जेलों में भर्ती की सुस्ती पर हाईकोर्ट सख्त, DGP और DG जेल से पूछा कब भरेंगे पद, पथर्रा की सुरक्षा में देरी पर भी मांगा जवाब

VINAY VERMA | Oct 27, 2026, 16:03 IST
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा एक्शन
छत्तीसगढ़ की जेलों में भर्ती की सुस्त रफ्तार पर हाईकोर्ट ने सवाल उठाए हैं। अदालत ने डीजी जेल से रिक्त पद भरने की समयसीमा मांगी है। वहीं, पथर्रा ओपन जेल की सुरक्षा पर डीजीपी से जवाब मांगा गया है। दोनों अधिकारियों को शपथपत्र के जरिए स्थिति स्पष्ट करनी होगी। बेमेतरा जिले में 200 बंदियों की क्षमता वाली नई ओपन जेल बनाई गई है।

लेकिन इसकी बाहरी सुरक्षा के लिए जरूरी पुलिस बल नहीं मिला है। सरकार ने अदालत को बताया कि कई बार सुरक्षा बल मांगा गया। इसके बावजूद छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल की कंपनी उपलब्ध नहीं कराई गई। अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दोनों मामलों में जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 26 नवंबर 2026 को होगी।



समझें क्या है पूरा मामला

  • छत्तीसगढ़ की जेलों में रिक्त पदों पर भर्ती में देरी हो रही है।
  • हाईकोर्ट ने डीजी जेल से नियुक्तियों की समयसीमा मांगी है।
  • पथर्रा ओपन जेल में 200 बंदियों को रखने की क्षमता है।
  • जेल की बाहरी सुरक्षा के लिए सशस्त्र बल उपलब्ध नहीं हुआ है।
  • डीजीपी से जवाब तलब किया गया है और सुनवाई 26 नवंबर को होगी।

छत्तीसगढ़ जेल भर्ती पर कोर्ट सख्त

चीफ जस्टिस केआर महापात्र की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई की। सुनवाई में जेलों में कर्मचारियों की कमी का मुद्दा सामने आया। अदालत ने भर्ती प्रक्रिया की धीमी रफ्तार पर जवाब मांगा है।



डीजी जेल को शपथपत्र देकर भर्ती की स्थिति बतानी होगी। उन्हें यह भी बताना होगा कि नियुक्तियां कब तक पूरी होंगी। इससे जेल विभाग की भर्ती प्रक्रिया की समयसीमा स्पष्ट हो सकेगी।




जेलों में खाली पद कब तक भरेंगे?

अदालत ने जेलों में खाली पद भरने को लेकर समयसीमा पूछी है। अब विभाग को नियुक्तियों की प्रगति का ब्यौरा देना होगा। साथ ही बताना होगा कि रिक्त पद कब तक भरे जाएंगे।



जेलों में कर्मचारियों की कमी से कई व्यवस्थाएं प्रभावित हो सकती हैं। इनमें सुरक्षा, निगरानी और बंदियों का प्रबंधन शामिल है। इसी वजह से भर्ती प्रक्रिया की स्थिति महत्वपूर्ण हो गई है।



पथर्रा ओपन जेल की सुरक्षा अधूरी

बेमेतरा जिले के पथर्रा गांव में नई ओपन जेल स्थापित की गई है। इस जेल में 200 बंदियों को रखने की क्षमता है। सरकार ने इसकी स्थापना की अधिसूचना 14 जुलाई 2026 को जारी की थी।




इसके बाद 13 अगस्त 2026 को संचालन से जुड़े नियम अधिसूचित किए गए। इन्हें छत्तीसगढ़ ओपन जेल संचालन एवं प्रबंधन नियम, 2026 नाम दिया गया। सरकार ने अदालत को इन दोनों अधिसूचनाओं की जानकारी दी।



लेकिन जेल की बाहरी सुरक्षा का इंतजाम अब तक अधूरा है।



बेमेतरा जेल सुरक्षा में देरी क्यों?

सरकार के मुताबिक, जेल की बाहरी सुरक्षा के लिए सशस्त्र बल की जरूरत है। इसके लिए छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल की एक कंपनी मांगी गई थी। पुलिस महानिदेशक से कई बार बल उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया।



इसके बावजूद सुरक्षा बल उपलब्ध नहीं हो पाया। अदालत ने अब इस स्थिति को लेकर डीजीपी से जवाब मांगा है। उन्हें शपथपत्र के जरिए सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी देनी होगी।



सवाल यह है कि नई जेल की सुरक्षा कब तक पूरी होगी? इसका जवाब अब पुलिस महानिदेशक को अदालत के सामने रखना होगा।




पथर्रा जेल में 48 पदों का प्रस्ताव

सरकार ने पथर्रा ओपन जेल के लिए नए पदों का प्रस्ताव तैयार किया है। जेल के संचालन के लिए कुल 48 पद सृजित करने की तैयारी है। इन पदों पर सीधी भर्ती की अनुमति भी मांगी गई है।



जेल अधीक्षक सहित दूसरे अधिकारियों की पदस्थापना का प्रस्ताव तैयार किया गया है। कर्मचारियों की तैनाती को लेकर भी विभाग ने योजना बनाई है। सरकार ने सुनवाई के दौरान अदालत को इसकी जानकारी दी।



ओपन जेल में बंदियों को क्या मिलेगा?

पथर्रा ओपन जेल में पात्र बंदियों को कौशल प्रशिक्षण देने की योजना है। उन्हें व्यावसायिक प्रशिक्षण और रोजगार से भी जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य बंदियों को काम से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराना है।



दूसरी जेलों से पात्र बंदियों को यहां स्थानांतरित करने की तैयारी है। इसके लिए बंदियों की पहचान करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। सरकार ने अदालत को इस प्रक्रिया की जानकारी भी दी है।




लेकिन 48 पदों के प्रस्ताव और सुरक्षा व्यवस्था पर फैसला बाकी है। इन व्यवस्थाओं की स्थिति जेल के संचालन के लिए महत्वपूर्ण होगी।



डीजीपी से पहले भी जवाब मांगा

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट पहले भी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा चुका है। जुलाई 2026 में लंबित क्लोजर रिपोर्ट का मामला अदालत के सामने आया था। उस समय 1,47,714 मामलों की जांच पूरी होने की जानकारी सामने आई थी।



इन मामलों की क्लोजर रिपोर्ट अदालतों में पेश नहीं की गई थी। बाद में 16 जुलाई तक इनकी संख्या 1,45,097 बताई गई। हाईकोर्ट ने डीजीपी से ताजा स्थिति पर रिपोर्ट मांगी थी।



आठ साल पुरानी जांच पर भी सवाल

नवंबर 2025 में भी हाईकोर्ट ने डीजीपी से व्यक्तिगत शपथपत्र मांगा था। मामला एक एफआईआर की जांच आठ साल तक पूरी नहीं होने का था। अदालत ने जांच में देरी को लेकर जवाब मांगा था। अब जेलों की बाहरी सुरक्षा को लेकर भी डीजीपी को जवाब देना होगा। इस बार मामला बेमेतरा की पथर्रा ओपन जेल से जुड़ा है।



26 नवंबर को अगली सुनवाई

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट इस मामले में 26 नवंबर 2026 को अगली सुनवाई करेगा। डीजी जेल को रिक्त पदों की भर्ती की समयसीमा बतानी होगी। वहीं, डीजीपी को पथर्रा जेल के सुरक्षा बल पर जवाब देना होगा।



अदालत के सामने भर्ती और सुरक्षा की स्थिति स्पष्ट करनी होगी। नई जेल के संचालन से जुड़ी तैयारियों पर भी अब नजर रहेगी।



यह खबर क्यों जरूरी है

छत्तीसगढ़ की जेलों में कर्मचारियों की कमी सीधे सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा है। पर्याप्त कर्मचारी नहीं होने पर निगरानी और बंदियों के प्रबंधन में परेशानी हो सकती है। पथर्रा ओपन जेल का मामला भी इसी समस्या से जुड़ा है। जेल की क्षमता 200 बंदियों की है, लेकिन बाहरी सुरक्षा अधूरी है। हाईकोर्ट ने भर्ती और सुरक्षा की समयसीमा मांगी है। इससे सरकारी विभागों की जवाबदेही तय करने में मदद मिल सकती है। बंदियों की सुरक्षा और उनके पुनर्वास की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण है।

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