कटाई के वक्त कुदरत की मार, छत्तीसगढ़ में धान की फसल पर संकट, किसानों की बढ़ी चिंता

Arun Tiwari | Oct 29, 2026, 11:01 IST
छत्तीसगढ़ में धान कटाई रोकने की सलाह
रायपुर। छत्तीसगढ़ में किसानों के लिए यह समय बेहद अहम है। खेतों में धान की फसल पककर तैयार हो चुकी है। किसान जल्द से जल्द कटाई का काम पूरा करना चाहते हैं। लेकिन इसी बीच मौसम में आए बदलाव ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। अर्नब तूफान के असर से प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश और तेज हवाओं की आशंका जताई जा रही है।

अगर इस दौरान बारिश होती है, तो खेतों में खड़ी धान की फसल गिर सकती है। वहीं, कटाई के बाद खुले में रखा धान भी भीग सकता है। इससे फसल की गुणवत्ता खराब होने और किसानों को आर्थिक नुकसान होने का खतरा है। इस स्थिति को देखते हुए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने किसानों को अगले 2 से 4 दिनों तक धान की कटाई रोकने की सलाह दी है।



धान की कटाई के समय मौसम ने बढ़ाई चिंता

छत्तीसगढ़ के कई जिलों में धान की फसल पककर तैयार हो गई है। कुछ इलाकों में किसान कटाई का काम भी शुरू कर चुके हैं। ऐसे में बारिश और तेज हवा किसानों के लिए परेशानी खड़ी कर सकती है।



खेतों में खड़ी फसल पर तेज हवाओं का असर पड़ने से धान के पौधे गिर सकते हैं। इससे कटाई में देरी होगी और फसल को संभालना मुश्किल हो सकता है। वहीं, अगर कटा हुआ धान बारिश में भीग जाता है, तो उसमें नमी बढ़ने का खतरा रहता है।



धान में ज्यादा नमी होने से उसकी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। लंबे समय तक गीला रहने पर दानों में अंकुरण भी शुरू हो सकता है। इससे किसानों को अपनी उपज बेचने में परेशानी आ सकती है और आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।



अगले 2 से 4 दिन कटाई रोकने की सलाह

मौसम की स्थिति को देखते हुए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने किसानों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, किसानों को अगले दो से चार दिनों तक धान की कटाई स्थगित रखनी चाहिए।



जिन किसानों ने पहले ही धान की कटाई शुरू कर दी है, उन्हें अपनी उपज को सुरक्षित रखने पर विशेष ध्यान देना होगा। कटे हुए धान को खुले खेत में छोड़ने से बचना चाहिए। बारिश की आशंका होने पर फसल को किसी सुरक्षित और ढके हुए स्थान पर रखना बेहतर होगा।



अगर धान को खेत से तुरंत हटाना संभव नहीं है, तो उसे तिरपाल या किसी दूसरे उपयुक्त साधन से ढककर बारिश से बचाया जा सकता है। किसानों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि बारिश से भीगी फसल को बिना पर्याप्त सुखाए भंडारित न करें।



सब्जियों और फलों की खेती पर भी असर का खतरा

मौसम में बदलाव से केवल धान की फसल ही प्रभावित नहीं हो सकती, बल्कि सब्जी और फल उगाने वाले किसानों की परेशानी भी बढ़ सकती है।



बारिश और तेज हवाओं के कारण टमाटर, मिर्च, बैंगन, करेला, लौकी, भिंडी, गोभी, पालक और दूसरी हरी सब्जियों को नुकसान पहुंचने की आशंका है। खेतों में पानी भरने से पौधों की जड़ों को नुकसान हो सकता है। तेज हवाओं से पौधे गिर सकते हैं और फूल व फल भी झड़ सकते हैं।



केले और पपीते जैसे फलदार पौधों पर भी तेज हवा का असर पड़ सकता है। ऐसे में किसानों को अपने खेतों में पानी निकासी की व्यवस्था दुरुस्त रखनी चाहिए। जहां पानी जमा होने की आशंका है, वहां जल निकासी का उचित इंतजाम करना जरूरी है।



कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय फसलों को सुरक्षित रखना सबसे जरूरी है। मौसम की खराब स्थिति से उत्पादन के साथ किसानों की आमदनी पर भी असर पड़ सकता है।



धान को सुरक्षित रखने के लिए अपनाएं ये उपाय

बारिश की आशंका के बीच किसानों को अपनी फसल बचाने के लिए कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए।



  • मौसम की जानकारी और स्थानीय कृषि अधिकारियों की सलाह पर नजर रखें।
  • अगले दो से चार दिनों तक धान की कटाई स्थगित रखने की सलाह का पालन करें।
  • कटे हुए धान को खुले में रखने से बचें।
  • खेत में रखी फसल को तिरपाल से ढककर बारिश से बचाएं।
  • गीले धान को अच्छी तरह सुखाने के बाद ही भंडारित करें।
  • खेतों में पानी भरने से रोकने के लिए जल निकासी की व्यवस्था करें।

फसल को सुरक्षित रखने के लिए Storage का सही तरीका अपनाना भी जरूरी है। धान में नमी ज्यादा रहने पर उसकी गुणवत्ता खराब हो सकती है। इसलिए भंडारण से पहले फसल को अच्छी तरह सुखाना चाहिए।



पशुओं और चारे की सुरक्षा भी जरूरी

खराब मौसम के दौरान किसानों को अपने पशुओं का भी ध्यान रखना होगा। पशुओं को सुरक्षित और सूखी जगह पर रखें, ताकि बारिश और तेज हवाओं से उन्हें परेशानी न हो। उनके चारे को भी भीगने से बचाना चाहिए।



अगर खेतों में पानी जमा हो जाता है, तो उसे बाहर निकालने की व्यवस्था करें। इससे फसलों की जड़ों को नुकसान होने का खतरा कम किया जा सकता है।



किसानों के लिए इस समय सबसे बड़ी चुनौती तैयार फसल को सुरक्षित रखना है। धान की कटाई के महत्वपूर्ण दौर में बारिश होने से किसानों की मेहनत और लागत पर असर पड़ सकता है।



सरकार ने नुकसान का आकलन करने के दिए निर्देश

छत्तीसगढ़ में मौसम की स्थिति को देखते हुए सरकार ने संभावित नुकसान का आकलन करने के निर्देश भी दिए हैं। अधिकारियों को सतर्क रहने और हालात पर नजर रखने के लिए कहा गया है।



छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से धान की खरीदी शुरू होनी है। ऐसे में खरीदी शुरू होने से पहले बारिश की आशंका ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। किसानों के लिए आने वाले कुछ दिन महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इस दौरान प्रदेश के कई इलाकों में धान की कटाई का काम तेजी पकड़ सकता है।



अगर इस समय बारिश होती है, तो फसल को काटने, सुखाने और सुरक्षित रखने में परेशानी आ सकती है। इसलिए किसानों को मौसम विभाग के पूर्वानुमान और कृषि वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार काम करना चाहिए।



किसानों को सतर्क रहने की जरूरत

छत्तीसगढ़ में धान की फसल तैयार होने के समय मौसम में आया बदलाव किसानों के लिए चुनौती बन गया है। बारिश और तेज हवाओं से खड़ी फसल गिरने, कटे हुए धान के भीगने और उसकी गुणवत्ता खराब होने का खतरा है।



ऐसे में किसानों को जल्दबाजी में कटाई करने के बजाय मौसम की स्थिति को ध्यान में रखकर फैसला लेना चाहिए। कृषि वैज्ञानिकों ने अगले दो से चार दिनों तक कटाई रोकने की सलाह दी है। वहीं, जिन किसानों ने धान काट लिया है, उन्हें उपज को बारिश से बचाने के लिए जरूरी इंतजाम करने चाहिए।



मौसम की जानकारी पर नजर रखने, फसल को सुरक्षित रखने और समय पर जल निकासी की व्यवस्था करने से संभावित नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है। 15 नवंबर से धान खरीदी शुरू होने वाली है, इसलिए किसानों के लिए अपनी तैयार फसल की गुणवत्ता बनाए रखना बेहद जरूरी है।

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