हिंगलाज भवानी की गुफ़ा डोंगरगढ़ से जुडी, जानिए रहस्य, नौ दिन, नौ देवियां
छत्तीसगढ़: बलूचिस्तान के मूल शक्तिपीठ पर आधारित प्राचीन हिंगलाज माता मंदिर अब कवर्धा जिले में भी श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुका है। सुतियापाट गाँव के पास 2500 फीट ऊँची पहाड़ी पर स्थित यह गुफा मंदिर अपनी रहस्यमयी बनावट और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है।
माता हिंगलाज भवानी का गुफा मंदिर
मंदिर में माता हिंगलाज भवानी विराजमान हैं। यहां पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को पहाड़ी पर पथरीले रास्ते से पैदल चढ़ना पड़ता है। स्थानीय पुजारी बताते हैं कि वे 30-40 वर्षों से यहां पूजा-पाठ कर रहे हैं और उनके पूर्वज भी इसी मंदिर की देखरेख करते थे।
स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले इस गुफा के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। केवल कुछ लोग, जो अपने पशुओं को चराने आते थे, उन्होंने गुफा को देखा। बाद में जब लोग अंदर गए, तो उन्हें पता चला कि गुफा में देवी का सिद्धपीठ स्थापित है।
आधे रास्ते तक ही दर्शन संभव
2003 में पहाड़ी के नीचे प्रशासन ने एक बड़ा जलाशय बनाया, जिसे सुतियापाट जलाशय कहा गया। इसके बाद आसपास घर बसने लगे और मंदिर में श्रद्धालुओं का आवागमन बढ़ा। आज पूरे प्रदेश से लोग यहां माता हिंगलाज के दर्शन और आशीर्वाद लेने आते हैं।
मंदिर की गुफा को रहस्यमयी माना जाता है। गुफा के भीतर लगभग 50 मीटर तक देवी माता विराजमान हैं। अंदर जाने का रास्ता संकरा और कठिन है, इसलिए अधिकतर लोग आधे रास्ते तक ही जाते हैं। स्थानीय मान्यता है कि यह गुफा गुप्त रूप से डोंगरगढ़ की मां बम्लेश्वरी और भोरमदेव मंदिर तक जुड़ी हो सकती है।
मंदिर बने पर्यटन स्थल की उम्मीद
स्थानीय लोग और पुजारी मानते हैं कि यदि प्रशासन इस स्थल पर ध्यान दे और अच्छी सड़क, पेयजल और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराए, तो यह मंदिर न केवल धार्मिक स्थल बल्कि एक प्रमुख पर्यटन स्थल भी बन सकता है। पहाड़ी पर मंदिर से पास के जंगल और जलाशय का दृश्य अत्यंत आकर्षक है, जो परिवार और पर्यटकों के लिए आदर्श स्थल हो सकता है। मंदिर में दर्शन करने वाले श्रद्धालु मानते हैं कि जो भी माता से आशीर्वाद मांगता है, उसकी मनोकामना पूरी होती है, यही कारण है कि श्रद्धालु यहां बार-बार आते हैं।
बलूचिस्तान में आस्था का केंद्र
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के हिंगलाज में स्थित हिंगलाज माता मंदिर हिन्दू देवी सती को समर्पित 51 शक्तिपीठों में से एक है। यह मंदिर हिंगोल नदी के तट पर, खेरथार पहाड़ियों में प्राकृतिक गुफा में बना है। यहाँ देवी की शिला को पूजनीय माना जाता है, जिसे सिंदूर (हिंगुला) से पुता जाता है। शारदीय और चैत्र नवरात्रि के दौरान श्रद्धालु दूर-दराज से यहाँ आते हैं। मंदिर के आसपास अन्य धार्मिक स्थल भी हैं। स्थानीय मुस्लिम समुदाय भी पूजा में शामिल होकर सुरक्षा प्रदान करता है। हिंगलाज माता शक्तिशाली देवी मानी जाती हैं, जो भक्तों की मनोकामनाएँ पूरी करती हैं।
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