बल्कि पर्यटन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण स्थल बन गया है।



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