छत्तीसगढ़ में मोबाइल टावर योजना से डिजिटल कनेक्टिविटी को मिल रही नई गति, सुदूर गांवों तक पहुंच रहा मोबाइल नेटवर्क

The Sootr | Feb 25, 2026, 13:48 IST
Impact Feature
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने 'मोबाइल टावर योजना' को मंजूरी दी है, जिसके तहत सुदूर और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 5000 से अधिक टावर लगाकर 4G/5G कनेक्टिविटी पहुंचाई जाएगी।

Raipur. छत्तीसगढ़ के दूरस्थ और मोबाइल नेटवर्क विहीन क्षेत्रों को डिजिटल दुनिया से जोड़ने की दिशा में प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य मंत्रिपरिषद ने ‘मोबाइल टावर योजना’ को मंजूरी दे दी है। इस योजना का उद्देश्य उन गांवों तक मोबाइल नेटवर्क पहुंचाना है, जहां अब तक सिग्नल उपलब्ध नहीं हो पाता था। सरकार का मानना है कि मजबूत डिजिटल कनेक्टिविटी से विकास की नई संभावनाएं खुलेंगी और सुदूर अंचलों के लोग भी डिजिटल सेवाओं से सीधे जुड़ सकेंगे।



गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में भौगोलिक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हैं। घने जंगल, पहाड़ी इलाके और नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के कारण कई गांव वर्षों से मोबाइल नेटवर्क से वंचित रहे हैं। इसी समस्या को दूर करने के लिए साय सरकार ने व्यापक स्तर पर मोबाइल टावर स्थापित करने का फैसला लिया है।



इस योजना के तहत मोबाइल टावर लगाने के लिए चयनित सेवा प्रदाताओं को अनुमति देने की प्रक्रिया को सरल और समयबद्ध बनाया गया है। सरकार चाहती है कि नेटवर्क सुविधा जल्द से जल्द उन क्षेत्रों तक पहुंचे, जहां लोगों को आज भी मोबाइल सिग्नल के लिए कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है।



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नेटवर्क की कमी से प्रभावित था विकास

छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग और आसपास के कई जिलों में लंबे समय से मोबाइल नेटवर्क की गंभीर समस्या रही है। बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा और नारायणपुर जैसे जिलों के अनेक गांव ऐसे हैं, जहां मोबाइल सिग्नल लगभग न के बराबर था। इस कारण डिजिटल सेवाओं का लाभ लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा था।



ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल बैंकिंग, टेलीमेडिसिन और सरकारी ई-सेवाओं की पहुंच इन क्षेत्रों तक सीमित रह गई थी। कई जगहों पर पंचायत मुख्यालयों तक भी स्थिर नेटवर्क उपलब्ध नहीं था। ग्रामीणों को बैंकिंग सेवाओं की जानकारी, छात्रों को ऑनलाइन पढ़ाई और किसानों को मंडी भाव जैसी जरूरी जानकारी पाने में कठिनाई होती थी। इस स्थिति का असर केवल आम लोगों पर ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा तंत्र पर भी दिखाई देता था। संचार व्यवस्था कमजोर होने से कई सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में भी बाधाएं आती थीं।



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डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मिली प्राथमिकता

दिसंबर 2023 में नई सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राज्य में डिजिटल अवसंरचना को विकास की प्राथमिकता में शामिल किया है। सरकार का मानना है कि डिजिटल कनेक्टिविटी आज के समय में मूलभूत आवश्यकता बन चुकी है।



इसी सोच के साथ 3 मार्च 2025 को प्रस्तुत बजट 2025-26 में ‘मुख्यमंत्री मोबाइल टावर योजना’ को शामिल किया गया। योजना के तहत पूरे राज्य में पांच हजार से अधिक मोबाइल टावर चरणबद्ध तरीके से स्थापित करने का लक्ष्य तय किया गया है।



इन टावरों के माध्यम से 4G नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा और भविष्य में 5G सेवाओं के लिए भी आधार तैयार किया जाएगा। सरकार ने इसके साथ बैकहॉल कनेक्टिविटी और फाइबर नेटवर्क को मजबूत करने के निर्देश भी दिए हैं, ताकि स्थापित टावर पूरी क्षमता से काम कर सकें।



टेकुलगुड़ेम में लगा पहला मोबाइल टावर

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इस योजना के तहत पहला मोबाइल टावर नक्सल प्रभावित सुकमा जिले के टेकुलगुडेम गांव में स्थापित किया गया है। जनवरी 2024 में स्थापित इस कैंप का उद्देश्य नक्सल विरोधी अभियानों को मजबूत करना था। ऐसे अभियानों के लिए मोबाइल और इंटरनेट कनेक्टिविटी बेहद जरूरी होती है। टेकुलगुडेम में लगा यह बीएसएनएल (BSNL) टावर आसपास के टिम्मापुरम, जोनागुड़ा और पूवर्ती जैसे दूरस्थ गांवों को नेटवर्क सुविधा प्रदान कर रहा है।



केंद्र सरकार का भी मिला सहयोग

डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार का भी सहयोग मिल रहा है। डिजिटल इंडिया फंड के तहत छत्तीसगढ़ में 513 नए 4G मोबाइल टावरों की स्वीकृति दी गई है। इन टावरों का मुख्य फोकस वामपंथी उग्रवाद प्रभावित और दुर्गम गांव हैं। इन टावरों के स्थापित होने के बाद कई ऐसे गांवों में पहली बार मोबाइल नेटवर्क पहुंचा है, जो अब तक लगभग डिजिटल दुनिया से कटे हुए थे। अब ग्रामीणों को इंटरनेट, वीडियो कॉल, ऑनलाइन पढ़ाई और डिजिटल भुगतान जैसी सुविधाएं मिलने लगी हैं।



ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही गति

मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी बदलाव दिखाई देने लगा है। किसान अब मोबाइल के जरिए मंडी भाव देख पा रहे हैं और अपनी फसल की बेहतर कीमत तय कर सकते हैं। डिजिटल भुगतान के बढ़ते उपयोग से ग्रामीण बाजारों में पारदर्शिता आई है। स्वयं सहायता समूहों और छोटे व्यापारियों ने भी ऑनलाइन भुगतान प्रणाली को अपनाना शुरू किया है।



युवाओं के लिए भी नई संभावनाएं खुल रही हैं। उन्हें ऑनलाइन शिक्षा सामग्री, प्रतियोगी परीक्षाओं की जानकारी और रोजगार से जुड़ी सूचनाएं आसानी से मिल रही हैं।



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सुरक्षा व्यवस्था को मिली मजबूती

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में संचार व्यवस्था मजबूत होने का सबसे बड़ा लाभ सुरक्षा तंत्र को मिल रहा है। मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध होने से सुरक्षा बलों के बीच समन्वय बेहतर हुआ है। प्रशासनिक संवाद भी पहले की तुलना में अधिक तेज और प्रभावी हो गया है। आपातकालीन सेवाओं जैसे डायल-112 की पहुंच भी मजबूत हुई है। इससे ग्रामीणों में सुरक्षा की भावना बढ़ी है।



सरकारी योजनाओं की पहुंच बढ़ी

मोबाइल नेटवर्क के विस्तार से सरकारी योजनाओं की जानकारी भी अब तेजी से गांवों तक पहुंच रही है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS), प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) और अन्य योजनाओं से जुड़े संदेश अब लाभार्थियों तक समय पर पहुंचने लगे हैं। ग्रामीणों को बैंकिंग लेन-देन से जुड़े एसएमएस अलर्ट और सरकारी सूचनाएं मोबाइल पर मिल रही हैं। टेलीमेडिसिन और वीडियो परामर्श जैसी सुविधाएं भी धीरे-धीरे दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचने लगी हैं।



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डिजिटल समावेशन की दिशा में बड़ा कदम

मोबाइल टावर योजना को राज्य के डिजिटल परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। जिन आदिवासी और दूरस्थ गांवों में अब तक मोबाइल सिग्नल भी नहीं पहुंचता था, वहां अब डिजिटल सेवाओं का विस्तार शुरू हो रहा है। यह योजना केवल मोबाइल टावर लगाने तक सीमित नहीं है, इसका उद्देश्य ग्रामीण समाज को डिजिटल मुख्यधारा से जोड़ना और विकास के नए अवसर उपलब्ध कराना है।



साय सरकार का मानना है कि मजबूत डिजिटल कनेक्टिविटी आने वाले वर्षों में शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था को नई दिशा देगी। छत्तीसगढ़ के दूरस्थ गांव अब धीरे-धीरे ‘डिजिटल छत्तीसगढ़’ की यात्रा का हिस्सा बनते दिखाई दे रहे हैं।



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