उच्च शिक्षा विभाग में मची अफरा-तफरी, प्रमोशन से पहले फाइलें लापता, नहीं मिल रहे 45 प्रोफेसरों के सीआर फोल्डर

Arun Tiwari | Apr 17, 2026, 16:15 IST
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उच्च शिक्षा विभाग में बड़ा प्रशासनिक मामला सामने आया है, जहां करीब 45 प्रोफेसरों के वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन (ACR) फोल्डर गायब हो गए हैं। ये सभी प्रोफेसर प्राचार्य पद पर पदोन्नति की प्रक्रिया में शामिल हैं, जिससे मामला और गंभीर हो गया है।

Raipur. उच्च शिक्षा विभाग में उस समय हड़कंप मच गया जब करीब 45 प्रोफेसरों के सालाना गोपनीय प्रतिवेदन (ACR) के फोल्डर गायब होने की जानकारी सामने आई। यह मामला इसलिए और गंभीर हो गया है क्योंकि इन सभी प्रोफेसरों की पदोन्नति प्राचार्य पद पर होनी है। एसीआर किसी भी सरकारी कर्मचारी की पदोन्नति और मूल्यांकन प्रक्रिया का अहम आधार होता है। ऐसे में फोल्डर का गायब होना पूरे विभाग के लिए चिंता का विषय बन गया है।



कमिश्नर ने सचिव को लिखा पत्र:

मामले की गंभीरता को देखते हुए संचालनालय ने उच्च शिक्षा सचिव को पत्र लिखकर इन सभी प्रोफेसरों के एसीआर फोल्डर उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि संबंधित प्रोफेसरों के गोपनीय प्रतिवेदन संचालनालय में उपलब्ध नहीं हैं।



जिससे पदोन्नति प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इस खुलासे के बाद न केवल संचालनालय बल्कि मंत्रालय स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक विभाग में इन दिनों बड़े पैमाने पर प्राचार्यों की पदोन्नति की प्रक्रिया चल रही है।



करीब 100 से अधिक पदों पर नियुक्ति होनी है। जिनमें ये 45 प्रोफेसर भी शामिल हैं। ऐसे में एसीआर फोल्डर का गायब होना सीधे तौर पर इनकी पदोन्नति में बाधा बन सकता है। यदि समय पर फाइलें नहीं मिलती हैं, तो पूरी प्रक्रिया में देरी होना तय माना जा रहा है।



प्रशासनिक लापरवाही या कुछ और :

इस घटनाक्रम के सामने आने के बाद संबंधित प्रोफेसरों के बीच चिंता और असमंजस की स्थिति बन गई है। कई प्रोफेसर इस मामले को लेकर अलग-अलग आशंकाएं जता रहे हैं। कुछ का मानना है कि यह महज प्रशासनिक लापरवाही हो सकती है। जबकि कुछ इसे गंभीर अनियमितता के रूप में देख रहे हैं। उनका कहना है कि एसीआर जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों का गायब होना सामान्य बात नहीं है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।



क्या करें अफसर:

विभागीय अधिकारियों के लिए भी यह स्थिति चुनौतीपूर्ण बन गई है। एक ओर पदोन्नति प्रक्रिया को समय पर पूरा करने का दबाव है, वहीं दूसरी ओर जरूरी दस्तावेजों की अनुपलब्धता से काम अटक गया है। अब यह देखना होगा कि विभाग इन फाइलों को जल्द से जल्द खोजने या वैकल्पिक व्यवस्था करने में कितना सफल होता है।



इस पूरे मामले ने विभागीय कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर इतने बड़े पैमाने पर महत्वपूर्ण दस्तावेज गायब हो सकते हैं, तो रिकॉर्ड प्रबंधन की व्यवस्था पर विचार की जरूरत महसूस की जा रही है। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि लापता एसीआर फोल्डर कब तक मिलते हैं और पदोन्नति प्रक्रिया कब तक आगे बढ़ पाती है।



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