स्टेट टैक्स इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा रद्द करने के खिलाफ सभी याचिकाएं खारिज, नए सिरे से होगी भर्ती
इसके खिलाफ प्रभावित कर्मचारियों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अब हाईकोर्ट ने इन सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है। जस्टिस बीडी गुरु की पीठ ने परीक्षा और उसके आधार पर जारी नियुक्ति आदेशों को रद्द करने के फैसले को बरकरार रखा है। साथ ही सरकार को नए सिरे से भर्ती प्रक्रिया शुरू करने और उसे जल्द पूरा करने का निर्देश दिया है।
क्या है पूरा मामला?
- वाणिज्यिक कर विभाग में सहायक ग्रेड-3 कर्मचारियों के लिए स्टेट टैक्स इंस्पेक्टर पद पर पदोन्नति के लिए परीक्षा हुई थी।
- दोनों साल हुई विभागीय परीक्षा में कई कर्मचारी शामिल हुए और सफल अभ्यर्थियों को नियुक्ति भी मिल गई।
- परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताओं और गड़बड़ी की शिकायतें सामने आईं।
- राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति बनाई। समिति ने दस्तावेजों की जांच की।
- जांच में कई खामियां सामने आईं। इसके बाद परीक्षा और नियुक्तियां रद्द करने का फैसला लिया गया।
सरकार ने 11 सितंबर 2026 को रद्द की थी परीक्षा
जांच समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद वाणिज्यिक कर विभाग ने कार्रवाई की। विभाग ने 11 सितंबर 2026 को भर्ती परीक्षा रद्द करने का आदेश जारी किया। इसके साथ ही परीक्षा के आधार पर जारी नियुक्ति आदेशों को भी निरस्त कर दिया गया।
सरकार के इस फैसले से उन कर्मचारियों को झटका लगा, जिन्हें परीक्षा में सफल होने के बाद स्टेट टैक्स इंस्पेक्टर बनाया गया था। प्रभावित कर्मचारियों ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। उनका कहना था कि परीक्षा में चयनित होने के बाद उन्हें नियुक्ति दी गई थी। ऐसे में भर्ती रद्द करने से उनके हित प्रभावित हो रहे हैं।
याचिकाकर्ताओं ने सरकार के फैसले को अवैधानिक बताया। उन्होंने कोर्ट से भर्ती निरस्त करने के आदेश को रद्द करने की मांग की थी।
जांच में सामने आईं कई गंभीर गड़बड़ियां
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से जांच रिपोर्ट पेश की गई। इसमें परीक्षा से जुड़ी कई अनियमितताओं का जिक्र था। जांच में उत्तरपुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन से संबंधित जरूरी प्रक्रिया और मंजूरी के रिकॉर्ड नहीं मिले।
इसके अलावा उत्तरपुस्तिकाओं के पन्नों पर क्रमांक भी नहीं थे। कई उत्तरपुस्तिकाएं एक-दूसरे से बंधी हुई भी नहीं मिलीं। इससे परीक्षा के रिकॉर्ड और उनकी सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हुए।
जांच के दौरान आंसरशीट की खरीद और इस्तेमाल से जुड़ा अंतर भी सामने आया। खरीदी गई आंसरशीट और परीक्षा के बाद बची हुई आंसरशीट की संख्या में अंतर पाया गया। इतना ही नहीं, कुछ अभ्यर्थियों के जवाब मॉडल उत्तरों से हूबहू मेल खाते थे।
इन सभी बातों को कोर्ट के सामने रखा गया। सुनवाई के दौरान इन गड़बड़ियों को परीक्षा की पूरी प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण माना गया।
500 से ज्यादा अभ्यर्थियों की परीक्षा पर उठे सवाल
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान एक अहम बात कही। इस भर्ती परीक्षा में 500 से अधिक अभ्यर्थी शामिल हुए थे। जांच में कई तरह की गड़बड़ियां सामने आई थीं। ऐसे में यह तय करना संभव नहीं था कि किन अभ्यर्थियों को इन अनियमितताओं का फायदा मिला।
कोर्ट के सामने यह भी सवाल था कि जब परीक्षा की प्रक्रिया में ही गंभीर खामियां मिली हैं, तो उसके आधार पर जारी नियुक्तियों को किस तरह सही माना जा सकता है।
हाईकोर्ट ने जांच में सामने आए तथ्यों को ध्यान में रखते हुए माना कि परीक्षा में गंभीर अनियमितताएं हुई थीं। इसलिए सरकार का परीक्षा और उसके आधार पर जारी नियुक्तियों को रद्द करने का फैसला उचित था।
हाईकोर्ट ने खारिज की याचिकाएं
जस्टिस बीडी गुरु ने मामले की सुनवाई के बाद प्रभावित कर्मचारियों की याचिकाएं खारिज कर दीं। कोर्ट ने राज्य सरकार के उस फैसले को सही ठहराया, जिसमें विभागीय भर्ती परीक्षा और उसके आधार पर जारी नियुक्ति आदेशों को निरस्त किया गया था।
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने सरकार को नए सिरे से भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह प्रक्रिया जल्द पूरी करने को भी कहा है।
अब नए सिरे से होगी भर्ती प्रक्रिया
हाईकोर्ट के फैसले के बाद स्टेट टैक्स इंस्पेक्टर के पदों पर विभागीय भर्ती का रास्ता नए सिरे से खुलेगा। वाणिज्यिक कर विभाग को अब दोबारा भर्ती प्रक्रिया शुरू करनी होगी। इसे जल्द पूरा करने का निर्देश भी दिया गया है।
इस फैसले से साफ है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमों का पालन जरूरी है। परीक्षा में शामिल हुए 500 से अधिक अभ्यर्थियों से जुड़ा यह मामला अब नए सिरे से होने वाली भर्ती प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। वहीं, पहले चयनित कर्मचारियों की याचिकाएं खारिज होने के बाद सरकार का परीक्षा रद्द करने का फैसला बरकरार रहेगा।