साय के सुशासन मॉडल से बदल रही राजस्व व्यवस्था, छत्तीसगढ़ में अब व्हाट्सएप पर मिल रहे खसरा और बी-1
छत्तीसगढ़ में जमीन से जुड़े काम अब पहले की तरह लंबी और मुश्किल प्रक्रिया नहीं रहे हैं। किसानों और आम लोगों को खसरा, बी-1, ऋण पुस्तिका जैसे जरूरी दस्तावेज लेने के लिए बार-बार तहसील और पटवारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। अब ये दस्तावेज व्हाट्सएप जैसे आसान माध्यम से भी उपलब्ध हो रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राजस्व व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में लगातार बड़े बदलाव किए जा रहे हैं।
प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि लोगों को सरकारी सेवाएं समय पर मिलें। अनावश्यक भागदौड़ खत्म हो और राजस्व विभाग में पारदर्शिता बढ़े। इसी सोच के साथ ई-गवर्नेंस को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का कहना है कि प्रदेश में प्रशासनिक सुधार लगातार लागू किए जा रहे हैं। अब सेवा सेतु के माध्यम से 36 विभागों की 528 सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध हैं।
इसके साथ ही ई-डिस्ट्रिक्ट, ऑटो म्यूटेशन, मॉडल स्मार्ट रजिस्ट्री कार्यालय और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 जैसी व्यवस्थाओं के जरिए सरकारी सेवाओं को लोगों तक समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पहुंचाया जा रहा है। प्रदेश में अब तक 435 प्रशासनिक सुधार लागू किए जा चुके हैं।
हाल ही में मंत्रालय महानदी भवन में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री साय ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि राजस्व प्रशासन को पूरी तरह पारदर्शी, जवाबदेह और भ्रष्टाचारमुक्त बनाया जाए। उन्होंने कहा कि राजस्व मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही या अनियमितता स्वीकार नहीं की जाएगी। लोगों को बिना अनावश्यक कार्यालयों के चक्कर लगाए बेहतर सेवाएं मिलनी चाहिए।
अब व्हाट्सएप पर मिल रहे जमीन के दस्तावेज
कुछ समय पहले तक अपने खेत का खसरा, बी-1 या ऋण पुस्तिका प्राप्त करने के लिए किसानों को कई बार तहसील और पटवारी कार्यालय जाना पड़ता था। लंबी कतारें, समय की बर्बादी और जटिल प्रक्रिया आम बात थी। अब तकनीक ने यह तस्वीर बदल दी है। व्हाट्सएप के जरिए कुछ ही सेकंड में जरूरी दस्तावेज उपलब्ध हो रहे हैं। इससे लोगों का समय बच रहा है और कार्यालयों पर निर्भरता भी कम हुई है। डिजिटल व्यवस्था से सुविधा बढ़ने के साथ पारदर्शिता भी मजबूत हुई है। दस्तावेजों की ऑनलाइन उपलब्धता से अनावश्यक देरी और भ्रष्टाचार की संभावनाओं में भी कमी आई है।
वसुंधरा परियोजना से सुरक्षित हो रहा राजस्व रिकॉर्ड
सरकार की वसुंधरा परियोजना राजस्व सुधारों की अहम कड़ी है। इसके तहत पूरे प्रदेश के राजस्व अभिलेखों का डिजिटलीकरण किया जा रहा है। सभी रिकॉर्ड सुरक्षित डिजिटल अभिलेखागार में रखे जा रहे हैं, जिससे उनमें छेड़छाड़ की संभावना काफी कम हो जाएगी। यह व्यवस्था भविष्य में जमीन से जुड़े विवादों के समाधान को भी आसान बनाएगी।
प्रदेश की छह हजार से ज्यादा ग्राम पंचायतों में स्थापित अटल डिजिटल सेवा केंद्र ग्रामीणों के लिए बड़ी सुविधा बनकर उभरे हैं। अब गांवों में रहने वाले लोग भी अपने जरूरी दस्तावेज आसानी से प्राप्त कर रहे हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं की पहुंच बढ़ी है और लोगों को शहरों के चक्कर लगाने की जरूरत कम हुई है।
राजस्व मामलों में जीरो टॉलरेंस नीति
मुख्यमंत्री साय ने राजस्व विभाग में जवाबदेही तय करने के लिए जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। अफसरों को निर्देश दिए गए हैं कि नामांतरण, सीमांकन और मुआवजा जैसे मामलों का समयबद्ध समाधान किया जाए। किसी भी तरह की लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार ने लंबे समय से लंबित मामलों के जल्द निपटारे पर भी विशेष जोर दिया है। सीमांकन जैसे संवेदनशील मामलों को तय समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
इससे वर्षों पुराने कई विवादों के समाधान की दिशा में तेजी आई है। मुख्यमंत्री ने आरबीसी 6-4 के मामलों के त्वरित और संवेदनशील निराकरण के लिए ऑनलाइन व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए हैं। इस व्यवस्था के तहत आवेदक स्वयं ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। इससे पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और समयबद्ध होगी तथा आपदा राहत से जुड़े मामलों में लोगों को जल्दी सहायता मिल सकेगी।
पंचायत स्तर पर होगा फौती नामांतरण
सरकार अविवादित फौती नामांतरण की प्रक्रिया पंचायतों के माध्यम से कराने की दिशा में भी काम कर रही है। इससे ग्रामीणों को छोटे-छोटे काम के लिए तहसील कार्यालय नहीं जाना पड़ेगा। गांव स्तर पर ही समस्याओं का समाधान होने से लोगों का समय और खर्च दोनों बचेंगे।
मुख्यमंत्री साय ने अबूझमाड़ जैसे असर्वेक्षित क्षेत्रों में भूमि सर्वेक्षण को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। सर्वे पूरा होने के बाद वहां रहने वाले लोगों के भूमि अभिलेख तैयार होंगे। इससे उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ लेना आसान होगा और प्रशासनिक सेवाओं तक उनकी पहुंच भी बढ़ेगी।
किसानों के लिए नई डिजिटल पहल
राज्य सरकार स्वामित्व योजना, वन अधिकार पट्टा, एग्री स्टैक और फार्मर रजिस्ट्री जैसी योजनाओं की भी लगातार समीक्षा कर रही है। साथ ही डिजिटल क्रॉप सर्वे और गिरदावरी की तैयारियों को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। इन पहलों का उद्देश्य किसानों के रिकॉर्ड को आधुनिक और अधिक विश्वसनीय बनाना है।
राजस्व सेवाओं को और आसान बनाने के लिए साइबर तहसील व्यवस्था लागू करने की तैयारी चल रही है। इसके तहत अविवादित नामांतरण और बंटवारे जैसे काम पूरी तरह ऑनलाइन किए जाएंगे। साथ ही ई-कोर्ट प्रणाली, ऑनलाइन साक्ष्य प्रस्तुत करने की सुविधा और नक्शों के डिजिटलीकरण पर भी तेजी से काम हो रहा है। धमतरी, अंबिकापुर और जगदलपुर में नक्शा डिजिटलीकरण परियोजना का पायलट कार्य शुरू हो चुका है। सरकार का लक्ष्य इसे तय समय-सीमा में पूरा करना है।
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