छत्तीसगढ़ में बेमौसम बारिश से धान की फसल तबाह, खेतों में डूबी किसानों की मेहनत; पटवारियों की हड़ताल ने बढ़ाई मुआवजे की चिंता

Umeshwari Baghel | Oct 31, 2026, 16:30 IST
छत्तीसगढ़ में बेमौसम बारिश से धान की फसल बर्बाद, परेशान किसानों को मुआवजे की आस।
छत्तीसगढ़ में बेमौसम बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सोर्स के मुताबिक इसका कारण चक्रवाती तूफान अर्नब का असर है। यह बेमौसम बारिश से धान फसल नुकसान का मामला है। कई जिलों में तैयार फसल प्रभावित हुई है। खेतों में पानी भरने से कहीं बालियां डूबी हैं। कहीं तेज हवा और बारिश से फसल जमीन पर बिछ गई है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • चक्रवाती तूफान अर्नब के असर से बेमौसम बारिश हुई।
  • धान की तैयार फसल को कई जिलों में नुकसान पहुंचा।
  • पटवारी 13 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं।
  • मुख्यमंत्री ने सभी कलेक्टरों को फसल नुकसान के आकलन के निर्देश दिए।
  • कांग्रेस ने 70,518 रुपए प्रति एकड़ मुआवजा मांगा है।

खेतों में कितना नुकसान हुआ?

छत्तीसगढ़ में धान किसानों की आजीविका का प्रमुख साधन है। कई इलाकों में फसल पककर तैयार थी। कटाई की तैयारी चल रही थी। तभी मौसम बदल गया। लगातार बारिश से खेतों में पानी जमा है। पानी में गिरी बालियों के खराब होने का खतरा है। दानों की गुणवत्ता पर भी असर की आशंका है।



रायपुर के परसट्टी गांव में क्या हुआ?

परसट्टी गांव के किसान जिनी चेलक ने करीब पांच एकड़ में धान लगाया था। तैयार फसल बारिश से खेत में गिर गई। उनके मुताबिक शुरुआत में खाद मिलने में भी परेशानी हुई थी। अब उन्हें मुआवजे की चिंता है।




गरियाबंद के सीनापाली गांव का हाल

देवभोग विकासखंड के सीनापाली में किसान दुर्बल राम गिरी फसल को बचाने में लगे हैं। वे पौधे उठाकर आपस में बांध रहे हैं। उनका मकसद है कि बालियां लंबे समय तक पानी में न रहें। पानी में ज्यादा देर रहने से बालियों के सड़ने का डर है।



बलौदाबाजार के पलारी में जलभराव

पलारी के किसान झड़ी राम कन्नौजे के करीब छह से सात एकड़ खेत में पानी भर गया है। पानी की निकासी की सही व्यवस्था नहीं है। इससे नुकसान और बढ़ने की आशंका है।



पटवारियों की हड़ताल का क्या असर?

छत्तीसगढ़ पटवारी हड़ताल 13 अक्टूबर से चल रही है। नवा रायपुर के तूता धरना स्थल पर प्रदर्शन हो रहा है। इसमें कई जिलों के पटवारी शामिल हैं।



संघ की प्रमुख मांगें पीवी ऐप से जुड़ी आपत्तियों का समाधान, वेतन विसंगति दूर करना और पदोन्नति की व्यवस्था है। कोषाध्यक्ष देवेंद्र कुमार कर्ष ने माना कि किसानों को नुकसान हुआ है। संघ का कहना है कि सरकार बातचीत से हल निकाले।




सर्वे में देरी हुई तो क्या होगा?

फसल नुकसान का आकलन सहायता की प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। किसानों को डर है कि सर्वे में देर हुई तो मुआवजे में भी देर हो सकती है। बारिश के बाद खेतों की स्थिति बदलने से असली नुकसान का आंकना भी कठिन हो सकता है।



कांग्रेस ने क्या मांग रखी?

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने किसानों को जल्द आर्थिक सहायता देने की मांग की है। कांग्रेस ने पूरी फसल गंवाने वाले किसानों के लिए 70,518 रुपए प्रति एकड़ की मांग रखी है।



यह राशि 3,358 रुपए प्रति क्विंटल की दर और 21 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन के आधार पर बताई गई है। यह कांग्रेस की राजनीतिक मांग है। सरकार की घोषित राशि नहीं है। बैज ने हड़ताल से धान खरीदी और पंजीयन के काम पर असर की आशंका भी जताई है।



मुख्यमंत्री ने क्या निर्देश दिए?

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सभी जिला कलेक्टरों को प्रभावित फसलों का आकलन कराने को कहा है। उन्होंने नियमानुसार सहायता देने और सर्वे व राहत वितरण में अनावश्यक देरी न करने के निर्देश दिए। हालांकि हड़ताल के बीच सर्वे की वैकल्पिक व्यवस्था क्या होगी, यह स्पष्ट नहीं है।




किसानों की लागत का क्या होगा?

कई किसान खाद, बीज, डीजल और मजदूरी पर बड़ी रकम खर्च करते हैं। कुछ उधार या कर्ज भी लेते हैं। फसल खराब होने से लागत निकालना और कर्ज चुकाना चुनौती बन सकता है। कटाई के बाद खेत में रखी धान के भी भीगने की जानकारी सामने आई है।



अब आगे क्या?

अब सबकी नजर जिला प्रशासन पर है। यह देखना होगा कि प्रभावित खेतों का सर्वे कब शुरू होता है और राहत कब तक पहुंचती है। फिलहाल किसानों को जल्द सर्वे और समय पर सहायता की उम्मीद है।




यह खबर क्यों जरूरी है

धान छत्तीसगढ़ के लाखों किसानों की आमदनी का मुख्य जरिया है। कटाई के समय आई बारिश से लागत डूबने का खतरा रहता है। मुआवजे के लिए सर्वे जरूरी है। लेकिन उसी समय पटवारी हड़ताल पर हैं, जो राजस्व अमले की अहम कड़ी हैं। इसलिए किसानों के सामने दोहरी मुश्किल है। मुख्यमंत्री के निर्देश और कांग्रेस की मांग दोनों सामने हैं। सर्वे की रफ्तार और हड़ताल का समाधान, दोनों पर किसानों की नजर रहेगी। आगे की स्थिति के लिए प्रशासन की कार्रवाई देखना जरूरी होगा।



FAQ

सवाल: छत्तीसगढ़ में धान की फसल को नुकसान क्यों हुआ?



जवाब: चक्रवाती तूफान अर्नब के असर से बेमौसम बारिश हुई। इससे खेतों में पानी भरा और फसल खराब हो गई।



सवाल: मुआवजे का सर्वे क्यों अटक सकता है?



जवाब: पटवारी 13 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। फसल नुकसान के आकलन में राजस्व अमले की भूमिका होती है।



सवाल: कांग्रेस ने कितना मुआवजा मांगा है?



जवाब: पूरी तरह फसल गंवाने वाले किसानों के लिए 70,518 रुपए प्रति एकड़। यह कांग्रेस की मांग है, सरकार की घोषित राशि नहीं।

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