छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: 41 साल पुराने फर्जी वेतन आहरण मामले में 10 आरोपियों को किया दोषमुक्त

Aishwarya Dwivedi | Mar 31, 2026, 12:28 IST
Cg High Court 41 year old fake salary withdrawal case accused acquitted
बिलासपुर हाईकोर्ट ने सफाई कर्मियों के नाम पर फर्जी वेतन आहरण मामले में 10 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। लोकायुक्त द्वारा मामला दर्ज होने के बावजूद कोर्ट ने आरोपियों को निर्दोष करार दिया।

NEWS IN SHORT

  • छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने फर्जी वेतन आहरण मामले में 10 आरोपियों को दोषमुक्त किया
  • आरोप था कि डॉ. आर.के. सेन ने तीन स्वीपरों के नाम पर फर्जी वेतन बिल तैयार किए थे
  • कोर्ट ने माना कि आरोपों के सिद्ध करने के लिए आवश्यक तत्व मौजूद नहीं थे
  • मामले में कुल 42 लाख रुपये की धोखाधड़ी का आरोप था
  • लोकायुक्त ने मामला दर्ज किया, लेकिन कोर्ट ने आरोपियों को निर्दोष करार दिया

NEWS IN DETAIL

छत्तीसगढ़ : हाईकोर्ट ने सफाई कर्मियों के नाम पर फर्जी वेतन आहरण करने के मामले में जगदलपुर के तत्कालीन सीएमएचओ डॉ. आर.के. सेन, लेखापाल सहित 10 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है। कोर्ट ने पाया कि आरोपों को साबित करने के लिए जरूरी तत्व नहीं थे।



CMHO ने घर पर कराया काम

यह मामला 1979 से 1985 के बीच का है, जब डॉ. आर.के. सेन ने तीन स्वीपरों, जयसिंह, लालमणि और मायाराम को अस्थायी तौर पर प्राइमरी हेल्थ सेंटर पर नियुक्त किया था। आरोप था कि इन कर्मचारियों को उनके तय कामकाजी स्थानों पर न रखकर, सीएमएचओ ने अपने घर पर घरेलू नौकर के रूप में काम कराया। इसके बाद, इन कर्मचारियों के नाम पर फर्जी वेतन बिल तैयार किए गए और उन पर नकली अंगूठे के निशान लगाए गए थे।



सबूतों की कमी

हालांकि, कोर्ट ने पाया कि सैलरी बिल पर किए गए दस्तावेज केवल कार्बन कॉपी थे, जिनमें किसी तरह का ठोस सबूत नहीं था। इसके अलावा, जिन पर आरोप लगाए गए थे, उनके खिलाफ कोई विश्वसनीय गवाह या दस्तावेज नहीं थे।



आरोपियों की हो चुकी मृत्यु

इस मामले में कुल 42 लाख रुपये से अधिक की राशि निकाली गई थी। लोकायुक्त भोपाल ने इस मामले में जुर्म दर्ज किया था और आरोपी बनाए गए थे। मामले में डॉ. सेन की 2003 में मौत हो गई थी, जबकि अन्य आरोपियों की भी मृत्यु हो चुकी थी, जिनकी विधिक वारिसों ने सजा के खिलाफ अपील की थी। कोर्ट ने सभी आरोपियों को दोषमुक्त करते हुए इस मामले को बंद कर दिया है।



निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सफाई कर्मियों के नाम पर फर्जी वेतन आहरण के आरोप में 10 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। आरोप था कि सीएमएचओ डॉ. आर.के. सेन ने तीन स्वीपरों के नाम पर फर्जी वेतन बिल तैयार किए थे। लोकायुक्त ने मामले में जुर्म दर्ज किया था, लेकिन कोर्ट ने सबूतों की कमी के चलते सभी आरोपियों को निर्दोष करार दिया।



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