जल जीवन मिशन : छत्तीसगढ़ में 1100 करोड़ का भुगतान अटका, 3234 गांवों में पानी पहुंचाने की योजना अधर में

Umeshwari Baghel | Oct 20, 2026, 09:15 IST
अधर में छत्तीसगढ़ की पेयजल योजना
रायपुर। छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन की योजनाओं पर भुगतान का संकट गहरा गया है। करीब 1100 करोड़ रुपए अटकने से कई जगह काम प्रभावित हो रहा है। गांवों में पानी की टंकियां और पाइपलाइन तैयार हैं। इसके बावजूद घरों तक पानी नहीं पहुंच पाया है। प्रदेश के 18 जिलों के 3234 गांवों को इन योजनाओं का लाभ मिलना है।

टंकियां बनीं, लेकिन नलों में पानी नहीं

छत्तीसगढ़ के हजारों ग्रामीण परिवारों को अब भी नल से पानी का इंतजार है। जल जीवन मिशन के तहत कई गांवों में पानी की टंकियां बन चुकी हैं। पाइपलाइन बिछाने का काम भी लगभग पूरा हो गया है। इसके बावजूद घरों में पानी की सप्लाई शुरू नहीं हो सकी है।



इसकी बड़ी वजह निर्माण एजेंसियों का भुगतान अटकना बताया जा रहा है। ठेकेदार संगठनों के मुताबिक करीब 1100 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि बकाया है। पैसे नहीं मिलने से एजेंसियों को आगे काम करने में परेशानी हो रही है।



मामला सिर्फ निर्माण कार्य में देरी का नहीं है। इसका सीधा असर उन ग्रामीणों पर पड़ रहा है जो पानी का इंतजार कर रहे हैं।




71 योजनाओं से गांवों तक पहुंचना है पानी

प्रदेश के कई इलाकों में गर्मी के दौरान पानी की किल्लत बढ़ जाती है। भूजल स्तर गिरने से ग्रामीणों को परेशानी उठानी पड़ती है। इसी समस्या को दूर करने के लिए मल्टी-विलेज योजनाएं बनाई गई हैं।



इन योजनाओं के जरिए बड़े जलस्रोतों से कई गांवों तक पानी पहुंचाया जाना है। प्रदेश में ऐसी 71 योजनाओं को मंजूरी दी गई है।



अधिकांश योजनाओं में पानी साफ करने वाले संयंत्र लगभग तैयार हैं। नदी या जलस्रोत से पानी लेने वाले इंटेक वेल भी बन चुके हैं। मुख्य जलाशयों और पाइपलाइन का काम भी अंतिम चरण में है।



अब इनकी जांच और पानी की सप्लाई शुरू करने का काम बाकी है। लेकिन भुगतान संबंधी परेशानी के कारण इसमें देरी हो रही है।



मई तक शुरू होनी थी पानी की सप्लाई

इन योजनाओं से मई 2026 तक गांवों में पानी पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था। अक्टूबर आने के बाद भी कई जगह सप्लाई शुरू नहीं हो सकी है। खास बात यह है कि कई गांवों में पहले से पानी की टंकियां तैयार हैं। लेकिन इन टंकियों को पानी देने वाला मुख्य स्रोत उपलब्ध नहीं हो पाया है।



मल्टी-विलेज योजनाएं चालू होने पर इन टंकियों को भी पानी मिल सकेगा। इससे गांवों में घर-घर नल से सप्लाई शुरू करने का रास्ता खुलेगा। अब काम में और देरी हुई तो अगली गर्मी में भी परेशानी बनी रह सकती है।




एक साल से सरकारी फाइल में अटकी नीति

इस पूरे मामले में संचालन और रखरखाव की नीति बड़ी वजह बनकर सामने आई है। इसे ओएंडएम यानी ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस नीति कहा जाता है। यह नीति तय करती है कि योजना बनने के बाद उसका संचालन कैसे होगा। पानी की सप्लाई और रखरखाव की जिम्मेदारी भी इसी से तय होती है।



छत्तीसगढ़ में इस नीति का प्रस्ताव करीब एक साल से लंबित बताया जा रहा है। इसका प्रारूप तैयार हो चुका है। लेकिन इसे अब तक अंतिम मंजूरी नहीं मिल सकी है।ठेकेदार संगठन के मुताबिक पंचायत विभाग और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के बीच तालमेल की कमी है। इसी कारण नीति को लागू करने में देरी हो रही है।



इसका असर केंद्र से मिलने वाली राशि पर भी पड़ रहा है।



केंद्र से पैसा मिलने में कहां फंसा मामला?

वित्त वर्ष 2025-26 में केंद्रीय हिस्से की राशि नहीं मिलने का मामला सामने आया था। इसके बाद राज्य सरकार ने अपने संसाधनों से निर्माण एजेंसियों को भुगतान किया अब वित्त वर्ष 2026-27 में आगे भुगतान को लेकर परेशानी बताई जा रही है। ठेकेदार संगठन के मुताबिक राज्य सरकार पहले केंद्रीय प्रतिपूर्ति मिलने की बात कह रही है।



इसके लिए ओएंडएम नीति को मंजूरी मिलना जरूरी बताया गया है। दूसरी ओर ओडिशा और मध्यप्रदेश जैसे राज्यों में यह नीति लागू हो चुकी है। ठेकेदार संगठन का दावा है कि वहां केंद्रीय राशि मिलने का रास्ता खुला है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि छत्तीसगढ़ में नीति को मंजूरी देने में देरी क्यों हो रही है?




58 योजनाओं का 80 फीसदी काम पूरा होने का दावा

निर्माण एजेंसियों का कहना है कि उन्होंने अपने स्तर पर काफी काम पूरा कर लिया है। कई एजेंसियों ने इसके लिए कर्ज भी लिया है। प्रदेश की 58 मल्टी-विलेज योजनाओं से जुड़ी एजेंसियों का दावा है कि करीब 80 फीसदी काम पूरा हो चुका है।



लेकिन बकाया भुगतान नहीं मिलने से आगे का काम मुश्किल हो गया है। निर्माण एजेंसियों को मजदूरों और सामग्री का भुगतान भी करना पड़ता है। ऐसे में लंबे समय तक पैसा अटकने से उनकी आर्थिक परेशानी बढ़ सकती है। इसका असर बचा हुआ निर्माण और योजनाओं के परीक्षण पर भी पड़ रहा है।



इन 18 जिलों के 3234 गांवों को मिलेगा पानी

मल्टी-विलेज योजनाओं से छत्तीसगढ़ के 18 जिलों के 3234 गांवों तक पानी पहुंचाने की तैयारी है। सबसे ज्यादा 413 गांव सूरजपुर जिले के शामिल हैं। रायगढ़ के 396 और राजनांदगांव के 393 गांव भी योजना में हैं।



कोरिया के 292 और कोरबा के 245 गांवों को लाभ मिलेगा। मुंगेली के 240 और बेमेतरा के 219 गांव भी शामिल हैं। दुर्ग के 201 और सरगुजा के 190 गांवों तक पानी पहुंचाया जाएगा। बलौदाबाजार-भाटापारा के 192 और बालोद के 148 गांव भी योजना में हैं।



इसके अलावा बिलासपुर के 93 और धमतरी के 76 गांव शामिल हैं। महासमुंद के 48 और जांजगीर-चांपा के 32 गांवों को पानी मिलेगा। कबीरधाम के 31 और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के 16 गांव भी सूची में हैं। गरियाबंद जिले के नौ गांवों को भी योजना से जोड़ा गया है।



ठेकेदार संगठन बोला- अगस्त 2025 से भुगतान बंद

छत्तीसगढ़ कांट्रैक्टर एसोसिएशन ने भुगतान में देरी पर सवाल उठाए हैं। एसोसिएशन के अध्यक्ष बीरेश शुक्ला के मुताबिक अगस्त 2025 के बाद से भुगतान नहीं मिला है। करीब 1100 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि लंबित है।



उनका कहना है कि ओएंडएम नीति लागू करने के लिए पहले भी आग्रह किया गया था। लेकिन अब तक इस पर फैसला नहीं हो सका है। इससे निर्माण एजेंसियों के साथ विभाग और ग्रामीणों को भी नुकसान हो रहा है। शुक्ला के मुताबिक भुगतान नहीं होने से एजेंसियों के सामने काम जारी रखने का संकट है।




मिशन संचालक का दावा- भुगतान के लिए राशि जारी

दूसरी ओर जल जीवन मिशन के संचालक रिमिजियस एक्का ने अलग स्थिति बताई है। उनके मुताबिक मल्टी-विलेज योजनाओं की लगातार समीक्षा की जा रही है। निर्माण कार्यों में आ रही परेशानियों को दूर करने की कोशिश जारी है।



उन्होंने बताया कि निर्माण एजेंसियों को समय-समय पर भुगतान किया जा रहा है। कुछ दिन पहले भी भुगतान के लिए राशि जारी की गई है। हालांकि ठेकेदार संगठन अब भी बड़ी रकम बकाया होने का दावा कर रहा है। ऐसे में भुगतान की वास्तविक स्थिति को लेकर दोनों पक्षों के दावों में अंतर सामने आया है।



ग्रामीणों को कब मिलेगा नल से पानी?

जल जीवन मिशन का मकसद ग्रामीण परिवारों को नियमित और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है। लेकिन छत्तीसगढ़ में कई योजनाएं पूरी होने के करीब पहुंचकर भी अटकी हुई हैं।



कहीं मुख्य पाइपलाइन तैयार है तो कहीं पानी की टंकी बन चुकी है। इसके बावजूद ग्रामीणों को योजना का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल भुगतान और अधूरी प्रक्रिया को पूरा करने का है। सरकारी विभागों को ओएंडएम नीति पर भी फैसला लेना होगा।



जब तक योजनाओं का परीक्षण पूरा नहीं होगा तब तक नियमित जलापूर्ति शुरू नहीं होगी। ऐसे में 3234 गांवों के लोगों का इंतजार अभी खत्म होता नहीं दिख रहा है।

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