हाईकोर्ट का बड़ा फैसला : प्रतिनियुक्ति वाले विभाग को भी तबादले का पूरा हक
Bilaspur। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों की प्रतिनियुक्ति और स्थानांतरण को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई कर्मचारी किसी दूसरे विभाग में प्रतिनियुक्ति पर काम कर रहा है तो उस विभाग को उसके ऊपर प्रशासनिक नियंत्रण प्राप्त होता है।
कोर्ट ने कहा कि प्रतिनियुक्ति वाले विभाग द्वारा जारी किया गया स्थानांतरण आदेश अधिकार क्षेत्र से बाहर नहीं माना जा सकता। हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (CIDC) के कर्मचारी की याचिका खारिज करते हुए सिंगल बेंच के आदेश को बरकरार रखा है।
क्या था पूरा मामला
यह मामला CIDC कर्मचारी सुरेश मिश्रा से जुड़ा है। सुरेश मिश्रा पहले मध्य प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (MPSRTC) के कर्मचारी थे। निगम बंद होने के बाद पुनर्वास नीति के तहत उनकी सेवाएं छत्तीसगढ़ इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के अधीन कर दी गईं।
इसके बाद उन्हें महिला एवं बाल विकास विभाग में प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया था। वह राजनांदगांव जिले की एकीकृत बाल विकास परियोजना में सहायक ग्रेड-3 के पद पर कार्यरत थे।
महिला एवं बाल विकास विभाग ने 27 फरवरी 2021 को उनका स्थानांतरण आदेश जारी किया था। इस आदेश के खिलाफ सुरेश मिश्रा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
कर्मचारी ने उठाया था अधिकार का सवाल
याचिकाकर्ता की दलील थी कि उनका मूल विभाग CIDC है। ऐसे में महिला एवं बाल विकास विभाग को उनका तबादला करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा था कि केवल मूल नियोक्ता विभाग ही उनके स्थानांतरण का फैसला ले सकता है।
मामले की सुनवाई के दौरान सिंगल बेंच ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया था। अदालत ने कहा था कि प्रतिनियुक्ति अवधि के दौरान कर्मचारी संबंधित विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में रहता है।
डिवीजन बेंच ने भी माना सही
सिंगल बेंच के फैसले को सुरेश मिश्रा ने डिवीजन बेंच में चुनौती दी थी। डिवीजन बेंच ने सुनवाई के बाद स्पष्ट किया कि कर्मचारी का मूल विभाग अलग होने के बावजूद प्रतिनियुक्ति वाले विभाग को प्रशासनिक अधिकार प्राप्त रहते हैं।
कोर्ट ने कहा कि प्रतिनियुक्ति व्यवस्था का उद्देश्य ही यह है कि कर्मचारी जिस विभाग में काम कर रहा है वहां की प्रशासनिक जरूरतों के अनुसार उससे कार्य लिया जा सके। इस दौरान संबंधित विभाग को कर्मचारियों के कामकाज, नियंत्रण और स्थानांतरण जैसे मामलों में अधिकार प्राप्त होते हैं।
हाईकोर्ट ने खारिज की अपील
डिवीजन बेंच ने माना कि महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जारी किया गया स्थानांतरण आदेश नियमों के अनुसार था। कोर्ट ने कर्मचारी की रिट अपील को खारिज कर दिया।
इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत सरकारी कर्मचारियों के मामले में संबंधित विभाग को प्रशासनिक नियंत्रण और स्थानांतरण का अधिकार प्राप्त हो सकता है।
फैसले का असर
हाईकोर्ट के इस निर्णय को सरकारी विभागों में प्रतिनियुक्ति व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फैसले से यह स्थिति साफ हुई है कि प्रतिनियुक्ति के दौरान कर्मचारी केवल अपने मूल विभाग के नियंत्रण में नहीं रहता।
जिस विभाग में कर्मचारी सेवाएं दे रहा है वह विभाग प्रशासनिक जरूरतों के आधार पर निर्णय ले सकता है। इससे विभागीय कामकाज में अधिकारों को लेकर चल रहे विवादों में स्पष्टता आएगी।
महत्वपूर्ण तथ्य
मामला: प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत सरकारी कर्मचारी के तबादले का अधिकार
अदालत: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर
पीठ: चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच
याचिकाकर्ता: सुरेश मिश्रा
मूल विभाग: छत्तीसगढ़ इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (CIDC)
पूर्व विभाग: मध्य प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (MPSRTC)
प्रतिनियुक्ति विभाग: महिला एवं बाल विकास विभाग
पद: सहायक ग्रेड-3
कार्यस्थल: एकीकृत बाल विकास परियोजना, राजनांदगांव
तबादला आदेश: 27 फरवरी 2021 को महिला एवं बाल विकास विभाग ने जारी किया
कर्मचारी की दलील: मूल विभाग CIDC होने के कारण दूसरे विभाग को तबादले का अधिकार नहीं है
हाईकोर्ट का फैसला: प्रतिनियुक्ति वाले विभाग को कर्मचारी पर प्रशासनिक नियंत्रण प्राप्त है
अंतिम निर्णय: हाईकोर्ट ने कर्मचारी की रिट अपील खारिज कर दी और सिंगल बेंच का फैसला बरकरार रखा।
FAQ
- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रतिनियुक्ति कर्मचारियों के तबादले को लेकर क्या फैसला दिया है?
हाईकोर्ट ने कहा है कि प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत कर्मचारी जिस विभाग में सेवाएं दे रहा है उस विभाग को उस पर प्रशासनिक नियंत्रण और तबादले का अधिकार प्राप्त होता है। - यह मामला किस कर्मचारी से जुड़ा था?
यह मामला CIDC कर्मचारी सुरेश मिश्रा से जुड़ा था। उन्हें महिला एवं बाल विकास विभाग में प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया था जहां उनका तबादला किया गया था। - कर्मचारी ने तबादला आदेश को चुनौती क्यों दी थी?
कर्मचारी का तर्क था कि उनका मूल विभाग CIDC है इसलिए केवल CIDC ही उनका तबादला कर सकता है। हाईकोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए विभाग के अधिकार को सही माना।
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