छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट : करंट से हाथियों और वन्यजीवों की मौत; कोर्ट सख्त, सरकार को देना होगा जवाब
NEWS IN SHORT
- बिजली करंट से वन्यजीवों की मौत पर कोर्ट ने सवाल उठाया हैं
- छत्तीसगढ़ में हाथियों और भालुओं की मौत पर कोर्ट ने मांगा शपथ पत्र
- वन्यजीवों की सुरक्षा पर सरकार को कोर्ट ने नोटिस भेजा
- अदालत ने छत्तीसगढ़ सरकार से इस घटना पर कार्रवाई का विवरण मांगा हैं
- कोर्ट ने 5 मई को फिर से सुनवाई की तारीख तय की हैं
NEWS IN DETAIL
Raipur : छत्तीसगढ़ में बिजली करंट से वन्यजीवों की लगातार मौतों के मामले में हाई कोर्ट ने सुनवाई की। कोर्ट ने सरकार से जवाब तलब किया है और वन विभाग के अपर मुख्य सचिव से शपथ पत्र मांगा है।
बिजली करंट से बढ़ रही मौतों की संख्या
जनहित याचिका के तहत रायपुर के नितिन सिंघवी ने कोर्ट में बताया कि 12 मार्च को रायगढ़ जिले में दो हाथी शावकों की करंट लगने से मौत हो गई थी।
इसके बाद 14 मार्च को सूरजपुर जिले में एक हाथी की करंट के कारण मौत हुई थी। मार्च महीने में ही सारंगढ़ भिलाईगढ़ में जंगली सूअर के शिकार के लिए लगाए गए करंट के तार की चपेट में आने से एक युवक की मौत हो गई थी।
वन्यजीवों और मानव जीवन पर बढ़ता संकट
इसी तरह 26 मार्च को मैनपाट में जंगली जानवरों के शिकार के लिए बिछाए गए करंट तार से एक युवक और लोमड़ी की मौत हो गई। इसके अलावा, कोरबा के सकोदा जंगल में 11 केवी करंट के तार की चपेट में आने से दो शावक और एक मादा भालू की भी मौत हो गई थी।
कोर्ट ने वन विभाग से कार्रवाई की जानकारी मांगी
इन घटनाओं पर सुनवाई करते हुए, हाई कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार से शपथ पत्र मांगते हुए यह पूछा कि इन घटनाओं के दौरान क्या परिस्थितियां थीं और अधिकारियों ने क्या कदम उठाए हैं। ।
सरकार को चेतावनी वन्यजीवों की सुरक्षा पर ध्यान दें
कोर्ट ने राज्य सरकार से कड़ी कार्रवाई करने की उम्मीद जताई है ताकि आने वाले समय में वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। सरकार को वन्यजीवों के शिकार और बिजली करंट के खतरों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।
नए आदेश और आगामी सुनवाई
अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 5 मई की तारीख तय की है। इस दौरान सरकार को शपथ पत्र देकर अपनी सफाई पेश करनी होगी। लगातार बढ़ते दबाव के बीच अब सरकार को वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाने होंगे।
मुख्य बिंदु
छत्तीसगढ़ में बिजली करंट से हाथियों, भालुओं और अन्य वन्यजीवों की मौत हो रही है।
कोर्ट ने वन विभाग से शपथ पत्र की मांग की है।
नितिन सिंघवी ने याचिका में घटनाओं की जानकारी दी।
सरकार को जवाब देने के लिए 5 मई तक का समय दिया गया हैं।
वन्यजीवों के संरक्षण के लिए सरकार से सख्त कदम उठाने की उम्मीद की जा रही हैं।
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