छत्तीसगढ़ पुलिस प्रमोशन विवाद : हाईकोर्ट ने 8 अधिकारियों को नोटिस
समझें क्या है पूरा मामला
छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग में वरिष्ठता के आधार पर पदभार देने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। एक ASP ने आरोप लगाया है कि उनसे कनिष्ठ अधिकारियों को SP और कमांडेंट जैसे महत्वपूर्ण पदों का प्रभार दे दिया गया। इस मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है।
बिलासपुर हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार सहित आठ अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने सभी पक्षों से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर 2026 को होगी।
20 जुलाई के आदेश को दी गई चुनौती
यह मामला ASP ऋचा मिश्रा की याचिका से जुड़ा है। उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर 20 जुलाई 2026 को जारी शासन के आदेश को चुनौती दी है।
याचिका में कहा गया है कि पुलिस विभाग में उच्च पदों का प्रभार देते समय वरिष्ठता को ध्यान में नहीं रखा गया। ऋचा मिश्रा का दावा है कि वरिष्ठता सूची में उनका स्थान 35वें नंबर पर है। इसके बावजूद उन्हें SP और कमांडेंट जैसे पदों का प्रभार नहीं दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनसे जूनियर अधिकारियों को इन पदों की जिम्मेदारी सौंप दी गई। यह प्रक्रिया नियमों के खिलाफ है।
2014 के परिपत्र का दिया गया हवाला
याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट में 14 जुलाई 2014 के शासन परिपत्र का हवाला दिया गया। इसमें कहा गया है कि वरिष्ठ अधिकारी को नजरअंदाज कर कनिष्ठ अधिकारी को उच्च पद का प्रभार नहीं दिया जाना चाहिए। ऋचा मिश्रा के वकील ने दलील दी कि शासन के अपने नियमों का पालन नहीं किया गया। वरिष्ठता सूची में ऊपर होने के बाद भी उन्हें अपेक्षित जिम्मेदारी नहीं मिली।
हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना मामला
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने याचिका में पेश दस्तावेजों और शासन के पुराने निर्देशों को देखा। कोर्ट ने माना कि प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ता का मामला बनता है। इसके बाद कोर्ट ने 20 जुलाई के आदेश के तहत दिए गए प्रभार पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। हालांकि यह रोक अंतिम फैसला नहीं है। मामले की आगे की सुनवाई के बाद ही स्थिति साफ होगी।
आठ अधिकारियों से मांगा जवाब
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के साथ उन आठ अधिकारियों को भी नोटिस जारी किया है, जिन्हें विवादित आदेश के तहत SP और कमांडेंट जैसे पदों का प्रभार मिला है। अब सरकार और संबंधित अधिकारी अपना पक्ष कोर्ट के सामने रखेंगे। इसके बाद कोर्ट मामले में आगे की कार्रवाई तय करेगा।
सरकार ने मांगा जवाब के लिए समय
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय मांगा गया। कोर्ट ने सरकार की मांग स्वीकार कर ली है। अब अगली सुनवाई 23 सितंबर को होगी। इस दौरान सरकार और अधिकारियों के जवाब के बाद मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
पुलिस विभाग में वरिष्ठता को लेकर उठे सवाल
इस मामले के बाद छत्तीसगढ़ पुलिस में वरिष्ठता और पदभार देने की प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि अगर वरिष्ठता नियम लागू हैं तो फिर कनिष्ठ अधिकारियों को उच्च पदों की जिम्मेदारी कैसे दी गई। फिलहाल हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद यह मामला न्यायिक प्रक्रिया में है। अंतिम फैसला कोर्ट में सभी पक्षों की दलील सुनने के बाद आएगा।
FAQ
- छत्तीसगढ़ पुलिस प्रमोशन विवाद किस मामले से जुड़ा है?
यह मामला SP और कमांडेंट जैसे पदों का प्रभार देने में वरिष्ठता की अनदेखी के आरोप से जुड़ा है। - हाईकोर्ट ने इस मामले में क्या आदेश दिया है?
हाईकोर्ट ने 20 जुलाई 2026 के आदेश के क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक अंतरिम रोक लगाई है। - हाईकोर्ट ने किन लोगों को नोटिस जारी किया है?
कोर्ट ने राज्य सरकार और प्रभार पाने वाले 8 कनिष्ठ पुलिस अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
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