थानों के मूसवा न खा पाएंगे ड्रग, न पी पाएंगे शराब, बारकोड से होगी मॉनिटरिंग
समझें क्या है पूरा मामला
Raipur। सरकारी मूसवा केवल धान ही नहीं गांजा, ड्रग्स तक खा जाते हैं। इतना ही नहीं हर साल करोडों की शराब भी गटक जाते है। इन्हे रोकने के लिए थानों मे डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम लाया गया है। जिससे जब्त सामानों की डिजिटल निगरानी होगी। जब्त माल पर बारकोड लगेगा।
जिसके जरिए आवक-जावक, हैंडलिंग और रिकॉर्ड की डिजिटल ट्रैकिंग होगी। पुलिस के मुताबिक इससे चेन ऑफ कस्टडी पूरी तरह सुरक्षित रहेगी। यानी जब्त सामान किसके पास रहा, कब निकला और कब वापस आया, इसकी पूरी जानकारी सिस्टम में दर्ज रहेगी। इससे पारदर्शिता, जवाबदेही और कार्य में तेजी आएगी।
गुढ़ियारी थाने से हुई शुरुआत
छत्तीसगढ़ पुलिस ने थानों के मालखाने को हाईटेक बनाने की शुरुआत कर दी है। रायपुर के गुढ़ियारी थाने में ई-मालखाना प्रणाली लागू की गई है। अब जब्त सामान का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रहेगा। हर सामान की पहचान बारकोड से होगी। उसकी लोकेशन और मूवमेंट भी सिस्टम में दर्ज होगी। इससे जब्त सामान गायब होने या रिकॉर्ड गड़बड़ाने की आशंका काफी हद तक खत्म होगी।
पहले हुआ भौतिक सत्यापन
नई व्यवस्था लागू करने से पहले गुढ़ियारी थाने में रखे सभी जब्त सामान का भौतिक सत्यापन कराया गया। इसके बाद पूरे मालखाने को वैज्ञानिक तरीके से व्यवस्थित किया गया। रैक को ।1, ।2, ठ1 और ठ2 जैसी श्रेणियों में बांटा गया। अब हर सामान की तय जगह होगी। जरूरत पड़ने पर उसकी लोकेशन तुरंत पता चल जाएगी।
हर सामान पर लगा बारकोड
मालखाने में रखी हर जब्त सामग्री पर बारकोड लगाया गया है। सभी वस्तुओं का सॉफ्टवेयर के जरिए डिजिटल पंजीयन किया गया। अब सामान जमा करना, निकालना और रिकॉर्ड खोजना पहले की तुलना में बेहद आसान हो गया है। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होने से रिकॉर्ड में गड़बड़ी की गुंजाइश भी कम होगी।
अधिकारियों के सामने हुआ डेमो
ई-मालखाना प्रणाली का विस्तृत प्रदर्शन भी किया गया। इसमें डिजिटल पंजीयन, बारकोड आधारित पहचान, रैकवाइज स्टोरेज और रिकॉर्ड ट्रैकिंग की पूरी प्रक्रिया दिखाई गई। इस दौरान डीसीपी नॉर्थ मयंक गुर्जर, डीसीपी वेस्ट संदीप पटेल, एडिशनल डीसीपी आकाश मरकाम और एसीपी पूर्णिमा लामा सहित अन्य अधिकारियों ने सिस्टम का निरीक्षण किया और इसकी कार्यप्रणाली की समीक्षा की।
गुढ़ियारी थाने की पहल बनी मिसाल
यह पूरी व्यवस्था डीसीपी नॉर्थ जोन के तहत थाना गुढ़ियारी प्रभारी और मालखाना स्टाफ के संयुक्त प्रयासों से तैयार की गई है। पुलिस मुख्यालय इसे क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम में तकनीक के बेहतर इस्तेमाल की दिशा में बड़ा कदम मान रहा है। इससे जब्त सामान का सुरक्षित संधारण और अभिलेख प्रबंधन पहले से ज्यादा मजबूत होगा।
अब दूसरे थानों में भी होगी तैयारी
गुढ़ियारी थाने में शुरू हुई यह व्यवस्था सफल रही तो जल्द ही प्रदेश के दूसरे थानों में भी ई-मालखाना प्रणाली लागू की जा सकती है। इससे कागजी रिकॉर्ड की जगह डिजिटल व्यवस्था लेगी। पुलिस को जांच में सुविधा मिलेगी और अदालतों में जब्त सामान से जुड़े मामलों में भी पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ेगी।
FAQ
- ई-मालखाना क्या है?
ई-मालखाना एक डिजिटल सिस्टम है जिसमें थानों में जब्त सामान का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन रखा जाता है। इसमें बारकोड के जरिए हर वस्तु की ट्रैकिंग होती है। - इस सिस्टम से क्या फायदा होगा?
इससे जब्त सामान की हेराफेरी या गुम होने की संभावना कम होगी। साथ ही चेन ऑफ कस्टडी मजबूत होगी और रिकॉर्डिंग पारदर्शी बनेगी। - यह व्यवस्था कहां शुरू हुई है?
छत्तीसगढ़ के रायपुर स्थित गुढ़ियारी थाने में ई-मालखाना प्रणाली की शुरुआत की गई है और आगे इसे अन्य थानों में लागू करने की योजना है।
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