छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: सुप्रीम कोर्ट ने उदय राव की अंतरिम जमानत की मंजूर, आरोपी ने खुद को बताया निर्दोष
समझें क्या है पूरा मामला
- सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एन. उदय राव को अंतरिम जमानत दी।
- मामला शराब की दुकानों के मैनपावर बिलों में कथित अनियमितताओं का है।
- अभियोजन पक्ष के मुताबिक एक कंपनी को करीब 34 करोड़ 6 लाख रुपए एक्स्ट्रा मिले।
- राव ने इन आरोपों का खंडन किया है।
- राज्य ने कोर्ट से कहा कि राव के खिलाफ कोई प्रतिकूल रिपोर्ट नहीं है।
उदय राव की जमानत पर कोर्ट में क्या हुआ
आज की सुनवाई में कोर्ट ने सीधा सवाल पूछा। क्या राव के खिलाफ कोई प्रतिकूल रिपोर्ट (आरोपी के खिलाफ जाने वाली रिपोर्ट) है? राज्य ने कोर्ट को बताया कि ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं है।
सुनवाई में दो बातें अहम रहीं। पहली, कोर्ट ने प्रतिकूल रिपोर्ट के बारे में सीधे पूछा। दूसरी, राज्य ने किसी प्रतिकूल रिपोर्ट के होने से इनकार किया।
दलीलों और हालात को देखते हुए कोर्ट ने अंतरिम जमानत मंजूर कर दी। सुप्रीम कोर्ट अंतरिम जमानत का मतलब है मामला चलने तक की अस्थायी राहत। राव कोर्ट की शर्तों के साथ जमानत पर रहेंगे।
राव की ओर से कौन वकील पेश हुए
राव की ओर से सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ अग्रवाल सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए। उनकी मदद एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड (केस दाखिल करने वाले वकील) कौस्तुभ शुक्ला ने की।
शराब दुकान मैनपावर कॉन्ट्रैक्ट का विवाद
यह मामला 2019 से 2023 के बीच दिए गए ठेकों से जुड़ा है। छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) ने ये शराब दुकान मैनपावर कॉन्ट्रैक्ट दिए थे।
इन ठेकों का मकसद पूरे छत्तीसगढ़ की खुदरा दुकानों पर स्टाफ तैनात करना था। खुदरा यानी सीधे ग्राहक को बिक्री करने वाली दुकानें। अभियोजन पक्ष के आरोप इसी CSMCL scam के इर्द-गिर्द हैं।
मैनपावर सप्लाई यानी कर्मचारी उपलब्ध कराने वाली एजेंसियां। इनके बिल इस केस का केंद्र हैं। ये बिल सीएसएमसीएल को सौंपे गए थे। इन बिलों में कथित अनियमितताओं पर ही केस दर्ज हुआ है।
अभियोजन पक्ष के आरोप क्या हैं
केस ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध शाखा) और एसीबी (भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो) ने दर्ज किया। अभियोजन पक्ष (केस चलाने वाला) का आरोप है, बिलों में ज्यादा रकम मांगी गई। ये दावे ओवरटाइम, बोनस, अतिरिक्त कार्य दिवस और सर्विस चार्ज के नाम पर थे। ईओडब्ल्यू एसीबी जांच इन्हीं कथित अनियमितताओं से जुड़ी है।
आरोप है कि ए-2-जेड इंफ्रासर्विसेज लिमिटेड को 34.06 करोड़ रुपए अतिरिक्त मिले। यह लगभग 34 करोड़ रुपए अतिरिक्त भुगतान का आरोप है, यानी 3,406 लाख रुपए। इसमें से करीब 6.90 करोड़ रुपए कथित अवैध कमीशन के तौर पर गए।
यहां से कहानी राव के पक्ष की ओर मुड़ती है।
राव का पक्ष क्या है
अभियोजन के मुताबिक राव कथित तौर पर कंपनी के स्थानीय कामकाज से जुड़े थे। राव इन आरोपों से इनकार करते हैं।
उनका कहना है कि एफआईआर (FIR - First Information Report) में उनका नाम नहीं था। राव के मुताबिक वे ए-2-जेड इंफ्रासर्विसेज के न डायरेक्टर थे, न शेयरहोल्डर (हिस्सेदार)। कंपनी पर उनका कोई स्वतंत्र प्रबंधकीय या वित्तीय नियंत्रण नहीं था।
हाई कोर्ट जमानत खारिज से राहत तक
अब जरा पीछे चलते हैं। राव को 12 मई, 2026 को गिरफ्तार किया गया था। हाई कोर्ट जमानत खारिज करने का आदेश 6 अगस्त, 2026 को आया। यह राव की नियमित जमानत (केस के पूरे दौर की जमानत) अर्जी पर था।
इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। 21 अगस्त, 2026 को कोर्ट ने सुनवाई की। बेंच में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना थे। बेंच ने राव को अंतरिम जमानत दी। तारीख तय हुई 1 अक्टूबर।
अंतरिम जमानत और नियमित जमानत में फर्क
अंतरिम जमानत कुछ समय की राहत होती है। नियमित जमानत पूरे मुकदमे के दौरान मिलती है। हाई कोर्ट ने नियमित जमानत की अर्जी खारिज की थी। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल अंतरिम राहत दी।
शराब घोटाला सुप्रीम कोर्ट में आगे क्या
शराब घोटाला सुप्रीम कोर्ट में अब भी सुनवाई के दौर में है। सुनवाई के लिए 1 अक्टूबर, 2026 की तारीख 21 अगस्त को तय हुई थी।
बेंच ने अंतरिम जमानत मंजूर की है। यह राहत अस्थायी है और कोर्ट की शर्तों के साथ मिली है। यह आदेश आरोपों पर अंतिम फैसला नहीं है। आगे की सुनवाई में क्या होगा? यह अभी साफ नहीं है। क्या यह राहत आखिरी होगी? यह कोर्ट के अगले आदेश पर निर्भर करेगा।